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शनिवार, 12 अगस्त 2023

अनुशासन सफलता की कुंजी है।

अनुशासन सफलता की कुंजी है।
आप जो ये तस्वीर देख रहे है ये तस्वीर उन दो महान खेल के खिलाड़ियों की है जिनका अपना एक दौर था । जी हां में बात कर रहा हूं हमारे भारत के सबसे ज्यादा पसंद करने वाले खेल क्रिकेट की और उस खेल के दो महान खिलाड़ी के जीवन के उस भाग की की व्यक्ति को अपने मजबूत समय में किस तरह अनुशासन बनाए रखना होता है।

ये वो दौर था जब मुंबई के स्कूल की एक दोस्त जोड़ी ने घेरुलू क्रिकेट में धमाल करते हुए भारतीय क्रिकेट टीम में प्रवेश लिया था और इस जोड़ी की खूब चर्चा शुरू से रही ।
भारतीय क्रिकेट टीम में खब्बू लेफ्ट बैट्समैन के रूप में विनोद कांबली इस कदर क्रिकेट में खेलने लगे थे कि उन्हें एक समय में क्रिकेट की रन मशीन कहा जाने लगा था और वो देश ओर दुनिया के सब क्रिकेट पिच पर एक साल में एक हजार बना चुके थे और उनका नाम देश ओर दुनिया में होने लगा था उनकी फेन फॉलोइंग भी बढ़ने लगी थी ओर चर्चा के साथ प्रसिद्धि ओर फिर शोक मौज भी बढ़ कर बोलने लगे थे वो धीरे धीरे खेल को भूल अन्य चीजों में चर्चा में आने लगे उनके जीवन ओर खेल में अनुशासन कम होने लगा ओर एक दौर ऐसा आया कि इस महान खिलाड़ी का आखिरी ब डा मेंच आप सब को याद होगा 1996 का क्रिकेट वर्ल्ड कप और जब ये खिलाड़ी आंखो में आंसू लिए मैदान से बाहर आ रहे थे और धीरे धीरे ये खिलाड़ी गुमनामी में कई खो गया और फिर क्रिकेट में वापसी ना कर पाए।

वहीं दूसरी तस्वीर में कांबली के दोस्त सचिन तेंदुलकर की है जो कि दुनिया में क्रिकेट खेल के भगवान कहे जाने लगे । सरुआत दोनों ने साथ की थी और टीम में भी साथ आए थे और जब कांबली का बल्ला बोल रहा था तब इनका बल्ला खामोश था पर जीवन ओर खेल में अनुशासन बनाए रखा और धीरे धीरे दुनिया के हर खेल प्रेमी के जुबान पर आज सचिन का नाम है। आज उनके लाखो खेल प्रेमी है उन्होंने जीवन में खूब ऊंचाइयां छू ई पर कभी अनुशासनहीनता का समाचार हम किसी ने नहीं पढ़ा और ना ही सुना। बस आज हजारों रन बना कर एक दोस्त दुनिया का बादशाह है तो एक दोस्त नेपथ्य में जी रहा है। 

दोस्तो जीवन में अनुशासन जरूरी है आप भले ही शिखर पर हो पर अनुशासन बनाए रखे अपने जीवन ओर कार्य के प्रति तो कभी असफलता हाथ नहीं लगेगी। 

दोनो खिलाड़ी महान है बस अनुशासन ने एक को महान और एक को कम कर दिया। 

क्रिकेट। क्रिकेट_खेल

बुधवार, 18 जनवरी 2023

कैसी झूठी शान। समाज

कैसी झूठी शान... 

तेज और आधुनिकता से भरी जिन्दगी मे कौन किसका होता है, जो मिला जब मिला तब हाय हैलो बोल दिया और चल दिया. जनसंख्या बढी, प्रतिस्पर्धा बढी और रोजगार के संसाधन कम हुए. हम उस कौम से आते हैं जहां एक कमाने वाला और बाकी सब खर्च या खाने वाले मिलेगें ऐसी स्थिति मे आज के समय परिवार कैसे चले. हम झूठी शाने शौकत मे लाखों उड़ा देते हैं, लाखो मयखाने की दीवारों और नजराना मे फेंक देते हैं क्युकी यह थोपित झूठी शान हैं हमारी, हम लाखों का बन्धेज लंहगा बना लेगें क्युकी हमारा पेरवाश हैं.. उफ यह खर्चे और नकरे तो बढे समय पर नकद नही बढी. समय के बदलते मापदडों को हमने अपने विरूद्ध समझा ना हम उसके साथ चले ना हम उसके साथ चलना चाहते हैं हमें आज भी जो मांगने से मिल रही है उसे लड़कर लेने मे शान समझते हैं.. कैसे हम जिद्दी और खडुस हैं. 
समाज की शान और ताकत त्याग और तप हैं और वो होना चाहिए पर बदलते वक्त मे जिस रिवाज को छोड़ना है उसे क्यु गले की गांठ बनाकर चल रहे हैं. 

हर कोई लाखों नही कमाता,बड़ा मुश्किल से परिवार चलता है उस पर भी अगर भगवान नाराज हो जाये तो परिवार क्या खाने के लाले पड़ जाते हैं तब शरूआत होती हैं जिवन जीने की जंग. हम हाथ फैलाते हैं अपनो से, हम अरदास करते हैं चाहने वालों से पर जब भगवान ही रूठा तो कौन है इन्सानी ताकत जो हमारा सहारा बनेगा. 
ऐसी विकट स्थिति  मे महिला को बाहर निकलना पड़ता है जीवन और सन्तान को बचाने के लिए. समाज लांछन लगायेगा. समाज बाते करेगा. समाज क्या क्या नही करेगा वो आप भी जानते हैं और वो सब. 

अफसोस उसे तो जीना है. त्याग का रास्ता कब तक उसे रोकोगे.. क्युकी उसे उसके बच्चे की चित्कार उसे बैठने नही देगी. जब सब जगह से निराशा हाथ लगे तो वो रोजगार के लिए कार्य करेगी वो खराब तो नही होगा पर समाज के मापदंडो मे नीचा होगा. 

धत.. हम रोज संगठन और समाज की बात करते हैं, इतिहास, भुगोल और भविष्य की बात करते हैं.. धत ऐसे संगठनो के जो एक शब्द मे पुरे समाज की ताकत बोलते हैं पर उन्की हकीकत मे पहूंच चंद जिलों मे है.. क्या छोटे भाग पर महिला रोजगार के लिए काम नही हो सकता..ऐसे संगठन क्यु नही बनता जो रोजगार देने की बात करें.. लड़ने और मारने के सिवाय भी रास्ते हैं..

 आज मे दुःखित हूं अजमेर की घटना से ना में सिर्फ बल्कि आम राजपूत को ठेस पहूंची होगी पर क्या करें आखों मे पानी और रोष के सिवाय कल फिर भुल जायेगें... 
यह घटना चेतावनी जागो और आगे बढो.. उन लोगो का कोटी कोटी धन्यवाद जो उस बहिन तक मदद पहुंचाई है.. काश थोड़ा पहले हो जाता तो उन लोगों के तंज नही सुनना पड़ता उस  बहिन को.... उफ दुःखित, चिन्तित
 (किसी की भावनाओं आहत हो तो माफ करना ) 
श्रवण चौहान

भिड़ में खोया इंसान लौट आया है। human life

#भीड़ #मे #खोया #इंसान #लौट #आया #है 

जब से जन्म लिया और समझ आयी तब से यही सिखाया गया, पढाया गया, बोला गया, सुनाया गया, दिखाया गया की ये 21 वी सदी है आगे बढो, दौड़ते रहो, नही तो दुनिया मे पिछे रह जाहोगे. 

इस दौड़ मे हर कोई शामिल हो गया, देश दुनिया का आम इंसान इस रेस का राही बन गया, जो लोग गावों मे रहते थे वो भी आगे बढने की रेस मे शहरो की तरफ भागने लगे गांव खाली से हो गये थे.. 

दौड़ मे यही था की कैसे भी करके आगे बढो येन केन पैसा कमाए उसी पैसो के बल पर तुम्हारी सफलता नापी जायेगी. 

दौड़ इतनी अन्धी हो गयी थी की इसमे सच्चा इंसान इस भीड़ मे खो गया था, हर जगह सफलता के पैमाने सुनाये जाने लगे, आम इसांन ना चाहकर भी इस भीड़ का हिस्सा बन गया था कौन किधर जा रहा था तो कौन किधर आ रहा था, उसका कोई पता नही लग रहा था, हर कोई अपनो से पराया हो रहा था, हर कोई बड़े परिवार से छोटे परिवार मे विश्वास करने लगा था, हर कोई अपने को आगे रखना चाहता था, चाहे सामने वाला मरे या जीये वो अपनी जीत सुनिचित करना चाहता था. 

दौड़ मे परिवार बिछड़े, परिवार मे भाई बिछड़े, बहन,नाना नानी, मामा मामी,काका काकी, बान्धव, कुटुम्ब  सब का संबन्ध एक साकेंतिक मात्र रह गया था बस इंसान को तो सफल होना था. 

भीड़ इतनी थी की मानव जात की क्रद  नही थी ना सुनने वाले, ना दिखने वाले रोज किस्से रोज अखबार और टिवी सक्रिन की सुर्खिया थी, मानवता तार तार थी लोग किसी को बचाने नही अपने आप को आगे बढा रहे थे.. 

भीड़ भौतिक सुख सुविधा के लिए मरे जा रही थी मां बाप के रिस्ते और व्यवहार को भुला रही थी रोज कान खड़े करने वाली खबरे पढी जा रही थी लोग पैसो के लिए क्या क्या नही कर रहे थे.. 

भीड़ ने मान लिया था की अब अगर पिछे रहे तो इस भीड़ मे कुसले जायेगें बस दौड़ो दौड़ो, भागो भागो, 

हर कोई बिजी था, किसी के पास दो वक्त के लिए समय नही था ना परिवार के लिए और ना ही आस पड़ोस मित्र सगे रिस्तेदारो के लिए, बस पैसा ही सब कुछ था... 

कॉर्पोरेट हाउस तो ऐसे जिदां ताबुत थे की बस तुमको तो यह करना पड़ेगा नही तो यह हो जायेगा, तुम पिछे रह जाहोगे, वो हो जायेगा. इसांन को इतना डरा दिया था की इंसान इस भीड़ का सजीव होते हुए निर्जिव प्राणी बन गया था. 

निर्जीव प्राणी बन दर दर की ठोकरे खाने को मजबुर था ना जिने की चाह थी और ना मरने का भय उसे तो उस भीड़ मे काबिल बनना था.. 

लोग कहते थे दुनिया तेज हो गयी अब चंद मिन्ट के लिए नही रूकेगें, दुनिया इतनी विकसित हो गयी है की इंसान को जिदां कर देती है दुनिया एक मिन्ट मे सामने वाले को खत्म कर देती हैं, एक मिन्ट मे सामने वाला कहां छुपा है पता कर देती है, दुनिया आकाश से पाताल और पाताल से गगन तक जा पहूंची हैं की पुछो मत अगर तुम नही दौड़े तो क्या होगा कैसे जिदां रहोगे... 

इस झूठी कल्पना और अधीं दौड़ को एक मामुली वायरस ने रोक दिया विश्व के सब देश खौफजादा है जो शक्तिशाली होने का दंभ भरते थे जो अणु परमाणु रोबोट की बात करते थे वो भगवान के भरोसे बैठे हैं, देश के हर जगह भय व्याप्त है कोई उस से बच नही पा रहा है, कोई इस छोटे से वायरस से सिना तान कर सामने नही आ रहा हैं. 

जो बड़े बड़े शहर पैर रखने की जगह नही थी वो विरान से पड़े हैं लोग घरो की तरफ भाग रहे हैं इस से बचने के लिए महाशक्तियो से नही सिर्फ भगवान के भरोसे है वो चिकित्सा भी लाचार है जो भगवान मे विश्वास कम करती थी वो विकसित का दभं भरती थी. 

हवाई बंद, ट्रेन बंद, बस बंद, गाड़ी बंद, मोल बंद, पब बंद, बड़े बड़े होटले बदं, दुकाने बदं, कारखाने बदं, आलीशान बगलेॉ बदं, बड़ी बड़ी गाड़ीया बदं, शानो शौकत के रास्ते बदं, अमीर का दभं भरने वाले बदं कमरो मे बदं, हर तरफ बदं.

वो भीड़ धिरे धिरे कम हो गयी वो काबिल होने की दौड़ खत्म हो गयी. 

उसी भीड़ मे खोया सच्चा व्यवहार, अपनापन और सरलता का राही इंसान फिर घर की और लौट आया है, वो सुकुन की सांस लेकर बोल रहा है यह सब अधीं दौड़ मिथ्या थी ना संसकृतिं का मान था ना इसांन का.. 

आज भीड़ से लौटा इसांन परिवार के साथ हर पल बिता रहा है, पुराने समय को याद कल रहा है और भुले भगवान को याद कर रहा है और भगवान से अरदास करते हुए कहता है हम तो भोले प्राणी है तुही शक्तिमान तुही सर्वदाता है अब तुमको ही हमे बचाना है... 

भीड़ से लौटा इसांन एकबार फिर आकाश को निहार रहा है और नींद के आगोश मे सो गया... ना टी टी की आवाज, ना प्रदूषण... 

भगवान से इंसान यही कह रहा है अबकी बार बचा ले फिर कभी इसांनियत को मरने नही दुगां...... 

भगवान सबको कुशल मंगल रखे, हम भारतीय जितेगें और दुनिया को रास्ता दिखायेगें की तेज रफ्तार से ज्यादा इसांनियत है...... 

भीड़ मे खौया इसांन लौट आया है.. 

श्रवण चौहान

चाहत नहीं इरादे होने चाहिए..Motivational

चाहत नहीं इरादे होने चाहिए.. #YSR
#Yogendra #SINGH #Rathore 

आज मुझे एक हम उम्र, युवा शख्स से मिलने का मौका मिला जिसने कम समय मे बहूत कुछ अपने नाम कर लिया और यही क्रम अनवरत चल रहा है और चलता रहेगा ऐसी मनोकामना करता हु.
में बात कर रहा हूँ अजमेर के समीप एक साधारण राजपुत  परिवार मे जन्मे  #Yogendra #SINGH #Rathore जो आज एक बेहतरीन renowned #NATIONAL LEVEL #Mind and #Memory #trainer, #inspirational and #motivational #public #speaker, life coach and a rising #entrepreneur as well.  He is the #author of the book -'#Awaken the great potential of Memory and #Will-power'. उन्के बारे मे जीतना लिखे उतना कम पड़ेगा उन्होने 2010 में Nirma University से B.Tech किया RPET मे 42 वा रेंक मिला, कही नेशनल और इन्टरनेशल पुरस्कारों से नवाजे जा चुके हैं, उन्होने अपनी बात मे बताया की वो एक साधारण परिवार से आते हैं और परिवार मे सभी और आस पास के सब नौकरीयात मतलब सर्विस क्लास मे विश्वास करने वाले लोग थे,  मेने भी इन्जीनियरिंग की और मुझे अच्छी नौकरी मिल गयी  पर मेरे मन मेे कुछ लिक से हटकर कुछ ऐसा करना चाहता था जिसमे मुझे पैसा और प्रसिद्धी दोनो मिले, मेने लाईफ चेंजर, मोटीवेशन स्पीकर बनने की ठानी पर जब यह बात घर वालो को बताई तो पुरा परिवार, रिशतेदार मुझे अलग अलग ढंग से समझाने लगे, जिन्दगी का नफा नुकसान बताने लगे और ऐसा ना करने के लिए कही उदाहरण तक दीये गये पर मेरे मन मे बस जो सोचा वो करने का ठान रखा था अन्त मे मेने यही रास्ता चुना, शरूआत मे बड़ी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा, कही दफा फाईनेन्सियली और कही दफा प्रोफेशनली पर उन्होने कभी हार नही मानी और लड़ते रहे और आगे बढते गये.आज बताते हुए खुशी है की वो नेशनल लेवल की सेलीब्रिटिज बन गये हैं और कम्पनी के ब्रांड ऐम्बेडर भी है और तो और आज उनकी कम्पनी 10 करोड़ नेट वर्थ की कम्पनी बन गयी हैं. भारत मे सबसे ज्यादा योगी के रूप में  instagram पर follow करने वाला कारनामा आप के नाम हैं. 
बोलने की कला जबरदस्त हैं उन्की बातो मे अध्यात्मिकता का भी कन्सेपट झलकता है. घोड़े जैसा जोश है पुरा सेशन जोशिला और लाईफ कोन्सप्ट के साथ रहता है.

ऐसे युवा से मिलकर अच्छा लगा और भविष्य मे तरक्की करे ऐसी उम्मीद करते हैं, और उन्के बतायी बात की चाहत नही इरादे होने चाहिए उसे जीवन मे उतारने की कोशिश करेगें. बहूत खुब धन्यवाद 
#YSR #AHMEDABAD #MOTIVATIONAL #SESSION

प्रवासी आफत नही अवसर..! कोरोणा काल

#प्रवासी #आफत #नही #अवसर... Covid time

हम सब के जीवन काल मे ऐसा पहली बार ही हुआ है की अपने घरो से आजीविका कमाने निकले हमारे अपने लोग घर वापस आने के लिए जी तोड़ मेहनत और येन केन रूप से एकबार घर पहूंचना चाहते हैं. 


सरकार की परीक्षा 

राजस्थान की स्थापना के बाद शायद ही ऐसी कोई सरकार रही होगी जिन्हे इस रूप मे ऐसी वस्तु स्थितियों का सामना करना पड़ रहा होगा, राजस्थान मे करीब हर जिले, गांव कस्बो से लोग रोजगार के लिए देश विदेश जाते हैं और वही रहकर अपने घरो और राज्य को पैसे भेज कर मजबूत करते हैं. वो एक तरफ से सरकारो के लिए कतई बोझ नही बने और जब जब सरकार ने इन प्रवासियों को आर्थिक सहयोग के लिए याद किया है तो दिल खोलकर अपने गांव, जिले और राज्य की तरक्की के लिए सहयोग किया है. 

जालोर-सिरोही एक नजर में.. 

राज्सथान के यह दोनो जिले ऐसे है जिन्में से पशास प्रतिशत या उससे अधिक मात्रा मे लोग प्रवासी हैं. इन दोनो जिलो की सम्मानता भी है और वो यह की दोनो एक लोकसभा के भाग है और जिसका नतिजा यह है की वर्षो से यह लोकसभा एक पिछड़ा हुआ लोकसभा माना जाता है, सासंद बुटा सिंह से लेकर वर्तमान सासंद जी तक इस लोकसभा के विकास के नाम पर जय माताजी ही मिली है इन जिले को आज भी पिछड़े हुए जिले की श्रेणी मे रखा जाता है उसके पिछे बेसिक सुविधा का ना होना और यह नही होने का कारण हमारी लीडरशिप की योग्यता मे कमी मानना उचित होगा. 

जैसा की अब प्रवासी करीब करीब जिलो मे लौट चुके हैं और जिले पर दबाव बढता रहा है उसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं, 
कल तक ग्रीन जोन मे गिने जाने वाला जिला अब ओरेन्ज के बाद रेड जोन की तरफ बढने लगा है और इधर हम अपने लोकसभा जिलो के चिकित्सा सुविधा का आकलन करे तो सुविधा 'मोणा मे मुठी' बराबर है मतलब की शुन्य है, ना बड़े अस्पताल है ना बड़े डॉक्टर है ना बड़ी जगह जहां पर बेड की व्यवस्था हो सके, कोरोना मे वेटंिलेटर की आवश्यकता मानी जाती है तो लोकसभा मे कुल मिलाकर 20 मशीन नही होगी, लोकसभा मे वर्तमान सासंद जी जो तीसरा अपना कार्यकाल मे है अब तक कितने बड़े अस्पताल लोकसभा मे लाये यह तो उन्के लोग ही बता सकते हैं. 

जालोर सिरोही मे अधिक मात्रा मे लौटे प्रवासी बन्धु जो दो तरह के है उन्मे एक सेठ है और दुसरे श्रमिक बन्धु. इस विपरीत हालातो मे सेठ बन्धु को अपना घर बार चला लेगें पर जो श्रमिक बन्धु है उन्का क्या वो महिने का कमाई घर भेजते थे आज वो भी बन्द है अब इस समस्या का सामना यहा की वतृमान राज्य सरकार को करना पड़ेगा इन बन्धुओ के रोजी रोटी की व्यवस्था करने का जिम्मा अब राज्य सरकार पर है शायद यह पहली बार राज्य सरकार पर बोझ बन रहे वर्ना हमेशा स्वाभिमानी से कमा कर पैसा राज्य मे भेजा है पर अब हालात विपरीत हैं कोरोना की वजह से सब कुछ छोड़ जीव बचाने के घर को लौटे हैं. 

समस्या मे समाधान... 

जालोर सिरोही समेत राज्य के अधिंकाश जिले मे प्रवासी बन्धु लौटे हैं और कोरोना के डर के साथ साथ बेरोजगारी का डर भी अब लगने लगा है. 
अगर यह लोकडाउन की समय सीमा बढती हैं तो बेरोजगारी का आंकड़ा भी अचानक बढ जायेगा, क्युकी एक बेरोजगारी की संख्या वो है जो यहा स्थाई है और दुसरा प्रवासी बन्धुओ का मिलन इस संख्या मे इजाफा कर सकता है. 
सरकार इस समस्या से निपटना चाहे तो बेहतर ढगं से प्लानिंग करे तो जो प्रवासी बन्धु बाहरी राज्य मे रहकर व्यापार कौशल, मेहनत, लगन से कमाई करते हैं उसी को इस राज्य मे परखा जाये मतलब की सरकार ऐसे अवसर पैदा करे की प्रवासी बन्धु अपने जिले, राज्य मे ही रहकर रोजगार पाये और पैदा करे जो बाहरी राज्य मे निवेश है उन्हे अपने इधर मोड़े. 
सरकार को इसके लिए व्यापक स्तर पर कार्य योजना की जरूरत पड़ेगी ना की मनरेगा जैसे कार्य चला कर.

 सरकारी इच्छा शक्ति दिखा कर जो कही वर्षो से हमारे राज्य मे औधोगिक ऐरिये है जैसे 'रिको जोन' ऐसे जगह मे नयी जान डालनी पड़ेगी लाईट, पानी और बेसिक सुविधा का विस्तार करना पड़ेगा, टैक्स मे छुट और यातायात की सुविधा करनी पड़ेगी, ईजी बिजनेस का मोडल तैयार करना पड़ेगा को इतनी बड़ी संख्या मे यह मेन पावर का सही इस्तेमाल हो सकता है.

 जैसा की कहा गया है की बड़ी महामारी या घटना के बाद पुरे विश्व मे बहूत कुछ बदल जाता है तो हो सकता है हमारा राज्य इस आफत को अवसर समझ कर कार्य करे तो राजस्थान एक नये युग मे प्रवेश करेगा. 

आफत नही अवसर.. 

कोरोना काल मे सब कुछ रूका सा पड़ा है हर कोई इस कठिन समय के गुजर जाने की प्रतीक्षा मे बैठा है की सब कुछ सही रहते हुए यह काल अपने उपर से बिना किसी को निगले निकल जाये जिससे की परिवार बचा रहे. 

जैसे ही सब बुरा वक्त गुजरे तो हम सब जालोर-सिरोही वासियो के लिए कुछ वक्त बैठ कर सोचने की वक्त है.

 हमारे जिले करीब सतर साल बाद भी पिछड़े हुए क्यु?  हमारे लोकसभा मे आज भी बड़ा कोई अस्पताल क्यु नही? हमारा जिला बिजनेस लोगो के लिए जाना जाता है तो यह सुविधा लोकल स्तर पर क्यु नही ?  हमारे जिले के लोग जब नेता प्रवास पर जाते हैं तो फुल मालाओं से लाद देते हैं पर बुरे वक्त मे सब सब कहा छुप गये?? क्या इन नेताओ को सामूहिक प्रयास नही करने चाहिए थे..?  क्या अब भी हम चुनाव वक्त जातियों मे बंट जायेगें...? क्या एक आम युवा प्रवासियों के लिए आवाज उठाता रहा हो यह  काम इन चुने हुए नेता का नही था...?  हजारो रूपये खर्च कर क्यु आना पड़ा???  पास के लिए दर दर क्यु भागना पड़ा??? 

इन सब सवालों के मन मे दबा रखिये और वक्त आने पर जवाब जरूर मांगना.... 

हमारी लीडरशिप इस समस्या को आफत ना समझकर अवसर माने और इस दिशा मे अभी से पहल करे तो बहूत कुछ बदल सकता है. 

आप सभी प्रवासी बन्धुओ और हम सब मिलकर सरकारी आदेश का पालन करे और कोरोना से बचे... 

जय जलन्धरनाथ जी जय सारणेश्वर जी
#जालोर-#सिरोही

मूंगफली की फसल और फायदे।

मूंगफली की फसल और फायदे।  मूँगफली peanut, या groundnut, वानस्पतिक नाम : Arachis hypogaea. https://youtube.com/shorts/PCXDt5vbxd0...