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गुरुवार, 31 अगस्त 2023

भाई मैच तो कांटे का होगा।भारत पाकिस्तान। India vs Pakistan

भाई मैच तो कांटे का होगा।भारत पाकिस्तान।

जैसा की क्रिकेट भारत के लिए एक बड़ा खेल और अब बाजार बन चुका है तो अब इस खेल में खेल के साथ साथ आक्रमकता, पैसा और गलेमर्स भी खूब जमकर देखा जा सकता है । 

जी हां दोस्तो जैसा की मेरा पसिंदा खेल भी क्रिकेट ही रहा है और वेसा ही कुछ आप के साथ भी होगा। अब में बात कर रहा हूं दो दिन पूर्व एशिया क्रिकेट कप की और उसमे होने वाले भारत पाकिस्तान मैच की।

एशिया कप करीब 1984 में प्रारम्भ हुआ था ओर इसमें 6 देश भाग लेते है जैसा कि इस कप का बुखार ही कुछ अलग किस्म का होता है क्युकी इसमें दो प्रमुख प्रतिद्वंदी भारत और पाकिस्तान आमने सामने खेलते है ओर कही बार भिडंत भी इस कप में हो चुकी है।

अब तक इस एशिया कप में 7 बार भारत और 6 बार श्री लंका कप जीत चुकी है वहीं पाकिस्तान 2011 के बाद करीब 12 साल से कप जितने के इंतजार में है ओर अबकी बार वो अभी  वर्ल्ड की प्रमुख टीम बनकर खेल रही है।

भारत पाकिस्तान के मैच पर सबकी निगाह होगी और एक तरफ विराट कोहली, रोहित शर्मा है तो दूसरी तरफ बाबर आजम ओर रिजवान जैसे प्लयेर है । एक तरफ बुमराह है तो दूसरी तरफ रउफ है। 
इन सब से इतर एक तरफ भारत किकेट टीम को पसंद करने वाले प्रशसंक है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के टीम के प्रशंसक। भाई मैच तो पूरा गजब का होगा। 

एशिया कप 2010 में दो ऐसे यादगार पल जो अभी भी लोगो को याद होगा।

#गंभीर ओर #कामरान के बीच तीखी बहस।


दरअसल 2010 में पाकिस्तान ने खेलते हुए भारत को 268 का लक्ष्य दिया था ओर भारत ने उसे 7 विकेट पर 271 का लक्ष्य 49.5 ओवर में पा कर जीत गया था और उसमें गंभीर मेन ऑफ मैच रहे थे 83 बोल में 97 ठोके थे और तब ब्रेक में पाकिस्तान के विकेटकीपर कामरान अकमल के साथ गंभीर की गजब गर्मागर्म बहस हुई थी।

#हरभजन ओर #शोएब अख्तर।

इसी मैच में हरभजन ने शोएब अख्तर के 47 ओवर में उनकी गेंद पर जबरदस्त छक्का मार दिया तो दोनों के बीस बहस होने लगी ओर फिर हरभजन ने मोहमद अमीर कि गेंद पर विजय छक्का लगाया और फिर हरभजन अख्तर की तरफ देखने लगे।......

वाकई में जबरदस्त मैच था। अब शनिवार को इंतजार रहेगा। खेल भावना से खेल होगा।

#क्रिकेट #एशिया_कप #भारत #पाकिस्तान #cricket #indiavspakistan #india #AsiaCup2023 #viratkohli #rohitsharma #jadeja

गुरुवार, 19 जनवरी 2023

युवा क्यू अटल ब्रिज बहुत जाते है। अहमदाबाद।Atal bridge I River Front Ahmedabad

ये एक ऐसा ब्रिज है जहां पर छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा यू ट्यूब र और इंस्टग्रमाम पर रिल बनाने वाला जाना चाहेगा। 
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इस ब्रिज पर सुबह से शाम ओर विशेषकर संध्या काल में पर्यटकों और युवा वर्ग की भीड़ सी लगी रहती है। और शानदार फोटो ग्राफ के साथ साथ लोग रिल बनाते नजर आएंगे।

ब्रिज का उदघाटन देश के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने किया तब से लोगो के लिए अहमदाबाद में देखने के लिए ये अटल ब्रिज खास जगह बन गया है।

इसकी डिजाइन बहुत ही आकर्षक है दूर से देखने पर एक मशली आकर का दिखता है ओर साथ ही साथ इसमें पतंग उत्सव को भी ध्यान में रखते हुए इसके कलर में विभिन्न तरह की प्तंगो के कलर आप को देखने को मिल जाएगा।

ये अच्छे खासे धातु से बनाया गया है इस पर सिर्फ पैदल चलने के लिए है, मोटरसाइकिल या कार नहीं ले जा सकते हो। उसके लिए पार्किंग की व्यवस्था है।

अटल ब्रिज में आप चाय कॉफी का भी आनंद ले सकते है इसके लिए कैफे की सुविधा के साथ साथ नाश्ता की स्टाल भी मिल जाएगी।

अटल ब्रिज रिवर फ्रंट पर बना हुआ है जो दो किनारों को मिलता है। रिवर फ्रंट शाम ओर सुबह में घूमने की अच्छी जगह है। 

अटल ब्रिज के पास में फूलों का गार्डन ओर साथ ही साथ आप नौका विहार का भी आनंद ले सकते है। 

अटल ब्रिज से अहमदाबाद की खूबसूरती में चार चांद लग गए है। 

आप भी जब कभी अहमदाबाद जाए तो जरूर अटल ब्रिज घूम आए।  बस 30 रुपया टिकट देके।

सोमवार, 16 जनवरी 2023

जब धर्म की हानी हुई तब तब क्षत्रिय ने जीवन बलिदान दिया है। #जय #सोमनाथ ।#हमीर #जी #गोहिल।

#जब #धर्म #की #हानी #हुई #तब #तब #क्षत्रिय #ने #जीवन #बलिदान #दिया #है। #जय #सोमनाथ ।#हमीर #जी #गोहिल।


सौराष्ट्र जिसे सोरठ और काठियावाड़ भी कहते हैं, खंभात और कच्छ की खाई के बीच की भूमि, जहाँ कई वीर क्षत्रियों ने जन्म लिया, कई संतो ने अपने ज्ञान से इस भूमि को पवित्र किया, जहाँ के चारण आज भी बहुत गर्व से सोरठ भूमि की गाथा कहते हैं.

सोरठ भूमि का गोहिलवाड, अमरेली जिले के लाठी में भीमजी गोहिल के यहाँ हमीर जी गोहिल का जन्म हुआ . बचपन से ही बहादुर हमीर जी, एक बार खाना खा रहे थे तब इन्हें इनकी भाभी द्वारा ये पता चला की विदेशी आक्रमण कारी सोमनाथ मंदिर लूटने आ रहे हैं. इनकी भाभी ने ताना मारते हुए कहा, आज सोरठ की भूमि पे कोई भी ऐसा क्षत्रिये खून नही बचा, जो विदेशी आक्रमणकारियों  का सामना करके उनसे सोमनाथ मंदिर की रक्षा कर सके. हमीर गोहिल का क्षत्रिय खून खौल उठा, उनसे ये ताना वर्दास्त नही हुआ, और खाने से उठकर, उन्होंने प्रतिज्ञा ली की जीते जी सोमनाथ किसी विदेशी को लूटने नही दूँगा. भाभी को अपनी गलती का अहसास हुआ, उन्होंने उसे रोकने की कोशिश भी की पर वो नही रुके, और अपने साथ दुसरे २०० वीर लोगों को लेकर सोमनाथ की तरफ चल पड़े.

रास्ते में एक जगह विश्राम करते समय इनके कान में मरशिया (वीरों के मरने पर गाये जाने वाले गीत) गीत सुनाई दिया, हमीरजी ने देखा एक बूढी माँ गीत गा रही हैं, उन्होंने पास जाकर पूछा आप किसका मर शिया गा रही हो बा, बूढी माँ बोली अपने बेटे का, अभी १५ दिन पहले ही उसका स्वर्गवास हुआ है. हमीर जी ने कहा बा आप अपने पुत्र का मरशिया गा रहे हो उसी तरह मेरा मरशिया गाओगे, मुझे मरने से पहले अपना मरशिया सुनना है.

बा बोली बेटा, ये क्या कह रहे हो ? एक जवान जिन्दा मर्द का  मरशिया गाकर मुझे पाप का भागीदार नही बनना. हमीर जी ने कहा , मैं घर से प्रतिज्ञा लेकर निकला हूँ की जीते जी सोमनाथ विदेशियों को लूटने नही दूंगा, वहां सुल्तान ज़फर की फ़ौज है और यहाँ हम सिर्फ २०० लोग, मरना तो निश्चित है, तो आप बिना किसी संकोच के मरशिया गाओ बा. बा ने कहा सोमनाथ की रक्षा के लिए निकले हो, मैं वहीँ जा रही हूँ, तुझ से पहले पहुचुंगी वहां जाकर देखूंगी की तू किस वीरता से लड़ता है, उस तरह से ही तेरे मरशिया गाऊँगी, और बा सोमनाथ के लिए निकल गयीं.

आगे गिर के जंगल से गुज़रते  समय हमीर जी गोहिल का सामना जंगल में रहने वाले भीलों से हुआ, भीलों को जब ये मालूम हुआ कि ये नौजवान दल सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए इस ओर आया है, तो उन्होंने उनका बड़ा स्वागत किया. भील सरदार वेगडा जी भी अपने ३०० भील बंधुयों के साथ इस दल में शामिल हो गए और उन्होंने भी सोमनाथ की रक्षा की कसम ली. भील सरदार वेगडा जी की बेटी से हमीर जी का विवाह हुआ, और उस दिन वहां बहुत खुशी मनाई गयी.

अगले दिन सब अपने हथियारों सहित सोमनाथ मंदिर, प्रभास तीर्थ की और बढ़ चले. वहां पहुंचकर प्रभास का बाहरी क्षेत्र वेगडा जी ने संभाला और मंदिर का क्षेत्र हमीर जी ने अपने हाथों में लिया.

ज़फर खान की सेना जब प्रभास पहुंची तो उनका सामना पहले वेगडा जी भील से हुआ, वेगडा जी भील और उनके भील सिपाहियों ने जमकर टक्कर ली और तीर कमान से तोपों का सामना किया, पर जफ़र खान ने तोपों के गोले उन पर बरसाना चालू रखा, अंत में सभी भील सिपाही सोमनाथ की रक्षा करते हुए शहीद हुए.

ज़फर खान की सेना भीलों से सामना होने के बाद आगे बढ़ी, यहाँ हमीर जी गोहिल से सामना हुआ, जफ़र खान की सेना बराबर तोपों से गोले बरसाती रही फिर भी हमीर जी गोहिल ने ९ दिनों तक डटकर सामना किया. अंत में हमीर जी ने केशरिया करने का निर्णय किया, और सबको युद्ध रचना समझा दी, सब वीरों ने केशरिया साफा सर पे बांधा और किले के दरवाजे खोल कर सब मैदान में आ गए. सब ने वीरों की तरह मैदान में रण कौशल दिखाया, और जब तक लड़ सकने की एक भी उम्मीद उनके आखरी खून की बूंद में रही वे लड़े, अंत में सिर्फ हमीर जी बचे. ज़फर खान ने अपनी सेना को हमीर जी को चारों और से घेरने का हुक्म दिया, सारी सेना अब हमीर जी को घेर कर उनपर वार करने लगी, और लड़ते लड़ते उस वीर ने भी वहीँ, सोमनाथ की शरण में प्राण त्याग दिए.

उसके बाद ज़फर खान सोमनाथ मंदिर को लूटकर, फिर से उसे ध्वस्त करके अपनी राजधानी लौट गया.

જનની જણતો ભગત જણજે, કા આવા શુરવીર અને કા દાતાર, નહિતર રહેજે વાંજણી, મત ગુમાવીશ તારૂ નુર.

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डूब रहा था भारतीय जंगी बेड़ा फिर भी नहीं छोड़ी शिप, बेखौफ सिगरेट के कश लगाते रहे कैप्टन ।कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला और आईएनएस खुकरी।

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जिम्मेदारी जीवन से बड़ी होती है और उससे बड़ा देश, यही भावना उस वक्त भारत के महान सपूत, भारतीय नौसेना के अधिकारी और आईएनएस खुकरी के कप्तान महेंद्र नाथ मुल्ला की रही होगी जब उन्होंने जान बचाने का मौका छोड़कर डूबते हुए अपने जहाज के साथ समंदर में जल समाधि ले ली थी

कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला और आईएनएस खुकरी। 

जिम्मेदारी जीवन से बड़ी होती है और उससे बड़ा देश, यही भावना उस वक्त भारत के महान सपूत, भारतीय नौसेना के अधिकारी और आईएनएस खुकरी के कप्तान महेंद्र नाथ मुल्ला की रही होगी जब उन्होंने जान बचाने का मौका छोड़कर डूबते हुए अपने जहाज के साथ समंदर में जल समाधि ले ली थी। उनका वह फैसला आज भी शोध का विषय बना हुआ है और यह मान लिया जाता है कि कप्तान ने नौसेना परंपरा को निभाते हुए ऐसा कदम उठाया। 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच जंग छिड़ी थी। जंग में भारत पाकिस्तान पर भारी था। भारतीय नौसेना के दो जंगी जहाज आईएनएस खुकरी और आईएनएस कृपाण को पाकिस्तानी पनडुब्बी हैंगर को नेस्तनाबूत करने की जिम्मेदारी दी गई थी। दोनों जंगी जहाजों के कमांडिंग कप्तान महेंद्र नाथ मुल्ला थे। अरब सागर में दीव के करीब भारतीय युद्धपोत हैंगर को निशाना बनाने के लिए बढ़ रहे थे। खुकरी और कृपाण दोनों ही ब्रिटिश कालीन जहाज थे जिनके मुकाबले पाकिस्तान की फ्रेंच पनडुब्बी हैंगर आधुनिक थी।

9 दिसंबर 1971 को हैंगर ने कृपाण पर टारपीडो फायर किया लेकिन वह निशाने न लगकर कृपाण के हल पर लगा जिससे वह डूबा तो नहीं लेकिन समंदर में वहीं ठहर गया। हैंगर ने खुकरी को निशाना बनाया और भारतीय युद्धपोत के ईंधन टैंक पर दो टारपीडो से धमाका कर दिया। देखते ही देखते मौत का मंजर नजर आने लगा। तेल फैलने पर समंदर में भी आग लगी थी, जहाज में तेजी पानी भर रहा था। कप्तान मुल्ला को पता था कि जहाज डूब जाएगा, उन्होंने जहाज को खाली करने का आदेश दिया और अपनी लाइफ जैकेट भी एक जूनियर को थमा दी। उस त्रासदी में बचने वाले लोगों में से एक रिटायर्ड कमांडर एसएन सिंह ने टीओआई को उस भयानक मंजर की दास्तान सुनाई। सिंह ने बताया कि रात के 8:45 बज रहे थे, आकाशवाणी समाचार के प्रसारण के ठीक बाद पीएनएस हैंगर के दो टारपीडो ने जहाज पर हमला किया। मुल्ला को अहसास हुआ कि जहाज को नहीं बचाया जा सकता है तो उन्होंने उसे खाली करने का आदेश दिय


उस प्राण हरने वाली रात में 6 अधिकारी और 61 नौसैनिक ही जान बचा पाए थे। 18 अधिकारियों और 178 जवानों ने जल समाधि ली थी जिनमें कैप्टन मुल्ला भी थे। उस भयानक मंजर से निकलने वालों के लिए सबसे मार्मिक पल वह था जब उन्होंने देखा कि जहाज के पुल पर एक कुर्सी पर 45 वर्षीय कैप्टन मुल्ला बैठे थे, जहाज डूब रहा था और वह सिगरेट के कश मार रहे थे। नौसेना की परंपरा को सर्वश्रेष्ठ रूप से गले लगाते हुए मुल्ला ने खुद को बचाना मुनासिब नहीं समझा। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से ताल्लुक रखने वाले कैप्टन मुल्ला को मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था और उनकी वीरता की कहानी हमेशा के लिए इतिहास में दर्ज हो गई जो कयामत तक नौसैनिकों में जिम्मेदारी की प्रेरणा भरती रहेगी। #Jay #Hind #INS #Khukri #Diu #travelphotography #indianphoto #indianarmy #salute #diu #diutour

मूंगफली की फसल और फायदे।

मूंगफली की फसल और फायदे।  मूँगफली peanut, या groundnut, वानस्पतिक नाम : Arachis hypogaea. https://youtube.com/shorts/PCXDt5vbxd0...