#मुठ्ठी #भर #बाजरे #के #लिए #में #हिंदुस्तान #की #सलतनत #खो #बैठता
ये वाक्य उस वक़्त दिल्ली के बादशाह शेरशाह सुरी के मुंह से निकले थे जब वो भीषण युद्ध से हार कर निकला था,
जी हां ये बाजरा जिसने हमारी कहीं पीढ़ियों को संभाल कर रखा दैनिक जीवन उपयोगी भोजन में काम आने वाला बाजरा दरअसल भारत और अफ्रीका में पाया जाता है इसकी उत्पति करीब 2000 ईसा पूर्व की बताए गई है.
बाजरा एक ऐसी फसल है जिसके लिए ज्यादा अच्छी भूमि ओर पानी की जरूरत नहीं होती है इसके लिए मानसून का समय उपयोगी होता है और वैसे इसे पानी देकर भी पकाया जा सकता है.
बाजरा कम पानी ओर उच्च तापमान में ओर कम समय में,कम खर्चे में फसल पक जाती है,ये राजस्थान में सबसे ज्यादा ओर विशेषकर जालोर,बाड़मेर,जैसलमेर ओर थोड़ी थोड़ी राजस्थान के हर भाग ओर गुजरात में होती है
ये फसल ही हमारे जीवन जीने का आधार था उसका उपयोग खाने और जरूरी काम के लिए उसको बेच कर जो पैसा आता था उस से काम चलता था.
बाजरा का खाने के साथ साथ पशु चारा ओर बीयर बनाने के काम आता है इसमें फाइबर ओर एनर्जी विटामिन होते है जो बहुत काम आते है ये महिलाओ में खून की कमी को पूरा करता है ओर भी इसके बहुत फायदे है.
आजकल हमारा क्षेत्र नेहरी होने के कारण बाजरा की बुवाई कम होने लगी है ओर लोगो के भोजन में बाजरे की जगह गेंहू ने ले ली है वर्ना एक वक़्त था ' फाफरे तो मेहमान आते तब बनते थे ' ,
नवी पिडी भी आजकल बाजरे का भोजन कम करने लगा है अक्सर पाचन शक्ति का बहाना बनाते है पर ये पाचन शक्ति बढ़ाने में मददगार है.
हमेशा बाजरी के साथ साथ घी, गावरफली की सब्जी,प्याज,दही, गुड़ हो तो आप जमकर इसका लुफ्त उठाते होंगे
अब धीरे धीरे बाजरे की उपयोगिता बढ रही है लिहाजा इसके एक्सपोर्ट का ऑप्शन भी खुला है जो बन्धु एग्रो बिजनेस में है..
वंदन इस बाजरी को जिसने हमारी कहीं पीढ़ियों को संभाला 👍👍
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