शनिवार, 12 अगस्त 2023

सांचौर के युवा, मौजीज और प्रबुद्ध लोग आगे आए। सांचौर जिला।

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#सांचौर के युवा, मौजीज और प्रबुद्ध लोग आगे आए। 

गलत का विरोध करे और सकारात्मक विचारों का सम्मान करे। 

निसंदेह सांचौर में जो हुआ वो आने वाले भविष्य को लेकर गहरी चिंता का विषय है। में सांचौर के युवा, वरिष्ठ और प्रबुद्ध जन से निवेदन करता हूं कि हमारा सांचौर इतना कभी बुरा नहीं था जितना कुछ अब बदला है। सच्चाई को स्वीकार कर हर समाज के वरिष्ठ, मोजीज लोग राजनीतिक से दूर होकर गलत कार्यों का विरोध करे और अपनी पीढ़ी और युवाओं को गलत रास्तों पर जाने से बचाए। 
दो दशक पहले सांचौर और आज के सांचौर को देखे तो जमीन आसमान का फर्क नजर आता है। उस दौर का सांचौर का व्यक्ति सच्चा संचोरी नजर आता था। अपने मेहनत और विपरीत हालातो में जीने की उन्हें आदत थी ओर वो आने वाली पीढ़ियों को भी यही सीख देते थे कि ये धरती कच्चे कमजोर की नहीं है यहां हर चीज के लिए मेहनत करनी पड़ेगी और सांचौर की जनता ने मेहनत के बल देश प्रदेश में नाम किया ओर सांचौर में भी आर्थिक विकास हुआ। क्युकी सांचौर में ना तो कोई भोगोलिक व्यवस्था लोगो के आजीविका के लिए उपयुक्त थी और ना मानवीय विकास उद्योग जिस से की वो कमा कर अपना जीवन चला पाए। 

पिछले दशक में इतना बदलाव हो गया कि अब देसावारी कमाई से जायदा असामाजिक रूप से कमाई ने लोगो को आकर्षित किया ओर इसमें युवा इस क़दर आकर्षित हुआ की एक बड़ी संख्या में हर जाती, समाज में ऐसे युवाओं की होड़ लग गई। एक काली गाड़ी, सफेद कपड़े ओर रोब जमाने वाले गोगल्स। शादी, सामाजिक कार्यक्रम में प्रतिस्पर्धा में अंधाधुंध फिजूल खर्ची का दौर चला। सांचौर में पहले सिर्फ खेती की कमाई ही जरिया था और 70 प्रतिशत वो भी बारिश पर खेती निर्भर थी क्युकी कुछ भाग में ही मीठा पानी था। इसके बाद लोग सांचौर से बाहर निकल कर स्वाभिमान से संघर्ष कर डेसावरी में मेहनत कर अपने आप को योग्य बनाया ओर समाज में भी योगदान दिया पर सांचौर में नेहर आने के बाद व्यवस्था बदल गई और लोगो के जीवन में सुखद पहल आने लगे पर उसके साथ साथ लोगो में आपसी वैमनस्य बढ़ने लगा, एक दूसरे को पैसों के बल नीचा दिखाने की होड़ लगी ओर इसके नतीजन नकारात्मक घटनाओं में वृद्धि हुई। सांचौर शहर में अब तीन तरह की आर्थिक व्यवस्था का बोलबाला है। खेती की इनकम, डेसवारी इनकम और एक अन्य इनकम जिसे आप सब जानते है। पिछले पांच वर्षो में सांचौर न्यूज हेडलाइन बन गया है और कुछ ना कुछ वजह रही है । इस से युवा शक्ति गलत तरीकों के प्रति रुझान बढ़ा है और इसको हम सब मिलकर रोकना चाहिए।

सांचौर में अंधी कमाई को समाज ने भी सम्मान दिया और हर समाज का व्यक्ति इन कमाई के आगे नतमस्तक सा खड़ा है। फिर हर असामाजिक गतिविधि को गर्व माना जाने लगा ओर सामाजिक बदलाव भी उसी का भाग था।

आज सांचौर में भाईचारा, मान सम्मान और अपनास की जगह जातीय रोबदारी, ठसक और वर्च्चव ने ले ली है। 

मेरी बात को आगे बढ़ाते हुए खिव सिंह जी लिखते है कि....

युवाओं की ऊर्जा उचित, उपयुक्त, सकारात्मक और सही दिशा में प्रवृत्त होंनी चाहिए। अनुचित एवं गलत प्रवृतियों का महिमामंडन नही होना चाहिए। मेहनत और संघर्ष से हासिल उपलब्धियों का ही सम्मान व बखान किया जाए। गलत तरीके से वर्चस्व स्थापित करने की होड़, अनुचित एवं अवैध तरीकों से अकूत धन संपत्ति कमाने की कुत्चित प्रवृति एवं आपतिजनक गतिविधियों को सामाजिक स्तर पर हिकारत भरे नजरिए से देखा जाकर हतोत्साहित किया जाना चाहिए। बहरहाल सामाजिक सद्भाव, आपसी भाईचारा, सर्वजातीय सम्मान, स्वस्थ व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा का स्थापन एवं आदर्श जीवन मूल्यों के साथ सामाजिक मर्यादाओं का पालन करते हुए सकारात्मक ऊर्जा एवं सोच के साथ विकास की सही दिशा में अग्रचर हुआ जाए तो निश्चित रूप से सत्यपुर का गौरव बढ़ेगा और पुराना वैभव लोटेगा। नया जिला बनना सार्थक होगा। और इसकी ख्याति बढ़ेगी! #सांचौर #में_संचौरी #sanchore

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