आज मातृत्व दिवस हैं और मेरी तरफ से मां के चरणों मे कोटी कोटी वन्दन,
'सालवे ने जाजे दिकरा' ,जीव रा जतन करजै.
यह शब्द पढ कर आप को भी याद आ गया होगा की यह शब्द हर मां अपने लाडले को देशावर रोजगार पाने के लिए जब मा का लाडला घर से विदा लेता है तो मां अपने लाडले को कहती हैं,
हमे मारवाड़ से रोजगार पाने के लिए अपने राज्य से दुसरे राज्य मे जाना पड़ता है तब आवाजाही के लिए बस या ट्रेन का सहारा लिया जाता है और इस तरह की तस्वीर आप ने भी अपने जीवन मे बहूत बार देखी होगी और इस तरह का अनुभव लिया होगा. रोजगार के लिए जब पहली दफा आप घर से निकलते है तो कठिनाई की पहली परीक्षा यह बस या ट्रैन ही करवा देते हैं सिमित साधन की वजह से आप को इस ठुसमठुस वाली स्थिति मे बैठना पड़ता है और इस अनुभव को मेने भी महसुस किया है पर आपके जीवन की पहली कठिनाई को आप जैसे तैसे करके अपने सपनो के शहर मे उतर जाते हैं और फिर गांव की दुनिया से आप शहर की भीड़ भाड़ वाली, स्वार्थपन और दौलतमंन्द वाली जगह पर आ जाते हैं, आप के विचार और मन भी सपनो के शहर मे हिलोरे मारने लगते हैं फिर अाप उस जिन्दगी मे रम जाते हैं कही वर्षो अपने सेठ के साथ हंसी, खुशी, सुख दुःख और कष्ट सह कर आप अपने अनुभव को मजबूत करते हैं और फिर एक दिन आप अपना व्यवसाय शुरू कर देते हैं. आप के जीवन का स्वरुप बदलता है और उसके साथ साथ आप कही लोगो के जीवन को बदलते है. इस तरह की समस्या से उपर उठकर आज राजस्थानी भाई दुनिया के हर कोने मे अपने हुनर और कौशल का डंका बजाते है और पुरी दुनिया उन्हे नमन करती है.
अन्त मे बस इतना ही कहना चाहता हूं की तस्वीर को शेयर करने से किसी के दिल को ठेस पहूचें तो माफी का हकदार हूं..
पर अब वक्त बदला है थोड़ा हमे अपने जीवन के बारे मे भी सतर्क रहना चाहिए बेवजह इस तरह की यात्रा ना करे... और मा के शब्द जीव रा जतन करजै को सही उपयोग करें... इस तरह के दृश्य साचौंर से मम्बुई वाली बसो मे आम हैं..
श्रवण चौहान