कहते हैं.. कडवा पाटीदार समाज की कुलदेवी मां उमिया को भगवान शिव ने स्वंय उुजां गुजरात मे विराजमान किया था, विक्रम संवत 212 में वहां के राजा व्रजपालसिंह ने मदिर का निर्माण करवाया और फिर राजा अवनिपत ने बड़ा सा हवन करवाया था जिसमे करीब सवा लाख नारियल और घी का उपयोग किया गया था.
उसके बाद विक्रम संवत 1122-24 में वेगडा गामी ने वापिस निर्माण करवाया क्युकी उसे अलाउध्दिन खिलजी के सेनापति उूलग खाना ने तोड़ दिया था. 1943 मे पाटीदार समाज ने मंदिर का सम्पूर्ण निर्माण करवाया और उसमे हर पाटीदार घर से हिस्सा लिया गया और उसमे आगेवान श्री रामचन्द्र मनसुख लाल,गायकवाड़ गर्वमेन्ट और पाटड़ी दरबार थे. 1952 से यह ट्रस्ट से संचालित होता हैं, जेठ सुद 2 को यहा उत्सव आयोजित होता है जिसे `हेल खेलना ना हलोतरा' 'भटवारी' नाम से जाने जाते हैं, मा उमिया की अशिम कृपा पाटीदार समाज पर बनी हुई हैं और आज वे धन धान्य से सम्पूर्ण जीवन जीते है, वैसे उूंजा आज कृषि उत्पादो का पुरे देश का केन्द्र माना जाता है और पुरे देश भर से यहा व्यापरी खरीद बेच के लिए आते हैं यहा पर जीरा, सौंफ, राई, तिल जैसे उत्पादो का जोर रहता है. जी हा उूजा मंडी मे आप को गुजरात और राजस्थान के लोग ज्यादा मिलेगें वहा पर अधिकतर दुकाने पाटीदार समाज के लोगो की है और उन्के साथ मे राजस्थान के बाड़मेर, गुड़ामालानी, चोहटन, साचौंर के लोग भी मिल जायेंगे. मा उमिया सब पर अपनी कृपा बनाये रखे और किसान और व्यापारीयो के चेहरे पर चमक बरकरार रखे.
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