बुधवार, 30 अप्रैल 2025

हर कोई मा बाप चाहता है की बच्चा वैभव जैसा बने।

हर कोई मा बाप चाहता है की मेरा बच्चा भी ऐसा ही खिलाड़ी बने जब से वैभव चर्चा में है। पर इस सफलता के लिए वैभव के मा बाप ने अपनी सुख सुविधा का भी त्याग किया, मुश्किल हालात का सामना किया है, हार नहीं मानी। तभी सफलता मिली है। 
मा बाप जब सपना देखते है तो उसे पूरा करने के लिए अपने सुख दुख की परवाह किए बगैर बस उनकी एक ही तमन्ना होती है की उनकी संतान आगे बढ़े, अपना नाम करे, समाज का नाम करे ओर देश में नाम करे।

इस सफलता के पीछे वर्षो की मेहनत ओर अथक प्रयास होते है एक तरह से टीम बनाकर। 

आज वैभव चमक रहा है तो निश्चित ही उनके मात पिता की मेहनत ओर हौसला की वजह है। वैभव की कड़ी मेहनत ओर अपने पर भरोसा रखने के कारण ही ये नायाब हीरा देश को ओर आगे लेकर जाएगा। 

शुक्रवार, 25 अप्रैल 2025

दल से बड़ा देश।

दल से बड़ा देश।
कश्मीर में हुई जघन्य घटना का पुरा विश्व विरोध ओर दुख जाहिर कर रहा है सिर्फ दुश्मन देश ओर उन से सहानुभूति रखने वाले लोगों को छोड़।

ये घटना पीछे घटित घटनाओं का एक नया रूप है। इस घटना में आतंक के संगठन का नाम मॉडर्न किया है कहते है इसमें काम करने वाले जाहिल भी अलग अलग रूप में होते है इनके काम का ढंग अलग है। 

पिछले कुछ वर्षो में कश्मीर में बढ़ रही शांति ओर बढ़ती पर्यटक इनके लिए सर दर्द बना हुआ था। एक अनुमान के मुताबिक कश्मीर के राजस्व के कुल भाग का 7 % सिर्फ पर्यटन से आता है ओर लाखो लोगो की आजीविका इस पर्यटन से चल रही थी।

दूर बैठे लोग इस देश की तरक्की और कश्मीर में शांति से बहुत ही दुखी थे लिहाजा इस घटना को अंजाम दिया ओर धर्म के नाम हत्या कर एक तरह से डर का माहौल बनाना चाहा।

घटना के बाद देश क्रोध में है ओर सरकार भी जनता की भावना को समजते हुए उसी तरह के कदम ले रही है।

इस वक्त दल, विचारधारा, तर्क , वितर्क से सबसे बड़ी चीज है वो है देश। 

देश की एकता और सुरक्षा के लिए हर भारतीय की एक ही आवाज बस दुश्मन को मीठी में मिला दो। .......... #पहलगाम

गुरुवार, 24 अप्रैल 2025

सिंधु जल समझौता। भारत पाक।

सिंधु जल समझौता। 
दो दिन पूर्व हुई घटना से पूरा देश आक्रोशित है और सरकार से जवाब सुनना चाहता था देश। इस घटना से सरकार, और विपक्ष दोनों साथ है दुश्मन देश के लिए कड़ा जवाब को लेकर।

कल रात को विदेश सचिव के प्रेश कॉन्फ्रेश में सबसे पहले सटीक लाइन में कहा की सिंधु जल समझौता को रोक दिया गया है उसके साथ साथ ओर भी रोक लगाई है। 

संसद हमला, पुलवामा हमला हुआ  तब भी इस समझौते को नहीं रोका गया था ये पहली बार है जब इसे रोका गया है।

इसका असर पाकिस्तान पीने के लिए पानी, खेती के लिए पानी ओर बिजली उत्पादन के लिए पानी पर भारी पड़ेगा। अभी पीने के लिए पानी ओर दिसंबर में खेती के लिए पानी की जरूरत पड़ेगी। ना पीने को पानी, ना खेती को पानी ओर ना बिजली के लिए पानी मतलब पूरी आर्थिक हालात पर सीधी डिप्लोमेटिक स्ट्राइक है भारत सरकार की।

आइए हम सिंधु समझौता को समझें और उसके प्रभाव को देखे। 

कल के जो भी निर्णय थे वो डिप्लोमेटिक एक्शन है। इसमें सिंधु जल समझौता बेहद ही करारा जवाब है दुश्मन देश के लिए। 

ये 1960 में भारत और पाकिस्तान के मध्य हुआ था और मध्यस्था में विश्व बैंक की भूमिका थी।

इस समझौते पर पंडित जवाहर लाल नेहरू और अयूब खान के हस्थक्षर है।

ये जल समझौता 6 नदियों के लिए जिसमें भारत के लिए रावी,ब्यास ओर सतलुज तो पाकिस्तान की 3 नदिया सिंधु,झेलम ओर चिनाब के जल वितरण को लेकर समझौता हुआ था।

सिंधु नदी के साथ जुडी महत्वपूर्ण नदी घाटी परियोजनाएं है - भाखड़ा नांगल, इंदिरा गांधी परियोजना, पोंग परियोजना चमेरा परियोजना, थीन परियोजना, नाथपा झाकड़ी परियोजना, सलाल, बगलिहार परियोजना, दुलहस्ती परियोजना, तुलबुल परियोजना, और उड़ी परियोजना।

सिंधु नदी तिब्बत के पठार में मानसरोवर झील के पास कैलाश पर्वत श्रृंखला के बोखार-चू नामक ग्लेशियर से निकलती है. यह नदी उत्तर-पश्चिम दिशा में बहती है और लद्दाख क्षेत्र में भारत के डेमचोक नामक स्थान पर प्रवेश करती है. 

उद्गम:
सिंधु नदी तिब्बत के मानसरोवर झील के पास कैलाश पर्वत श्रृंखला में बोखार-चू नामक ग्लेशियर से निकलती है. 
मार्ग:
यह नदी उत्तर-पश्चिम दिशा में बहती है और भारत के लद्दाख क्षेत्र में प्रवेश करती है. 
सहायक नदियाँ:
सिंधु नदी की कई सहायक नदियाँ हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
झेलम नदी
चिनाब नदी
रावी नदी
व्यास नदी
सतलज नदी. 
अंत:
सिंधु नदी पाकिस्तान में प्रवेश करती है और अरब सागर में गिरती है. 

इस के प्रभाव को हम अब समझ सकते है ओर दुश्मन देश के लिए गहरी चोट है। 

#सिंधु #सिंधु_जल_समझौता #पहलगाम

शुक्रवार, 18 अप्रैल 2025

अमरीका- चीन और डंपिंग मैदान भारत ??

अमरीका- चीन और डंपिंग मैदान भारत ??

जब से अमेरिका में नये राष्ट्रपति ट्रंप ने सरकार संभाली है तब से पूरे विश्व में एक अनिश्चिता का माहौल बना हुआ है ओर उसमे ट्रंप के नए नए बयान इसको पुख्ता करते है।


अभी अभी ट्रंप ने व्यवसायिक युद्ध छेड रखा है ओर वो चाहते है दूसरे देश अमेरिका से डरे। ट्रंप ने टैरिफ बढ़ा कर सब देशों को चिंता में डाल दिया है पर वहीं वो खासकर चीन से जबरदस्त डरा धमक रहा है पर चीन भी चुपचाप नहीं बैठने वाला है।

इस युद्ध में भारत की भूमिका अहम है अबतक के प्रयास अच्छे है भारत पर लगाए टैरिफ का जवाब शांतिपूर्ण तरीके से देना चाहता है ओर कोशिश भी हो रही है। हमारे ऑटो , कपड़ा ओर एग्री सेक्टर पर असर देखा जा सकता है।

अब इस अमरीका चीन की लड़ाई में सबसे बड़ा ग्राहक देश भारत है। दोनों देश चाहेंगे की उनका सस्ता माल भारत में बेचा जाए। इस सस्ते के चक्कर में भारत के लघु, मध्यम ओर बड़े उद्योग पर असर पड़ सकता है। जब सस्ता माल बाजार में मिल रहा है तो भारतीय कंपनियों के लिए मुश्किल होगा । फिर जब विदेशी कंपनी अपना बाजार भारत में जमा लेंगे तो फिर धीरे धीरे अपने नुकसान कि भरपाई इस भारत के बाजार से करेंगे और तब तक भारतीय कंपनियां मुकबला नहीं कर पायेगी। 

भारत सरकार ने इस खतरे को समझते हुए एक कमेटी तो बनाई पर ऐसा ना हो की कमेटी जब अपनी बात रखे तब तक देर हो जाए। 

हमारे मेक इन इंडिया, एक जिला एक प्रॉडक्ट, स्टार्टअप ओर छोटे उद्योगों और बेरोजगारों को रोजगार देने की योजना की रक्षा करते हुए सरकार जरूर इस व्यपारिक युद्ध से अच्छा हल निकलेगी।

दो दिन से शेयर बाजार भी मुस्कान 🤗 दे रहा है पर इस डंपिंग मैदान बनाने से रोकना होगा। ...

#टैरिफ_वॉर

गुरुवार, 7 सितंबर 2023

एक देश एक चुनाव। One Nation One Election

1950 में जब संविधान लागू किया तब उसके बाद 1951 से 1967 तक लोकसभा ओर विधानसभा के चुनाव पूरे भारत देश में साथ साथ होते थे हर पांच वर्षो के बाद।
एक देश एक चुनाव को लागू करने की जो बात कुछ दिनों से चल रही है वो दरअसल नया नहीं है। 

ये सन 1952,1957,1962 और 1967 में लागू था और उस हिसाब से एक चुनाव साथ में होते थे। ये प्रिक्रिया कुछ विधानसभा भंग होने की स्थिति 1968-69 के बाद इस पर रोक लग गई।
फिर से इस विषय पर 1983 में इलेक्शन कमीशन की वार्षिक रिपोर्ट में आया फिर लॉ कमिशन ने 1999 में इस विषय पर बात की।

2014 में जब मोदी जी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनी तो इस विषय को गंभीरता से आगे बढ़ाया और समय दर समय इस पर विचार विमर्श और डिबेट में रखा गया। 2018 में लॉ कमिशन ने ड्राफ्ट सबमिट किया उसमे एक देश एक चुनाव के विषय पर अपनी राय रखी और उसके मुताबिक कुछ कानून में बदलाव की बात की गई।

एक देश एक चुनाव को लागू करने के लिए देश की 50% प्रतिशत विधानसभा का समर्थन और उसके लिए कुछ कानूनों में संशोधन की जरूरत होगी। 2020 में मोदी जी ने इस विषय को फिर से उठाया था।

इस व्यवस्था को लागू करने से निश्चित तौर पर देश को एक नया फायदा होगा और देश की प्रगति के लिए विकास कि रफ्तार लगातार पांच वर्ष तक चलती रहेगी बिना किसी अवरोध के। बार बार चुनावों के होने से देश का नेतृत्व कड़े नीतिगत निर्णय नहीं ले पाता है  और मुख्य रूप से विकास का काम रुक जाता है।
एक देश एक चुनाव को करने के लिए इस विशाल देश में प्रारंभ में कई संसाधनों की जरूरत रहेगी।

राजनीति के रूप में देखा जाए तो विश्व में जहा एक देश एक चुनाव होता है वहा मुख्य रूप से सिर्फ दो राजनीतिक विचारधारा का ही बोलबाला रहता है और अलग अलग क्षेत्रिय दलों का करीब करीब कोई वजूद ही नहीं रहता। एक पक्ष और एक विपक्ष ही देखा गया है।

अगर ऐसे देखने जाए तो  एक देश एक चुनाव होता है तो कम से कम कांग्रेस के लिए संजीवनी बूटी की तरह होगा वो हाल के वर्षों में जिस तरह संघर्ष कर रही है उसके लिए तो फायदा है। दरअसल एक देश एक चुनाव में उन्हीं राजनीतक दलों को फायदा है जिनका प्रभाव पूरे देश में हो और उसमें बीजेपी के बाद कांग्रेस पार्टी है जिसका संगठन पूरे देश में है। 

एक देश एक चुनाव में मुद्दे जो भी होंगे वो पूरे देश में होंगे और उसके लिए पक्ष और विपक्ष ही होगा और उसमे अब तक देखे तो बीजेपी और कांग्रेस दल ही नजर आ रहे है। 

एक देश एक चुनाव से जरूर आर्थिक खर्च कम होगा और साथ साथ में हर वक्त चलने वाला राजनीतिक वाक युद्ध भी कम होता नजर आएगा. उम्मीद है  इस पर जल्द फैसला आएगा।

One Nation one Election 

implemented in 1950, from 1951 to 1967, Lok Sabha and Assembly elections were held simultaneously across India every five years.
The talk of implementing one country, one election which has been going on for some days is actually not new.

This was applicable in the years 1952, 1957, 1962 and 1967 and accordingly elections were held simultaneously. This process was stopped after the dissolution of some assemblies in 1968-69.
Again this topic came up in the annual report of the Election Commission in 1983 and then the Law Commission talked about this topic in 1999.

In 2014, when the BJP government was formed under the leadership of Modi ji, this topic was taken forward seriously and it was kept in discussions and debates from time to time. In 2018, the Law Commission submitted a draft, in which it gave its opinion on the subject of one country, one election, and accordingly some changes in the law were talked about.

To implement one country one election, 50% of the country's assembly will need support and some laws will need to be amended for that. In 2020, Modi ji raised this topic again.

By implementing this system, the country will definitely get a new benefit and the pace of development will continue for five consecutive years without any hindrance for the progress of the country. Due to frequent elections, the leadership of the country is not able to take tough policy decisions and mainly the work of development stops.
To conduct one country one election in this huge country many resources will be needed initially.

As far as politics is concerned, in a world where one country one election is held, mainly only two political ideologies dominate and there is almost no existence of different regional parties. Only one side and one opposition have been seen.

If it is seen like this, one country one election, then at least it will be like sanjeevani booti for Congress, it is beneficial for the way it is struggling in recent years. In fact, in one country one election, only those political parties have the advantage which have influence in the entire country and after BJP, there is Congress party which has its organization in the entire country.

Whatever the issues will be in one country one election, they will be in the entire country and there will be pros and cons for it and till now, only BJP and Congress parties are visible.

One country, one election will definitely reduce the economic expenditure and at the same time the political war of words that goes on all the time will also be seen reducing. Hopefully a decision will be taken on this soon.

One Nation one Election



गुरुवार, 31 अगस्त 2023

भाई मैच तो कांटे का होगा।भारत पाकिस्तान। India vs Pakistan

भाई मैच तो कांटे का होगा।भारत पाकिस्तान।

जैसा की क्रिकेट भारत के लिए एक बड़ा खेल और अब बाजार बन चुका है तो अब इस खेल में खेल के साथ साथ आक्रमकता, पैसा और गलेमर्स भी खूब जमकर देखा जा सकता है । 

जी हां दोस्तो जैसा की मेरा पसिंदा खेल भी क्रिकेट ही रहा है और वेसा ही कुछ आप के साथ भी होगा। अब में बात कर रहा हूं दो दिन पूर्व एशिया क्रिकेट कप की और उसमे होने वाले भारत पाकिस्तान मैच की।

एशिया कप करीब 1984 में प्रारम्भ हुआ था ओर इसमें 6 देश भाग लेते है जैसा कि इस कप का बुखार ही कुछ अलग किस्म का होता है क्युकी इसमें दो प्रमुख प्रतिद्वंदी भारत और पाकिस्तान आमने सामने खेलते है ओर कही बार भिडंत भी इस कप में हो चुकी है।

अब तक इस एशिया कप में 7 बार भारत और 6 बार श्री लंका कप जीत चुकी है वहीं पाकिस्तान 2011 के बाद करीब 12 साल से कप जितने के इंतजार में है ओर अबकी बार वो अभी  वर्ल्ड की प्रमुख टीम बनकर खेल रही है।

भारत पाकिस्तान के मैच पर सबकी निगाह होगी और एक तरफ विराट कोहली, रोहित शर्मा है तो दूसरी तरफ बाबर आजम ओर रिजवान जैसे प्लयेर है । एक तरफ बुमराह है तो दूसरी तरफ रउफ है। 
इन सब से इतर एक तरफ भारत किकेट टीम को पसंद करने वाले प्रशसंक है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के टीम के प्रशंसक। भाई मैच तो पूरा गजब का होगा। 

एशिया कप 2010 में दो ऐसे यादगार पल जो अभी भी लोगो को याद होगा।

#गंभीर ओर #कामरान के बीच तीखी बहस।


दरअसल 2010 में पाकिस्तान ने खेलते हुए भारत को 268 का लक्ष्य दिया था ओर भारत ने उसे 7 विकेट पर 271 का लक्ष्य 49.5 ओवर में पा कर जीत गया था और उसमें गंभीर मेन ऑफ मैच रहे थे 83 बोल में 97 ठोके थे और तब ब्रेक में पाकिस्तान के विकेटकीपर कामरान अकमल के साथ गंभीर की गजब गर्मागर्म बहस हुई थी।

#हरभजन ओर #शोएब अख्तर।

इसी मैच में हरभजन ने शोएब अख्तर के 47 ओवर में उनकी गेंद पर जबरदस्त छक्का मार दिया तो दोनों के बीस बहस होने लगी ओर फिर हरभजन ने मोहमद अमीर कि गेंद पर विजय छक्का लगाया और फिर हरभजन अख्तर की तरफ देखने लगे।......

वाकई में जबरदस्त मैच था। अब शनिवार को इंतजार रहेगा। खेल भावना से खेल होगा।

#क्रिकेट #एशिया_कप #भारत #पाकिस्तान #cricket #indiavspakistan #india #AsiaCup2023 #viratkohli #rohitsharma #jadeja

शनिवार, 12 अगस्त 2023

अनुशासन सफलता की कुंजी है।

अनुशासन सफलता की कुंजी है।
आप जो ये तस्वीर देख रहे है ये तस्वीर उन दो महान खेल के खिलाड़ियों की है जिनका अपना एक दौर था । जी हां में बात कर रहा हूं हमारे भारत के सबसे ज्यादा पसंद करने वाले खेल क्रिकेट की और उस खेल के दो महान खिलाड़ी के जीवन के उस भाग की की व्यक्ति को अपने मजबूत समय में किस तरह अनुशासन बनाए रखना होता है।

ये वो दौर था जब मुंबई के स्कूल की एक दोस्त जोड़ी ने घेरुलू क्रिकेट में धमाल करते हुए भारतीय क्रिकेट टीम में प्रवेश लिया था और इस जोड़ी की खूब चर्चा शुरू से रही ।
भारतीय क्रिकेट टीम में खब्बू लेफ्ट बैट्समैन के रूप में विनोद कांबली इस कदर क्रिकेट में खेलने लगे थे कि उन्हें एक समय में क्रिकेट की रन मशीन कहा जाने लगा था और वो देश ओर दुनिया के सब क्रिकेट पिच पर एक साल में एक हजार बना चुके थे और उनका नाम देश ओर दुनिया में होने लगा था उनकी फेन फॉलोइंग भी बढ़ने लगी थी ओर चर्चा के साथ प्रसिद्धि ओर फिर शोक मौज भी बढ़ कर बोलने लगे थे वो धीरे धीरे खेल को भूल अन्य चीजों में चर्चा में आने लगे उनके जीवन ओर खेल में अनुशासन कम होने लगा ओर एक दौर ऐसा आया कि इस महान खिलाड़ी का आखिरी ब डा मेंच आप सब को याद होगा 1996 का क्रिकेट वर्ल्ड कप और जब ये खिलाड़ी आंखो में आंसू लिए मैदान से बाहर आ रहे थे और धीरे धीरे ये खिलाड़ी गुमनामी में कई खो गया और फिर क्रिकेट में वापसी ना कर पाए।

वहीं दूसरी तस्वीर में कांबली के दोस्त सचिन तेंदुलकर की है जो कि दुनिया में क्रिकेट खेल के भगवान कहे जाने लगे । सरुआत दोनों ने साथ की थी और टीम में भी साथ आए थे और जब कांबली का बल्ला बोल रहा था तब इनका बल्ला खामोश था पर जीवन ओर खेल में अनुशासन बनाए रखा और धीरे धीरे दुनिया के हर खेल प्रेमी के जुबान पर आज सचिन का नाम है। आज उनके लाखो खेल प्रेमी है उन्होंने जीवन में खूब ऊंचाइयां छू ई पर कभी अनुशासनहीनता का समाचार हम किसी ने नहीं पढ़ा और ना ही सुना। बस आज हजारों रन बना कर एक दोस्त दुनिया का बादशाह है तो एक दोस्त नेपथ्य में जी रहा है। 

दोस्तो जीवन में अनुशासन जरूरी है आप भले ही शिखर पर हो पर अनुशासन बनाए रखे अपने जीवन ओर कार्य के प्रति तो कभी असफलता हाथ नहीं लगेगी। 

दोनो खिलाड़ी महान है बस अनुशासन ने एक को महान और एक को कम कर दिया। 

क्रिकेट। क्रिकेट_खेल

सांचौर के युवा, मौजीज और प्रबुद्ध लोग आगे आए। सांचौर जिला।

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#सांचौर के युवा, मौजीज और प्रबुद्ध लोग आगे आए। 

गलत का विरोध करे और सकारात्मक विचारों का सम्मान करे। 

निसंदेह सांचौर में जो हुआ वो आने वाले भविष्य को लेकर गहरी चिंता का विषय है। में सांचौर के युवा, वरिष्ठ और प्रबुद्ध जन से निवेदन करता हूं कि हमारा सांचौर इतना कभी बुरा नहीं था जितना कुछ अब बदला है। सच्चाई को स्वीकार कर हर समाज के वरिष्ठ, मोजीज लोग राजनीतिक से दूर होकर गलत कार्यों का विरोध करे और अपनी पीढ़ी और युवाओं को गलत रास्तों पर जाने से बचाए। 
दो दशक पहले सांचौर और आज के सांचौर को देखे तो जमीन आसमान का फर्क नजर आता है। उस दौर का सांचौर का व्यक्ति सच्चा संचोरी नजर आता था। अपने मेहनत और विपरीत हालातो में जीने की उन्हें आदत थी ओर वो आने वाली पीढ़ियों को भी यही सीख देते थे कि ये धरती कच्चे कमजोर की नहीं है यहां हर चीज के लिए मेहनत करनी पड़ेगी और सांचौर की जनता ने मेहनत के बल देश प्रदेश में नाम किया ओर सांचौर में भी आर्थिक विकास हुआ। क्युकी सांचौर में ना तो कोई भोगोलिक व्यवस्था लोगो के आजीविका के लिए उपयुक्त थी और ना मानवीय विकास उद्योग जिस से की वो कमा कर अपना जीवन चला पाए। 

पिछले दशक में इतना बदलाव हो गया कि अब देसावारी कमाई से जायदा असामाजिक रूप से कमाई ने लोगो को आकर्षित किया ओर इसमें युवा इस क़दर आकर्षित हुआ की एक बड़ी संख्या में हर जाती, समाज में ऐसे युवाओं की होड़ लग गई। एक काली गाड़ी, सफेद कपड़े ओर रोब जमाने वाले गोगल्स। शादी, सामाजिक कार्यक्रम में प्रतिस्पर्धा में अंधाधुंध फिजूल खर्ची का दौर चला। सांचौर में पहले सिर्फ खेती की कमाई ही जरिया था और 70 प्रतिशत वो भी बारिश पर खेती निर्भर थी क्युकी कुछ भाग में ही मीठा पानी था। इसके बाद लोग सांचौर से बाहर निकल कर स्वाभिमान से संघर्ष कर डेसावरी में मेहनत कर अपने आप को योग्य बनाया ओर समाज में भी योगदान दिया पर सांचौर में नेहर आने के बाद व्यवस्था बदल गई और लोगो के जीवन में सुखद पहल आने लगे पर उसके साथ साथ लोगो में आपसी वैमनस्य बढ़ने लगा, एक दूसरे को पैसों के बल नीचा दिखाने की होड़ लगी ओर इसके नतीजन नकारात्मक घटनाओं में वृद्धि हुई। सांचौर शहर में अब तीन तरह की आर्थिक व्यवस्था का बोलबाला है। खेती की इनकम, डेसवारी इनकम और एक अन्य इनकम जिसे आप सब जानते है। पिछले पांच वर्षो में सांचौर न्यूज हेडलाइन बन गया है और कुछ ना कुछ वजह रही है । इस से युवा शक्ति गलत तरीकों के प्रति रुझान बढ़ा है और इसको हम सब मिलकर रोकना चाहिए।

सांचौर में अंधी कमाई को समाज ने भी सम्मान दिया और हर समाज का व्यक्ति इन कमाई के आगे नतमस्तक सा खड़ा है। फिर हर असामाजिक गतिविधि को गर्व माना जाने लगा ओर सामाजिक बदलाव भी उसी का भाग था।

आज सांचौर में भाईचारा, मान सम्मान और अपनास की जगह जातीय रोबदारी, ठसक और वर्च्चव ने ले ली है। 

मेरी बात को आगे बढ़ाते हुए खिव सिंह जी लिखते है कि....

युवाओं की ऊर्जा उचित, उपयुक्त, सकारात्मक और सही दिशा में प्रवृत्त होंनी चाहिए। अनुचित एवं गलत प्रवृतियों का महिमामंडन नही होना चाहिए। मेहनत और संघर्ष से हासिल उपलब्धियों का ही सम्मान व बखान किया जाए। गलत तरीके से वर्चस्व स्थापित करने की होड़, अनुचित एवं अवैध तरीकों से अकूत धन संपत्ति कमाने की कुत्चित प्रवृति एवं आपतिजनक गतिविधियों को सामाजिक स्तर पर हिकारत भरे नजरिए से देखा जाकर हतोत्साहित किया जाना चाहिए। बहरहाल सामाजिक सद्भाव, आपसी भाईचारा, सर्वजातीय सम्मान, स्वस्थ व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा का स्थापन एवं आदर्श जीवन मूल्यों के साथ सामाजिक मर्यादाओं का पालन करते हुए सकारात्मक ऊर्जा एवं सोच के साथ विकास की सही दिशा में अग्रचर हुआ जाए तो निश्चित रूप से सत्यपुर का गौरव बढ़ेगा और पुराना वैभव लोटेगा। नया जिला बनना सार्थक होगा। और इसकी ख्याति बढ़ेगी! #सांचौर #में_संचौरी #sanchore

शुक्रवार, 4 अगस्त 2023

बाजरा की खेती। बाजरा खाने का फायदा। Millet Agro। India

#मुठ्ठी #भर #बाजरे #के #लिए #में #हिंदुस्तान #की #सलतनत #खो #बैठता

ये वाक्य उस वक़्त दिल्ली के बादशाह शेरशाह सुरी के मुंह से निकले थे जब वो भीषण युद्ध से हार कर निकला था,
जी हां ये बाजरा जिसने हमारी कहीं पीढ़ियों को संभाल कर रखा दैनिक जीवन उपयोगी भोजन में काम आने वाला बाजरा दरअसल भारत और अफ्रीका में पाया जाता है इसकी उत्पति करीब 2000 ईसा पूर्व की बताए गई है.

बाजरा एक ऐसी फसल है जिसके लिए ज्यादा अच्छी भूमि ओर पानी की जरूरत नहीं होती है इसके लिए मानसून का समय उपयोगी होता है और वैसे इसे पानी देकर भी पकाया जा सकता है.

बाजरा कम पानी ओर उच्च तापमान में ओर कम समय में,कम खर्चे में फसल पक जाती है,ये राजस्थान में सबसे ज्यादा ओर विशेषकर जालोर,बाड़मेर,जैसलमेर ओर थोड़ी थोड़ी राजस्थान के हर भाग ओर गुजरात में होती है
ये फसल ही हमारे जीवन जीने का आधार था उसका उपयोग खाने और जरूरी काम के लिए उसको बेच कर जो पैसा आता था उस से काम चलता था.

बाजरा का खाने के साथ साथ पशु चारा ओर बीयर बनाने के काम आता है इसमें फाइबर ओर एनर्जी विटामिन होते है जो बहुत काम आते है ये महिलाओ में खून की कमी को पूरा करता है ओर भी इसके बहुत फायदे है.

आजकल हमारा क्षेत्र नेहरी होने के कारण बाजरा की बुवाई कम होने लगी है ओर लोगो के भोजन में बाजरे की जगह गेंहू ने ले ली है वर्ना एक वक़्त था ' फाफरे तो मेहमान आते तब बनते थे ' ,
नवी पिडी भी आजकल बाजरे का भोजन कम करने लगा है अक्सर पाचन शक्ति का बहाना बनाते है पर ये पाचन शक्ति बढ़ाने में मददगार है.
हमेशा बाजरी के साथ साथ घी, गावरफली की सब्जी,प्याज,दही, गुड़ हो तो आप जमकर इसका लुफ्त उठाते होंगे 
अब धीरे धीरे बाजरे की उपयोगिता बढ रही है लिहाजा इसके एक्सपोर्ट का ऑप्शन भी खुला है जो बन्धु एग्रो बिजनेस में है..

वंदन इस बाजरी को जिसने हमारी कहीं पीढ़ियों को संभाला 👍👍
 #बाजरी #फसल #फायदे #सांचौर #जालोर #राजस्थान #एग्रो #बिजनेस #बीयर #आयरन

शनिवार, 22 जुलाई 2023

राजेन्द्र गुढ़ा क्यू हुए बर्खास्त मंत्री पद से। राजस्थान

राजेन्द्र गुढ़ा आबो हवा को पहचान जाते है। उनको पता है की चुनाव नजदीक है न्यूज और चर्चा में कैसे बना रहा जाता है। वो अपनी राजनीति के पक्के खिलाड़ी है। बाकी इतनी हिम्मत कौन कर सकता है। पल भर में ड्रेंड कर रहे है। बीजेपी मित्र स्वागत में खड़े है। वैसे पासवान जी के नक्शे कदम पर है। 

झुंझनु के उदयपुरवाटी से दो बार बसपा और कांग्रेस से जीत चुके है। इनके भाई रणवीर गुड़ा 2003 में लोक जन शक्ति टिकट पर जीते थे। जो राजस्थान यूनिवर्सिटी के छात्र संघ अध्यक्ष रह चुके है।

शिवम् गुड़ा राजेन्द्र गुड़ा के पुत्र है जो सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय है और जन सेवा में है।
 

#राजेन्द्र_गुढ़ा #Rajasthan #rajasthanelection2023

चुनावी भोज सांचौर। 🤗 #बात_करामात

चुनावी भोज सांचौर।  🤗 #बात_करामात 

दाल, सिरा, सोगरा ....

चुनाव आते ही चुनावी भोज की चर्चा खूब होती है और इसमें जमकर भाई लोग अपने शरीर का वजन ओर खून खूब बढ़ाने में लग जाते है पर इसका भी अपना एक इतिहास  है। आइए हम अपने विधानसभा सांचौर की बात करे और पता करे की सांचौर में ये चुनावी भोज कब शरू हुआ था।

तो थोड़ा बहुत पीछे जाना होगा और ये वो समय था जब लगातार सांचौर में विधायक पद पर विराजमान श्री रूगनाथ जी विश्नोई के राजनीतिक जीवन का निचला स्तर चल रहा था ओर करीब 1985 के बाद ओर 1990 के शरुआत में जब लक्ष्मी चंद जी मेहता दूसरी बार विधायक ओर पहली बार बीजेपी से विधायक बने । तब तक सामान्य खर्चे में चुनाव हो जाता था।

इधर सांचौर कांग्रेस किसी नए चेहरे की तलाश में थी जो युवा हो ओर कुछ नयापन लगे समाज में लिहाजा तब सांचौर से देसावरी की इनकम आना दिखने लगी थी ओर उनकी नजर श्री हीरालाल जी विश्नोई पर आकर टिकी जो युवा ओर खर्चे करने में योग्य थे। 

1990 के जल्द के बाद 1993 में चुनाव आ गए और अब सांचौर की राजनीति में देसवारी इनकम का बोलबाला शरु हो गया था लिहाजा सांचौर कांग्रेस से हीरालाल जी ने चुनावी भोज की मानो शरुआत की हो और तब से रोज सांचौर विश्नोई धर्मशाला में कड़ाई चढ़ने का रिवाज शरू हो गया। हर दिन लापसी, सिरा और दाल बनने लगी ओर इस भोज ने सांचौर की राजनीति को खर्चीला करने में अहम भूमिका निभाई । 
जब एक तरफ सिरा ओर रोज घी के पिपे खाली होने लगे तो फिर लक्ष्मीचंद जी ने भी अपनी राजनीति बचाने के लिए खर्चा बढ़ाया पर वो दाल और सोगरे (बाजरी) रोटी तक ही सीमित रहे ।

पर हकीकत में चुनावी भोज की महकी खुशबू की शरुआत करीब 1998 माने तो बेहतर होगा ये काल वो था जब सांचौर से दो युवा नेता और दोनों देसावरि ताकत का अहसास कराने वाले थे और आप को याद होगा लंबी हाइट ओर देशी अंदाज में कलबी समाज से श्री जीवाराम चौधरी चुनावी मैदान में उतरे और तब हीरा - जीवा जैसे नारे खूब चले और श्री जीवाराम के चुनावी मैदान में उतरते ही मेटल के दो सीधे व्यपारि की भिडंत हुई जिसमें देसवरि खर्च दिखने लगा और सांचौर के मतदाता भी इस बहाने चुनावी सभा का खूब हिस्सा बनने लगे और तब जीवाराम जी ने भी कल्बी ( आंजना) समाज की धर्मशाला में जहां दाल सौगरे बनते थे अब वहा भी बनास डेरी से घी के पीपे उतरने लगे ओर बड़ी बड़ी कड़ाई में दाल, सोग रेे के साथ साथ सिरा इधर भी बनने लगा ओर सांचौर की जनता खूब महकती खुशबू का भरपूर भोजन का आंदन लेने लगी जो आज तक निरंतर चालू है । 

मेरे भाई लोगो के चुनाव आने से चेहरों पर रंगत आ जाती है। कही बार तो अंगुलिया ओर होटो पर घी की चिकनाई ही नजर आती है।

आज सांचौर की राजनीति में श्री हीरालाल जी से शरू हुई ये  भोज परम्परा का कारवां श्री जीवाराम, श्री मोती बा, श्री सुखराम जी ओर श्री दानाराम राम जी तक पहुंच गया है। वैसे आजकल गृह प्रेवश भी चुनावी दस्तक की आहट माना जाय।

चुनाव भी सांचौर का कुछ ज्यादा ही खर्चीला माना जाने लगा अगर राजस्थान के अन्य हिस्सों की तुलना करे तो आजकल मामूली सरपंच, पार्षद, डेलीगेट में भी कड़ाई चढ़ने लगती है ओर बड़ी पंचायत में सरपंच चुनाव 40-50 लाख तक पहुंच गया है। 

इस चुनावी मोहत्सव में कुछ भाई तो सुबह उधर दिखते है ओर शाम को इधर दिखते है इन वोटो का कोई भरोसा नहीं कब किसी के लिए बटन दब जाएं। 

अब साहब इतना दाल, सिरा जीम लेंगे तो हम किस आधार पर अपने नेता से सही काम की मांग कर सकते है। .....वैसे आजकल घी भी मिलावटी आ रहा है थोड़ा दोस्तो अपनी सेहत का ध्यान रखे ये होटों पर चिकनाई ना आए तो चलेगा।🤗 

सिर्फ बातो को पंक्तिबद्ध किया है। वैसे जुड़ते रहिए आगे भी सांचौर राजनीति का सफर जारी रखेंगे। सिर्फ मजाक रूपी ले 🙏

#सांचौर #sanchore #पॉलिटिक्स

रविवार, 22 जनवरी 2023

कोई भी काम बड़ा या छोटा नहीं होता है। मेहनत ही पैसा है। work culture। work choice।

कोई भी काम बड़ा या छोटा नहीं होता उसको मेहनत से किया जाय तो उसमे ही अच्छी कमाई होती है।

हर भारतीय या फिर दुनिया के कोई भी देश का लड़का या लड़की और उनके माता पिता यही चाहते है की में या फिर मेरा पुत्र या पुत्री किसी अच्छी जगह पर नौकरी करे ।

इसी चलन के कारण  धीरे धीरे ऐसे कार्यों की हर जगह मांग बढ़ रही है जो कोई नहीं करना चाहता है जैसे कड़ियां काम, क्लर काम, इलेक्ट्रीशियन काम , या फिर ऐसे काम जिनकी जरूरत के हिसाब से डिमांड बढ़ती है। अमेरिका जैसे देशों में व्हाइट कॉलर जॉब की वजह से अन्य कामो के लिए अन्य देशों के लोगों को वर्क परमिट दिया जाता है और अच्छी खासी इनकम भी होती है।

पर हर कोई यही चाहता है कि उनके लिए एक बेहतरीन वातानुकूलित ऑफिस हो, कुर्ची हो ओर अच्छा खासा सोफे वाला ऑफिस हो जहां पर बैठ कर अपने आप को मन में लगे की में एक अच्छी खासी नौकरी कर रहा हूं या कर रही हूं।

वर्षो से हमारे यहां फिर दुनिया में अलग अलग कार्य क्षेत्र के लिए अलग अलग कोलर के नाम से कार्य की पहचान होती है।
सबसे पहले व्हाइट कॉलर जॉब हर किसी की चाहत होती है और आज भी उसका चलन ओर समाज में उसकी एक अलग पहचान है। व्हाइट कॉलर जॉब मतलब हमारे समाज में एक अधिकारी जैसा मान ओर सम्मान होता है जिसमें व्यक्ति के पास एक पद होता है जो समाज में समान पाने का जरिया होता है। व्हाइट कॉलर जॉब जितना दिखने में अच्छा उतना ही जिम्मेदारी और दबाव वाला जॉब होता है।

व्हाइट कॉलर के साथ साथ दुनिया में ओर भी जॉब होते है जैसे ब्लैक कॉलर जॉब मतलब ऑयल,रिफाईनरी या रबड़ उद्योग जैसे कार्य करने वालो के लिए ब्लैक कोलर जॉब माना गया है । उसी तरह रिटायरमेंट के बाद जॉब करने वाले जॉब को ग्रे कॉलर जॉब माना जाता है।

जो लोग गोदाम, वेयर हाउस, मैन्युफैक्चरर जैसे उद्योग में काम करने वालों जॉब को ब्लू कॉलर जॉब माना जाता है। जो लोग प्रकृति, पर्यावरण प्रेमी और उन से जुड़े जॉब करते है उनको ग्रीन कॉलर जॉब माना जाता है।

कोविड़ काल के बाद एक नया जॉब चलन में आया जो लोग घर पर बैठ कर काम करते है जिनके लिए ऑफिस की कोई ड्रेस नहीं होती है। वो घर पर बैठे बैठे काम करते है लिहाजा उनके पहनने के लिए कपड़े का कोई नियम नहीं होता लिहाजा इनके लिए नया नाम ओपन कॉलर वाला जॉब माना जाता है।

होटल,ऑफिस में रिचिपनिस्ट और पुस्तकालय जैसे जगह पर काम करने वालों को पिंक कॉलर जॉब माना जाता है।
इसके अलावा भी ऐसे जॉब जो दुनिया के अन्य देशों में कानूनन मान्य है पर हमारे देश में ना मान्य है ओर ना होने चाहिए ऐसे जॉब वालो को स्कारलेट जॉब करने वाला माना जाता है।
और भी देशों में और भी कॉलर जॉब होंगे। 

कार्य केसा भी हो हर काम बडा होता है बस उसको मन से किया जाए तो उसमें भी अच्छी खासी इनकम कर सकते है बदले की में दूसरों की चॉइस वाला काम करे।





गुरुवार, 19 जनवरी 2023

युवा क्यू अटल ब्रिज बहुत जाते है। अहमदाबाद।Atal bridge I River Front Ahmedabad

ये एक ऐसा ब्रिज है जहां पर छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा यू ट्यूब र और इंस्टग्रमाम पर रिल बनाने वाला जाना चाहेगा। 
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इस ब्रिज पर सुबह से शाम ओर विशेषकर संध्या काल में पर्यटकों और युवा वर्ग की भीड़ सी लगी रहती है। और शानदार फोटो ग्राफ के साथ साथ लोग रिल बनाते नजर आएंगे।

ब्रिज का उदघाटन देश के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने किया तब से लोगो के लिए अहमदाबाद में देखने के लिए ये अटल ब्रिज खास जगह बन गया है।

इसकी डिजाइन बहुत ही आकर्षक है दूर से देखने पर एक मशली आकर का दिखता है ओर साथ ही साथ इसमें पतंग उत्सव को भी ध्यान में रखते हुए इसके कलर में विभिन्न तरह की प्तंगो के कलर आप को देखने को मिल जाएगा।

ये अच्छे खासे धातु से बनाया गया है इस पर सिर्फ पैदल चलने के लिए है, मोटरसाइकिल या कार नहीं ले जा सकते हो। उसके लिए पार्किंग की व्यवस्था है।

अटल ब्रिज में आप चाय कॉफी का भी आनंद ले सकते है इसके लिए कैफे की सुविधा के साथ साथ नाश्ता की स्टाल भी मिल जाएगी।

अटल ब्रिज रिवर फ्रंट पर बना हुआ है जो दो किनारों को मिलता है। रिवर फ्रंट शाम ओर सुबह में घूमने की अच्छी जगह है। 

अटल ब्रिज के पास में फूलों का गार्डन ओर साथ ही साथ आप नौका विहार का भी आनंद ले सकते है। 

अटल ब्रिज से अहमदाबाद की खूबसूरती में चार चांद लग गए है। 

आप भी जब कभी अहमदाबाद जाए तो जरूर अटल ब्रिज घूम आए।  बस 30 रुपया टिकट देके।

बुधवार, 18 जनवरी 2023

जिंदगी एक सफ़र है। साथ चलता है अपनों का प्यार।

आज मातृत्व दिवस हैं और मेरी तरफ से मां के चरणों मे कोटी कोटी वन्दन,

 'सालवे ने जाजे दिकरा' ,जीव रा जतन करजै.
यह शब्द पढ कर आप को भी याद आ गया होगा की यह शब्द हर मां अपने लाडले को देशावर रोजगार पाने के लिए जब मा का लाडला घर से विदा लेता है तो मां अपने लाडले को कहती हैं,  
 हमे मारवाड़ से रोजगार पाने के लिए अपने राज्य से दुसरे राज्य मे जाना पड़ता है तब आवाजाही के लिए बस या ट्रेन का सहारा लिया जाता है और इस तरह की तस्वीर आप ने भी अपने जीवन मे बहूत बार देखी होगी और इस तरह का अनुभव लिया होगा. रोजगार के लिए जब पहली दफा आप घर से निकलते है तो कठिनाई की पहली परीक्षा यह बस या ट्रैन ही करवा देते हैं सिमित साधन की वजह से आप को इस ठुसमठुस वाली स्थिति मे बैठना पड़ता है और इस अनुभव को मेने भी महसुस किया है पर आपके जीवन की पहली कठिनाई को आप जैसे तैसे करके अपने सपनो के शहर मे उतर जाते हैं और फिर गांव की दुनिया से आप शहर की भीड़ भाड़ वाली, स्वार्थपन और दौलतमंन्द वाली जगह पर आ जाते हैं, आप के विचार और मन भी सपनो के शहर मे हिलोरे मारने लगते हैं फिर अाप उस जिन्दगी मे रम जाते हैं कही वर्षो अपने सेठ के साथ हंसी, खुशी, सुख दुःख और कष्ट सह कर आप अपने अनुभव को मजबूत करते हैं और फिर एक दिन आप अपना व्यवसाय शुरू कर देते हैं. आप के जीवन का स्वरुप बदलता है और उसके साथ साथ आप कही लोगो के जीवन को बदलते है. इस तरह की समस्या से उपर उठकर आज राजस्थानी भाई दुनिया के हर कोने मे अपने हुनर और कौशल का डंका बजाते है और पुरी दुनिया उन्हे नमन करती है. 
अन्त मे बस इतना ही कहना चाहता हूं की तस्वीर को शेयर करने से किसी के दिल को ठेस पहूचें तो माफी का हकदार हूं.. 
पर अब वक्त बदला है थोड़ा हमे अपने जीवन के बारे मे भी सतर्क रहना चाहिए बेवजह इस तरह की यात्रा ना करे... और मा के शब्द जीव रा जतन करजै को सही उपयोग करें... इस तरह के दृश्य साचौंर से मम्बुई वाली बसो मे आम हैं.. 

श्रवण चौहान

कैसी झूठी शान। समाज

कैसी झूठी शान... 

तेज और आधुनिकता से भरी जिन्दगी मे कौन किसका होता है, जो मिला जब मिला तब हाय हैलो बोल दिया और चल दिया. जनसंख्या बढी, प्रतिस्पर्धा बढी और रोजगार के संसाधन कम हुए. हम उस कौम से आते हैं जहां एक कमाने वाला और बाकी सब खर्च या खाने वाले मिलेगें ऐसी स्थिति मे आज के समय परिवार कैसे चले. हम झूठी शाने शौकत मे लाखों उड़ा देते हैं, लाखो मयखाने की दीवारों और नजराना मे फेंक देते हैं क्युकी यह थोपित झूठी शान हैं हमारी, हम लाखों का बन्धेज लंहगा बना लेगें क्युकी हमारा पेरवाश हैं.. उफ यह खर्चे और नकरे तो बढे समय पर नकद नही बढी. समय के बदलते मापदडों को हमने अपने विरूद्ध समझा ना हम उसके साथ चले ना हम उसके साथ चलना चाहते हैं हमें आज भी जो मांगने से मिल रही है उसे लड़कर लेने मे शान समझते हैं.. कैसे हम जिद्दी और खडुस हैं. 
समाज की शान और ताकत त्याग और तप हैं और वो होना चाहिए पर बदलते वक्त मे जिस रिवाज को छोड़ना है उसे क्यु गले की गांठ बनाकर चल रहे हैं. 

हर कोई लाखों नही कमाता,बड़ा मुश्किल से परिवार चलता है उस पर भी अगर भगवान नाराज हो जाये तो परिवार क्या खाने के लाले पड़ जाते हैं तब शरूआत होती हैं जिवन जीने की जंग. हम हाथ फैलाते हैं अपनो से, हम अरदास करते हैं चाहने वालों से पर जब भगवान ही रूठा तो कौन है इन्सानी ताकत जो हमारा सहारा बनेगा. 
ऐसी विकट स्थिति  मे महिला को बाहर निकलना पड़ता है जीवन और सन्तान को बचाने के लिए. समाज लांछन लगायेगा. समाज बाते करेगा. समाज क्या क्या नही करेगा वो आप भी जानते हैं और वो सब. 

अफसोस उसे तो जीना है. त्याग का रास्ता कब तक उसे रोकोगे.. क्युकी उसे उसके बच्चे की चित्कार उसे बैठने नही देगी. जब सब जगह से निराशा हाथ लगे तो वो रोजगार के लिए कार्य करेगी वो खराब तो नही होगा पर समाज के मापदंडो मे नीचा होगा. 

धत.. हम रोज संगठन और समाज की बात करते हैं, इतिहास, भुगोल और भविष्य की बात करते हैं.. धत ऐसे संगठनो के जो एक शब्द मे पुरे समाज की ताकत बोलते हैं पर उन्की हकीकत मे पहूंच चंद जिलों मे है.. क्या छोटे भाग पर महिला रोजगार के लिए काम नही हो सकता..ऐसे संगठन क्यु नही बनता जो रोजगार देने की बात करें.. लड़ने और मारने के सिवाय भी रास्ते हैं..

 आज मे दुःखित हूं अजमेर की घटना से ना में सिर्फ बल्कि आम राजपूत को ठेस पहूंची होगी पर क्या करें आखों मे पानी और रोष के सिवाय कल फिर भुल जायेगें... 
यह घटना चेतावनी जागो और आगे बढो.. उन लोगो का कोटी कोटी धन्यवाद जो उस बहिन तक मदद पहुंचाई है.. काश थोड़ा पहले हो जाता तो उन लोगों के तंज नही सुनना पड़ता उस  बहिन को.... उफ दुःखित, चिन्तित
 (किसी की भावनाओं आहत हो तो माफ करना ) 
श्रवण चौहान

भिड़ में खोया इंसान लौट आया है। human life

#भीड़ #मे #खोया #इंसान #लौट #आया #है 

जब से जन्म लिया और समझ आयी तब से यही सिखाया गया, पढाया गया, बोला गया, सुनाया गया, दिखाया गया की ये 21 वी सदी है आगे बढो, दौड़ते रहो, नही तो दुनिया मे पिछे रह जाहोगे. 

इस दौड़ मे हर कोई शामिल हो गया, देश दुनिया का आम इंसान इस रेस का राही बन गया, जो लोग गावों मे रहते थे वो भी आगे बढने की रेस मे शहरो की तरफ भागने लगे गांव खाली से हो गये थे.. 

दौड़ मे यही था की कैसे भी करके आगे बढो येन केन पैसा कमाए उसी पैसो के बल पर तुम्हारी सफलता नापी जायेगी. 

दौड़ इतनी अन्धी हो गयी थी की इसमे सच्चा इंसान इस भीड़ मे खो गया था, हर जगह सफलता के पैमाने सुनाये जाने लगे, आम इसांन ना चाहकर भी इस भीड़ का हिस्सा बन गया था कौन किधर जा रहा था तो कौन किधर आ रहा था, उसका कोई पता नही लग रहा था, हर कोई अपनो से पराया हो रहा था, हर कोई बड़े परिवार से छोटे परिवार मे विश्वास करने लगा था, हर कोई अपने को आगे रखना चाहता था, चाहे सामने वाला मरे या जीये वो अपनी जीत सुनिचित करना चाहता था. 

दौड़ मे परिवार बिछड़े, परिवार मे भाई बिछड़े, बहन,नाना नानी, मामा मामी,काका काकी, बान्धव, कुटुम्ब  सब का संबन्ध एक साकेंतिक मात्र रह गया था बस इंसान को तो सफल होना था. 

भीड़ इतनी थी की मानव जात की क्रद  नही थी ना सुनने वाले, ना दिखने वाले रोज किस्से रोज अखबार और टिवी सक्रिन की सुर्खिया थी, मानवता तार तार थी लोग किसी को बचाने नही अपने आप को आगे बढा रहे थे.. 

भीड़ भौतिक सुख सुविधा के लिए मरे जा रही थी मां बाप के रिस्ते और व्यवहार को भुला रही थी रोज कान खड़े करने वाली खबरे पढी जा रही थी लोग पैसो के लिए क्या क्या नही कर रहे थे.. 

भीड़ ने मान लिया था की अब अगर पिछे रहे तो इस भीड़ मे कुसले जायेगें बस दौड़ो दौड़ो, भागो भागो, 

हर कोई बिजी था, किसी के पास दो वक्त के लिए समय नही था ना परिवार के लिए और ना ही आस पड़ोस मित्र सगे रिस्तेदारो के लिए, बस पैसा ही सब कुछ था... 

कॉर्पोरेट हाउस तो ऐसे जिदां ताबुत थे की बस तुमको तो यह करना पड़ेगा नही तो यह हो जायेगा, तुम पिछे रह जाहोगे, वो हो जायेगा. इसांन को इतना डरा दिया था की इंसान इस भीड़ का सजीव होते हुए निर्जिव प्राणी बन गया था. 

निर्जीव प्राणी बन दर दर की ठोकरे खाने को मजबुर था ना जिने की चाह थी और ना मरने का भय उसे तो उस भीड़ मे काबिल बनना था.. 

लोग कहते थे दुनिया तेज हो गयी अब चंद मिन्ट के लिए नही रूकेगें, दुनिया इतनी विकसित हो गयी है की इंसान को जिदां कर देती है दुनिया एक मिन्ट मे सामने वाले को खत्म कर देती हैं, एक मिन्ट मे सामने वाला कहां छुपा है पता कर देती है, दुनिया आकाश से पाताल और पाताल से गगन तक जा पहूंची हैं की पुछो मत अगर तुम नही दौड़े तो क्या होगा कैसे जिदां रहोगे... 

इस झूठी कल्पना और अधीं दौड़ को एक मामुली वायरस ने रोक दिया विश्व के सब देश खौफजादा है जो शक्तिशाली होने का दंभ भरते थे जो अणु परमाणु रोबोट की बात करते थे वो भगवान के भरोसे बैठे हैं, देश के हर जगह भय व्याप्त है कोई उस से बच नही पा रहा है, कोई इस छोटे से वायरस से सिना तान कर सामने नही आ रहा हैं. 

जो बड़े बड़े शहर पैर रखने की जगह नही थी वो विरान से पड़े हैं लोग घरो की तरफ भाग रहे हैं इस से बचने के लिए महाशक्तियो से नही सिर्फ भगवान के भरोसे है वो चिकित्सा भी लाचार है जो भगवान मे विश्वास कम करती थी वो विकसित का दभं भरती थी. 

हवाई बंद, ट्रेन बंद, बस बंद, गाड़ी बंद, मोल बंद, पब बंद, बड़े बड़े होटले बदं, दुकाने बदं, कारखाने बदं, आलीशान बगलेॉ बदं, बड़ी बड़ी गाड़ीया बदं, शानो शौकत के रास्ते बदं, अमीर का दभं भरने वाले बदं कमरो मे बदं, हर तरफ बदं.

वो भीड़ धिरे धिरे कम हो गयी वो काबिल होने की दौड़ खत्म हो गयी. 

उसी भीड़ मे खोया सच्चा व्यवहार, अपनापन और सरलता का राही इंसान फिर घर की और लौट आया है, वो सुकुन की सांस लेकर बोल रहा है यह सब अधीं दौड़ मिथ्या थी ना संसकृतिं का मान था ना इसांन का.. 

आज भीड़ से लौटा इसांन परिवार के साथ हर पल बिता रहा है, पुराने समय को याद कल रहा है और भुले भगवान को याद कर रहा है और भगवान से अरदास करते हुए कहता है हम तो भोले प्राणी है तुही शक्तिमान तुही सर्वदाता है अब तुमको ही हमे बचाना है... 

भीड़ से लौटा इसांन एकबार फिर आकाश को निहार रहा है और नींद के आगोश मे सो गया... ना टी टी की आवाज, ना प्रदूषण... 

भगवान से इंसान यही कह रहा है अबकी बार बचा ले फिर कभी इसांनियत को मरने नही दुगां...... 

भगवान सबको कुशल मंगल रखे, हम भारतीय जितेगें और दुनिया को रास्ता दिखायेगें की तेज रफ्तार से ज्यादा इसांनियत है...... 

भीड़ मे खौया इसांन लौट आया है.. 

श्रवण चौहान

समस्या को बोझ ना बनने दे। motivational

#समस्या #को #बोझ #ना #बनने #दे। 


एक प्रोफेसर कक्षा में दाखिल हुए। उनके हाथ में पानी से भरा एक गिलास था। 

उन्होंने उसे बच्चों को दिखाते हुए पूछा, “यह क्या है?” छात्रों ने उत्तर दिया, “गिलास।” प्रोफेसर ने दोबारा पूछा, “इसका वजन कितना होगा ?” उत्तर मिला, “लगभग 100-150 ग्राम।” उन्होंने फिर पूछा, “अगर मैं इसे थोड़ी देर ऐसे ही पकड़े रहूं तो क्या होगा ?” छात्रों ने जवाब दिया, “कुछ नहीं।” “अगर मैं इसे एक घण्टे पकड़े रहूं तो ?” प्रोफेसर ने दोबारा प्रश्न किया। छात्रों ने उत्तर दिया, “आपके हाथ में दर्द होने लगेगा।” 
उन्होंने फिर प्रश्न किया, “अगर मैं इसे सारा दिन पकड़े रहूं तो क्या होगा” ? तब छात्रों ने कहा, “आपकी नसों में तनाव हो जाएगा। नसें संवेदनशून्य हो सकती हैं। जिससे आपको लकवा हो सकता है।” प्रोफेसर ने कहा, “बिल्कुल ठीक। अब यह बताओ क्या इस दौरान इस गिलास के वजन में कोई फर्क आएगा ?” जवाब था कि नहीं। तब प्रोफेसर बोले, “यही नियम हमारे जीवन पर भी लागू होता है। यदि हम किसी समस्या को थोड़े समय के लिए अपने दिमाग में रखते हैं। तो कोई फर्क नहीं पड़ता। 

लेकिन अगर हम देर तक उसके बारे में सोचेंगे तो वह हमारे दैनिक जीवन पर असर डालने लगेगी। हमारा काम और पारिवारिक जीवन भी प्रभावित होने लगेगा। इसलिए सुखी जीवन के लिए आवश्यक है कि समस्याओं का बोझ अपने सिर पर हमेशा नहीं लादे रखना चाहिए। समस्याएं सोचने से नहीं हल होतीं। सोने से पहले सारे समस्यायुक्त विचारों को बाहर रख देना चाहिए। इससे आपको अच्छी नींद आएगी और आप सुबह तरोताजा रहेंगें।

शिक्षा:-

समस्याओं को लेकर अधिक परेशान नहीं होना चाहिए। इससे हमारा नुकसान ही होता है 

#प्रेरक #प्रसंग #motivational #happylife #lifestyle #sunday #sundayvibes #sundaymotivation #sundaybest #sundaythoughts #sundayquotes #todaythought #goodthoughts #inspiration #inspirational #morningvibes #sundaymood☀️

चाहत नहीं इरादे होने चाहिए..Motivational

चाहत नहीं इरादे होने चाहिए.. #YSR
#Yogendra #SINGH #Rathore 

आज मुझे एक हम उम्र, युवा शख्स से मिलने का मौका मिला जिसने कम समय मे बहूत कुछ अपने नाम कर लिया और यही क्रम अनवरत चल रहा है और चलता रहेगा ऐसी मनोकामना करता हु.
में बात कर रहा हूँ अजमेर के समीप एक साधारण राजपुत  परिवार मे जन्मे  #Yogendra #SINGH #Rathore जो आज एक बेहतरीन renowned #NATIONAL LEVEL #Mind and #Memory #trainer, #inspirational and #motivational #public #speaker, life coach and a rising #entrepreneur as well.  He is the #author of the book -'#Awaken the great potential of Memory and #Will-power'. उन्के बारे मे जीतना लिखे उतना कम पड़ेगा उन्होने 2010 में Nirma University से B.Tech किया RPET मे 42 वा रेंक मिला, कही नेशनल और इन्टरनेशल पुरस्कारों से नवाजे जा चुके हैं, उन्होने अपनी बात मे बताया की वो एक साधारण परिवार से आते हैं और परिवार मे सभी और आस पास के सब नौकरीयात मतलब सर्विस क्लास मे विश्वास करने वाले लोग थे,  मेने भी इन्जीनियरिंग की और मुझे अच्छी नौकरी मिल गयी  पर मेरे मन मेे कुछ लिक से हटकर कुछ ऐसा करना चाहता था जिसमे मुझे पैसा और प्रसिद्धी दोनो मिले, मेने लाईफ चेंजर, मोटीवेशन स्पीकर बनने की ठानी पर जब यह बात घर वालो को बताई तो पुरा परिवार, रिशतेदार मुझे अलग अलग ढंग से समझाने लगे, जिन्दगी का नफा नुकसान बताने लगे और ऐसा ना करने के लिए कही उदाहरण तक दीये गये पर मेरे मन मे बस जो सोचा वो करने का ठान रखा था अन्त मे मेने यही रास्ता चुना, शरूआत मे बड़ी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा, कही दफा फाईनेन्सियली और कही दफा प्रोफेशनली पर उन्होने कभी हार नही मानी और लड़ते रहे और आगे बढते गये.आज बताते हुए खुशी है की वो नेशनल लेवल की सेलीब्रिटिज बन गये हैं और कम्पनी के ब्रांड ऐम्बेडर भी है और तो और आज उनकी कम्पनी 10 करोड़ नेट वर्थ की कम्पनी बन गयी हैं. भारत मे सबसे ज्यादा योगी के रूप में  instagram पर follow करने वाला कारनामा आप के नाम हैं. 
बोलने की कला जबरदस्त हैं उन्की बातो मे अध्यात्मिकता का भी कन्सेपट झलकता है. घोड़े जैसा जोश है पुरा सेशन जोशिला और लाईफ कोन्सप्ट के साथ रहता है.

ऐसे युवा से मिलकर अच्छा लगा और भविष्य मे तरक्की करे ऐसी उम्मीद करते हैं, और उन्के बतायी बात की चाहत नही इरादे होने चाहिए उसे जीवन मे उतारने की कोशिश करेगें. बहूत खुब धन्यवाद 
#YSR #AHMEDABAD #MOTIVATIONAL #SESSION

प्रवासी आफत नही अवसर..! कोरोणा काल

#प्रवासी #आफत #नही #अवसर... Covid time

हम सब के जीवन काल मे ऐसा पहली बार ही हुआ है की अपने घरो से आजीविका कमाने निकले हमारे अपने लोग घर वापस आने के लिए जी तोड़ मेहनत और येन केन रूप से एकबार घर पहूंचना चाहते हैं. 


सरकार की परीक्षा 

राजस्थान की स्थापना के बाद शायद ही ऐसी कोई सरकार रही होगी जिन्हे इस रूप मे ऐसी वस्तु स्थितियों का सामना करना पड़ रहा होगा, राजस्थान मे करीब हर जिले, गांव कस्बो से लोग रोजगार के लिए देश विदेश जाते हैं और वही रहकर अपने घरो और राज्य को पैसे भेज कर मजबूत करते हैं. वो एक तरफ से सरकारो के लिए कतई बोझ नही बने और जब जब सरकार ने इन प्रवासियों को आर्थिक सहयोग के लिए याद किया है तो दिल खोलकर अपने गांव, जिले और राज्य की तरक्की के लिए सहयोग किया है. 

जालोर-सिरोही एक नजर में.. 

राज्सथान के यह दोनो जिले ऐसे है जिन्में से पशास प्रतिशत या उससे अधिक मात्रा मे लोग प्रवासी हैं. इन दोनो जिलो की सम्मानता भी है और वो यह की दोनो एक लोकसभा के भाग है और जिसका नतिजा यह है की वर्षो से यह लोकसभा एक पिछड़ा हुआ लोकसभा माना जाता है, सासंद बुटा सिंह से लेकर वर्तमान सासंद जी तक इस लोकसभा के विकास के नाम पर जय माताजी ही मिली है इन जिले को आज भी पिछड़े हुए जिले की श्रेणी मे रखा जाता है उसके पिछे बेसिक सुविधा का ना होना और यह नही होने का कारण हमारी लीडरशिप की योग्यता मे कमी मानना उचित होगा. 

जैसा की अब प्रवासी करीब करीब जिलो मे लौट चुके हैं और जिले पर दबाव बढता रहा है उसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं, 
कल तक ग्रीन जोन मे गिने जाने वाला जिला अब ओरेन्ज के बाद रेड जोन की तरफ बढने लगा है और इधर हम अपने लोकसभा जिलो के चिकित्सा सुविधा का आकलन करे तो सुविधा 'मोणा मे मुठी' बराबर है मतलब की शुन्य है, ना बड़े अस्पताल है ना बड़े डॉक्टर है ना बड़ी जगह जहां पर बेड की व्यवस्था हो सके, कोरोना मे वेटंिलेटर की आवश्यकता मानी जाती है तो लोकसभा मे कुल मिलाकर 20 मशीन नही होगी, लोकसभा मे वर्तमान सासंद जी जो तीसरा अपना कार्यकाल मे है अब तक कितने बड़े अस्पताल लोकसभा मे लाये यह तो उन्के लोग ही बता सकते हैं. 

जालोर सिरोही मे अधिक मात्रा मे लौटे प्रवासी बन्धु जो दो तरह के है उन्मे एक सेठ है और दुसरे श्रमिक बन्धु. इस विपरीत हालातो मे सेठ बन्धु को अपना घर बार चला लेगें पर जो श्रमिक बन्धु है उन्का क्या वो महिने का कमाई घर भेजते थे आज वो भी बन्द है अब इस समस्या का सामना यहा की वतृमान राज्य सरकार को करना पड़ेगा इन बन्धुओ के रोजी रोटी की व्यवस्था करने का जिम्मा अब राज्य सरकार पर है शायद यह पहली बार राज्य सरकार पर बोझ बन रहे वर्ना हमेशा स्वाभिमानी से कमा कर पैसा राज्य मे भेजा है पर अब हालात विपरीत हैं कोरोना की वजह से सब कुछ छोड़ जीव बचाने के घर को लौटे हैं. 

समस्या मे समाधान... 

जालोर सिरोही समेत राज्य के अधिंकाश जिले मे प्रवासी बन्धु लौटे हैं और कोरोना के डर के साथ साथ बेरोजगारी का डर भी अब लगने लगा है. 
अगर यह लोकडाउन की समय सीमा बढती हैं तो बेरोजगारी का आंकड़ा भी अचानक बढ जायेगा, क्युकी एक बेरोजगारी की संख्या वो है जो यहा स्थाई है और दुसरा प्रवासी बन्धुओ का मिलन इस संख्या मे इजाफा कर सकता है. 
सरकार इस समस्या से निपटना चाहे तो बेहतर ढगं से प्लानिंग करे तो जो प्रवासी बन्धु बाहरी राज्य मे रहकर व्यापार कौशल, मेहनत, लगन से कमाई करते हैं उसी को इस राज्य मे परखा जाये मतलब की सरकार ऐसे अवसर पैदा करे की प्रवासी बन्धु अपने जिले, राज्य मे ही रहकर रोजगार पाये और पैदा करे जो बाहरी राज्य मे निवेश है उन्हे अपने इधर मोड़े. 
सरकार को इसके लिए व्यापक स्तर पर कार्य योजना की जरूरत पड़ेगी ना की मनरेगा जैसे कार्य चला कर.

 सरकारी इच्छा शक्ति दिखा कर जो कही वर्षो से हमारे राज्य मे औधोगिक ऐरिये है जैसे 'रिको जोन' ऐसे जगह मे नयी जान डालनी पड़ेगी लाईट, पानी और बेसिक सुविधा का विस्तार करना पड़ेगा, टैक्स मे छुट और यातायात की सुविधा करनी पड़ेगी, ईजी बिजनेस का मोडल तैयार करना पड़ेगा को इतनी बड़ी संख्या मे यह मेन पावर का सही इस्तेमाल हो सकता है.

 जैसा की कहा गया है की बड़ी महामारी या घटना के बाद पुरे विश्व मे बहूत कुछ बदल जाता है तो हो सकता है हमारा राज्य इस आफत को अवसर समझ कर कार्य करे तो राजस्थान एक नये युग मे प्रवेश करेगा. 

आफत नही अवसर.. 

कोरोना काल मे सब कुछ रूका सा पड़ा है हर कोई इस कठिन समय के गुजर जाने की प्रतीक्षा मे बैठा है की सब कुछ सही रहते हुए यह काल अपने उपर से बिना किसी को निगले निकल जाये जिससे की परिवार बचा रहे. 

जैसे ही सब बुरा वक्त गुजरे तो हम सब जालोर-सिरोही वासियो के लिए कुछ वक्त बैठ कर सोचने की वक्त है.

 हमारे जिले करीब सतर साल बाद भी पिछड़े हुए क्यु?  हमारे लोकसभा मे आज भी बड़ा कोई अस्पताल क्यु नही? हमारा जिला बिजनेस लोगो के लिए जाना जाता है तो यह सुविधा लोकल स्तर पर क्यु नही ?  हमारे जिले के लोग जब नेता प्रवास पर जाते हैं तो फुल मालाओं से लाद देते हैं पर बुरे वक्त मे सब सब कहा छुप गये?? क्या इन नेताओ को सामूहिक प्रयास नही करने चाहिए थे..?  क्या अब भी हम चुनाव वक्त जातियों मे बंट जायेगें...? क्या एक आम युवा प्रवासियों के लिए आवाज उठाता रहा हो यह  काम इन चुने हुए नेता का नही था...?  हजारो रूपये खर्च कर क्यु आना पड़ा???  पास के लिए दर दर क्यु भागना पड़ा??? 

इन सब सवालों के मन मे दबा रखिये और वक्त आने पर जवाब जरूर मांगना.... 

हमारी लीडरशिप इस समस्या को आफत ना समझकर अवसर माने और इस दिशा मे अभी से पहल करे तो बहूत कुछ बदल सकता है. 

आप सभी प्रवासी बन्धुओ और हम सब मिलकर सरकारी आदेश का पालन करे और कोरोना से बचे... 

जय जलन्धरनाथ जी जय सारणेश्वर जी
#जालोर-#सिरोही

मंगलवार, 17 जनवरी 2023

जय उमिया माताजी। ऊंझा गुजरात। umiya mataji unjha ।

कहते हैं.. कडवा पाटीदार समाज की कुलदेवी मां उमिया को  भगवान शिव ने स्वंय उुजां गुजरात मे विराजमान किया था,  विक्रम संवत 212 में वहां के राजा व्रजपालसिंह ने मदिर का निर्माण करवाया और फिर राजा अवनिपत ने बड़ा सा हवन करवाया था जिसमे करीब सवा लाख नारियल और घी का उपयोग किया गया था.

उसके बाद विक्रम संवत 1122-24 में वेगडा गामी ने वापिस निर्माण करवाया क्युकी उसे अलाउध्दिन खिलजी के सेनापति उूलग खाना ने तोड़ दिया था. 1943 मे पाटीदार समाज ने मंदिर का सम्पूर्ण निर्माण करवाया और उसमे हर पाटीदार घर से हिस्सा लिया गया और उसमे आगेवान श्री रामचन्द्र मनसुख लाल,गायकवाड़ गर्वमेन्ट और पाटड़ी दरबार थे. 1952 से यह ट्रस्ट से संचालित होता हैं, जेठ सुद 2 को यहा उत्सव आयोजित होता है जिसे `हेल खेलना ना हलोतरा' 'भटवारी' नाम से जाने जाते हैं, मा उमिया की अशिम कृपा पाटीदार समाज पर बनी हुई हैं और आज वे धन धान्य से सम्पूर्ण जीवन जीते है, वैसे उूंजा आज कृषि उत्पादो का पुरे देश का केन्द्र माना जाता है और पुरे देश भर से यहा व्यापरी खरीद बेच के लिए आते हैं यहा पर जीरा, सौंफ, राई, तिल जैसे उत्पादो का जोर रहता है. जी हा उूजा मंडी मे आप को गुजरात और राजस्थान के लोग ज्यादा मिलेगें वहा पर अधिकतर दुकाने पाटीदार समाज के लोगो की है और उन्के साथ मे राजस्थान के बाड़मेर, गुड़ामालानी, चोहटन, साचौंर के लोग भी मिल जायेंगे. मा उमिया सब पर अपनी  कृपा बनाये रखे और किसान और व्यापारीयो के चेहरे पर चमक बरकरार रखे. 

#जय #उमिया #माताजी. #Unjha #Umiya #mataji

मूंगफली की फसल और फायदे।

मूंगफली की फसल और फायदे।  मूँगफली peanut, या groundnut, वानस्पतिक नाम : Arachis hypogaea. https://youtube.com/shorts/PCXDt5vbxd0...