बुधवार, 18 जनवरी 2023

भिड़ में खोया इंसान लौट आया है। human life

#भीड़ #मे #खोया #इंसान #लौट #आया #है 

जब से जन्म लिया और समझ आयी तब से यही सिखाया गया, पढाया गया, बोला गया, सुनाया गया, दिखाया गया की ये 21 वी सदी है आगे बढो, दौड़ते रहो, नही तो दुनिया मे पिछे रह जाहोगे. 

इस दौड़ मे हर कोई शामिल हो गया, देश दुनिया का आम इंसान इस रेस का राही बन गया, जो लोग गावों मे रहते थे वो भी आगे बढने की रेस मे शहरो की तरफ भागने लगे गांव खाली से हो गये थे.. 

दौड़ मे यही था की कैसे भी करके आगे बढो येन केन पैसा कमाए उसी पैसो के बल पर तुम्हारी सफलता नापी जायेगी. 

दौड़ इतनी अन्धी हो गयी थी की इसमे सच्चा इंसान इस भीड़ मे खो गया था, हर जगह सफलता के पैमाने सुनाये जाने लगे, आम इसांन ना चाहकर भी इस भीड़ का हिस्सा बन गया था कौन किधर जा रहा था तो कौन किधर आ रहा था, उसका कोई पता नही लग रहा था, हर कोई अपनो से पराया हो रहा था, हर कोई बड़े परिवार से छोटे परिवार मे विश्वास करने लगा था, हर कोई अपने को आगे रखना चाहता था, चाहे सामने वाला मरे या जीये वो अपनी जीत सुनिचित करना चाहता था. 

दौड़ मे परिवार बिछड़े, परिवार मे भाई बिछड़े, बहन,नाना नानी, मामा मामी,काका काकी, बान्धव, कुटुम्ब  सब का संबन्ध एक साकेंतिक मात्र रह गया था बस इंसान को तो सफल होना था. 

भीड़ इतनी थी की मानव जात की क्रद  नही थी ना सुनने वाले, ना दिखने वाले रोज किस्से रोज अखबार और टिवी सक्रिन की सुर्खिया थी, मानवता तार तार थी लोग किसी को बचाने नही अपने आप को आगे बढा रहे थे.. 

भीड़ भौतिक सुख सुविधा के लिए मरे जा रही थी मां बाप के रिस्ते और व्यवहार को भुला रही थी रोज कान खड़े करने वाली खबरे पढी जा रही थी लोग पैसो के लिए क्या क्या नही कर रहे थे.. 

भीड़ ने मान लिया था की अब अगर पिछे रहे तो इस भीड़ मे कुसले जायेगें बस दौड़ो दौड़ो, भागो भागो, 

हर कोई बिजी था, किसी के पास दो वक्त के लिए समय नही था ना परिवार के लिए और ना ही आस पड़ोस मित्र सगे रिस्तेदारो के लिए, बस पैसा ही सब कुछ था... 

कॉर्पोरेट हाउस तो ऐसे जिदां ताबुत थे की बस तुमको तो यह करना पड़ेगा नही तो यह हो जायेगा, तुम पिछे रह जाहोगे, वो हो जायेगा. इसांन को इतना डरा दिया था की इंसान इस भीड़ का सजीव होते हुए निर्जिव प्राणी बन गया था. 

निर्जीव प्राणी बन दर दर की ठोकरे खाने को मजबुर था ना जिने की चाह थी और ना मरने का भय उसे तो उस भीड़ मे काबिल बनना था.. 

लोग कहते थे दुनिया तेज हो गयी अब चंद मिन्ट के लिए नही रूकेगें, दुनिया इतनी विकसित हो गयी है की इंसान को जिदां कर देती है दुनिया एक मिन्ट मे सामने वाले को खत्म कर देती हैं, एक मिन्ट मे सामने वाला कहां छुपा है पता कर देती है, दुनिया आकाश से पाताल और पाताल से गगन तक जा पहूंची हैं की पुछो मत अगर तुम नही दौड़े तो क्या होगा कैसे जिदां रहोगे... 

इस झूठी कल्पना और अधीं दौड़ को एक मामुली वायरस ने रोक दिया विश्व के सब देश खौफजादा है जो शक्तिशाली होने का दंभ भरते थे जो अणु परमाणु रोबोट की बात करते थे वो भगवान के भरोसे बैठे हैं, देश के हर जगह भय व्याप्त है कोई उस से बच नही पा रहा है, कोई इस छोटे से वायरस से सिना तान कर सामने नही आ रहा हैं. 

जो बड़े बड़े शहर पैर रखने की जगह नही थी वो विरान से पड़े हैं लोग घरो की तरफ भाग रहे हैं इस से बचने के लिए महाशक्तियो से नही सिर्फ भगवान के भरोसे है वो चिकित्सा भी लाचार है जो भगवान मे विश्वास कम करती थी वो विकसित का दभं भरती थी. 

हवाई बंद, ट्रेन बंद, बस बंद, गाड़ी बंद, मोल बंद, पब बंद, बड़े बड़े होटले बदं, दुकाने बदं, कारखाने बदं, आलीशान बगलेॉ बदं, बड़ी बड़ी गाड़ीया बदं, शानो शौकत के रास्ते बदं, अमीर का दभं भरने वाले बदं कमरो मे बदं, हर तरफ बदं.

वो भीड़ धिरे धिरे कम हो गयी वो काबिल होने की दौड़ खत्म हो गयी. 

उसी भीड़ मे खोया सच्चा व्यवहार, अपनापन और सरलता का राही इंसान फिर घर की और लौट आया है, वो सुकुन की सांस लेकर बोल रहा है यह सब अधीं दौड़ मिथ्या थी ना संसकृतिं का मान था ना इसांन का.. 

आज भीड़ से लौटा इसांन परिवार के साथ हर पल बिता रहा है, पुराने समय को याद कल रहा है और भुले भगवान को याद कर रहा है और भगवान से अरदास करते हुए कहता है हम तो भोले प्राणी है तुही शक्तिमान तुही सर्वदाता है अब तुमको ही हमे बचाना है... 

भीड़ से लौटा इसांन एकबार फिर आकाश को निहार रहा है और नींद के आगोश मे सो गया... ना टी टी की आवाज, ना प्रदूषण... 

भगवान से इंसान यही कह रहा है अबकी बार बचा ले फिर कभी इसांनियत को मरने नही दुगां...... 

भगवान सबको कुशल मंगल रखे, हम भारतीय जितेगें और दुनिया को रास्ता दिखायेगें की तेज रफ्तार से ज्यादा इसांनियत है...... 

भीड़ मे खौया इसांन लौट आया है.. 

श्रवण चौहान

समस्या को बोझ ना बनने दे। motivational

#समस्या #को #बोझ #ना #बनने #दे। 


एक प्रोफेसर कक्षा में दाखिल हुए। उनके हाथ में पानी से भरा एक गिलास था। 

उन्होंने उसे बच्चों को दिखाते हुए पूछा, “यह क्या है?” छात्रों ने उत्तर दिया, “गिलास।” प्रोफेसर ने दोबारा पूछा, “इसका वजन कितना होगा ?” उत्तर मिला, “लगभग 100-150 ग्राम।” उन्होंने फिर पूछा, “अगर मैं इसे थोड़ी देर ऐसे ही पकड़े रहूं तो क्या होगा ?” छात्रों ने जवाब दिया, “कुछ नहीं।” “अगर मैं इसे एक घण्टे पकड़े रहूं तो ?” प्रोफेसर ने दोबारा प्रश्न किया। छात्रों ने उत्तर दिया, “आपके हाथ में दर्द होने लगेगा।” 
उन्होंने फिर प्रश्न किया, “अगर मैं इसे सारा दिन पकड़े रहूं तो क्या होगा” ? तब छात्रों ने कहा, “आपकी नसों में तनाव हो जाएगा। नसें संवेदनशून्य हो सकती हैं। जिससे आपको लकवा हो सकता है।” प्रोफेसर ने कहा, “बिल्कुल ठीक। अब यह बताओ क्या इस दौरान इस गिलास के वजन में कोई फर्क आएगा ?” जवाब था कि नहीं। तब प्रोफेसर बोले, “यही नियम हमारे जीवन पर भी लागू होता है। यदि हम किसी समस्या को थोड़े समय के लिए अपने दिमाग में रखते हैं। तो कोई फर्क नहीं पड़ता। 

लेकिन अगर हम देर तक उसके बारे में सोचेंगे तो वह हमारे दैनिक जीवन पर असर डालने लगेगी। हमारा काम और पारिवारिक जीवन भी प्रभावित होने लगेगा। इसलिए सुखी जीवन के लिए आवश्यक है कि समस्याओं का बोझ अपने सिर पर हमेशा नहीं लादे रखना चाहिए। समस्याएं सोचने से नहीं हल होतीं। सोने से पहले सारे समस्यायुक्त विचारों को बाहर रख देना चाहिए। इससे आपको अच्छी नींद आएगी और आप सुबह तरोताजा रहेंगें।

शिक्षा:-

समस्याओं को लेकर अधिक परेशान नहीं होना चाहिए। इससे हमारा नुकसान ही होता है 

#प्रेरक #प्रसंग #motivational #happylife #lifestyle #sunday #sundayvibes #sundaymotivation #sundaybest #sundaythoughts #sundayquotes #todaythought #goodthoughts #inspiration #inspirational #morningvibes #sundaymood☀️

चाहत नहीं इरादे होने चाहिए..Motivational

चाहत नहीं इरादे होने चाहिए.. #YSR
#Yogendra #SINGH #Rathore 

आज मुझे एक हम उम्र, युवा शख्स से मिलने का मौका मिला जिसने कम समय मे बहूत कुछ अपने नाम कर लिया और यही क्रम अनवरत चल रहा है और चलता रहेगा ऐसी मनोकामना करता हु.
में बात कर रहा हूँ अजमेर के समीप एक साधारण राजपुत  परिवार मे जन्मे  #Yogendra #SINGH #Rathore जो आज एक बेहतरीन renowned #NATIONAL LEVEL #Mind and #Memory #trainer, #inspirational and #motivational #public #speaker, life coach and a rising #entrepreneur as well.  He is the #author of the book -'#Awaken the great potential of Memory and #Will-power'. उन्के बारे मे जीतना लिखे उतना कम पड़ेगा उन्होने 2010 में Nirma University से B.Tech किया RPET मे 42 वा रेंक मिला, कही नेशनल और इन्टरनेशल पुरस्कारों से नवाजे जा चुके हैं, उन्होने अपनी बात मे बताया की वो एक साधारण परिवार से आते हैं और परिवार मे सभी और आस पास के सब नौकरीयात मतलब सर्विस क्लास मे विश्वास करने वाले लोग थे,  मेने भी इन्जीनियरिंग की और मुझे अच्छी नौकरी मिल गयी  पर मेरे मन मेे कुछ लिक से हटकर कुछ ऐसा करना चाहता था जिसमे मुझे पैसा और प्रसिद्धी दोनो मिले, मेने लाईफ चेंजर, मोटीवेशन स्पीकर बनने की ठानी पर जब यह बात घर वालो को बताई तो पुरा परिवार, रिशतेदार मुझे अलग अलग ढंग से समझाने लगे, जिन्दगी का नफा नुकसान बताने लगे और ऐसा ना करने के लिए कही उदाहरण तक दीये गये पर मेरे मन मे बस जो सोचा वो करने का ठान रखा था अन्त मे मेने यही रास्ता चुना, शरूआत मे बड़ी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा, कही दफा फाईनेन्सियली और कही दफा प्रोफेशनली पर उन्होने कभी हार नही मानी और लड़ते रहे और आगे बढते गये.आज बताते हुए खुशी है की वो नेशनल लेवल की सेलीब्रिटिज बन गये हैं और कम्पनी के ब्रांड ऐम्बेडर भी है और तो और आज उनकी कम्पनी 10 करोड़ नेट वर्थ की कम्पनी बन गयी हैं. भारत मे सबसे ज्यादा योगी के रूप में  instagram पर follow करने वाला कारनामा आप के नाम हैं. 
बोलने की कला जबरदस्त हैं उन्की बातो मे अध्यात्मिकता का भी कन्सेपट झलकता है. घोड़े जैसा जोश है पुरा सेशन जोशिला और लाईफ कोन्सप्ट के साथ रहता है.

ऐसे युवा से मिलकर अच्छा लगा और भविष्य मे तरक्की करे ऐसी उम्मीद करते हैं, और उन्के बतायी बात की चाहत नही इरादे होने चाहिए उसे जीवन मे उतारने की कोशिश करेगें. बहूत खुब धन्यवाद 
#YSR #AHMEDABAD #MOTIVATIONAL #SESSION

प्रवासी आफत नही अवसर..! कोरोणा काल

#प्रवासी #आफत #नही #अवसर... Covid time

हम सब के जीवन काल मे ऐसा पहली बार ही हुआ है की अपने घरो से आजीविका कमाने निकले हमारे अपने लोग घर वापस आने के लिए जी तोड़ मेहनत और येन केन रूप से एकबार घर पहूंचना चाहते हैं. 


सरकार की परीक्षा 

राजस्थान की स्थापना के बाद शायद ही ऐसी कोई सरकार रही होगी जिन्हे इस रूप मे ऐसी वस्तु स्थितियों का सामना करना पड़ रहा होगा, राजस्थान मे करीब हर जिले, गांव कस्बो से लोग रोजगार के लिए देश विदेश जाते हैं और वही रहकर अपने घरो और राज्य को पैसे भेज कर मजबूत करते हैं. वो एक तरफ से सरकारो के लिए कतई बोझ नही बने और जब जब सरकार ने इन प्रवासियों को आर्थिक सहयोग के लिए याद किया है तो दिल खोलकर अपने गांव, जिले और राज्य की तरक्की के लिए सहयोग किया है. 

जालोर-सिरोही एक नजर में.. 

राज्सथान के यह दोनो जिले ऐसे है जिन्में से पशास प्रतिशत या उससे अधिक मात्रा मे लोग प्रवासी हैं. इन दोनो जिलो की सम्मानता भी है और वो यह की दोनो एक लोकसभा के भाग है और जिसका नतिजा यह है की वर्षो से यह लोकसभा एक पिछड़ा हुआ लोकसभा माना जाता है, सासंद बुटा सिंह से लेकर वर्तमान सासंद जी तक इस लोकसभा के विकास के नाम पर जय माताजी ही मिली है इन जिले को आज भी पिछड़े हुए जिले की श्रेणी मे रखा जाता है उसके पिछे बेसिक सुविधा का ना होना और यह नही होने का कारण हमारी लीडरशिप की योग्यता मे कमी मानना उचित होगा. 

जैसा की अब प्रवासी करीब करीब जिलो मे लौट चुके हैं और जिले पर दबाव बढता रहा है उसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं, 
कल तक ग्रीन जोन मे गिने जाने वाला जिला अब ओरेन्ज के बाद रेड जोन की तरफ बढने लगा है और इधर हम अपने लोकसभा जिलो के चिकित्सा सुविधा का आकलन करे तो सुविधा 'मोणा मे मुठी' बराबर है मतलब की शुन्य है, ना बड़े अस्पताल है ना बड़े डॉक्टर है ना बड़ी जगह जहां पर बेड की व्यवस्था हो सके, कोरोना मे वेटंिलेटर की आवश्यकता मानी जाती है तो लोकसभा मे कुल मिलाकर 20 मशीन नही होगी, लोकसभा मे वर्तमान सासंद जी जो तीसरा अपना कार्यकाल मे है अब तक कितने बड़े अस्पताल लोकसभा मे लाये यह तो उन्के लोग ही बता सकते हैं. 

जालोर सिरोही मे अधिक मात्रा मे लौटे प्रवासी बन्धु जो दो तरह के है उन्मे एक सेठ है और दुसरे श्रमिक बन्धु. इस विपरीत हालातो मे सेठ बन्धु को अपना घर बार चला लेगें पर जो श्रमिक बन्धु है उन्का क्या वो महिने का कमाई घर भेजते थे आज वो भी बन्द है अब इस समस्या का सामना यहा की वतृमान राज्य सरकार को करना पड़ेगा इन बन्धुओ के रोजी रोटी की व्यवस्था करने का जिम्मा अब राज्य सरकार पर है शायद यह पहली बार राज्य सरकार पर बोझ बन रहे वर्ना हमेशा स्वाभिमानी से कमा कर पैसा राज्य मे भेजा है पर अब हालात विपरीत हैं कोरोना की वजह से सब कुछ छोड़ जीव बचाने के घर को लौटे हैं. 

समस्या मे समाधान... 

जालोर सिरोही समेत राज्य के अधिंकाश जिले मे प्रवासी बन्धु लौटे हैं और कोरोना के डर के साथ साथ बेरोजगारी का डर भी अब लगने लगा है. 
अगर यह लोकडाउन की समय सीमा बढती हैं तो बेरोजगारी का आंकड़ा भी अचानक बढ जायेगा, क्युकी एक बेरोजगारी की संख्या वो है जो यहा स्थाई है और दुसरा प्रवासी बन्धुओ का मिलन इस संख्या मे इजाफा कर सकता है. 
सरकार इस समस्या से निपटना चाहे तो बेहतर ढगं से प्लानिंग करे तो जो प्रवासी बन्धु बाहरी राज्य मे रहकर व्यापार कौशल, मेहनत, लगन से कमाई करते हैं उसी को इस राज्य मे परखा जाये मतलब की सरकार ऐसे अवसर पैदा करे की प्रवासी बन्धु अपने जिले, राज्य मे ही रहकर रोजगार पाये और पैदा करे जो बाहरी राज्य मे निवेश है उन्हे अपने इधर मोड़े. 
सरकार को इसके लिए व्यापक स्तर पर कार्य योजना की जरूरत पड़ेगी ना की मनरेगा जैसे कार्य चला कर.

 सरकारी इच्छा शक्ति दिखा कर जो कही वर्षो से हमारे राज्य मे औधोगिक ऐरिये है जैसे 'रिको जोन' ऐसे जगह मे नयी जान डालनी पड़ेगी लाईट, पानी और बेसिक सुविधा का विस्तार करना पड़ेगा, टैक्स मे छुट और यातायात की सुविधा करनी पड़ेगी, ईजी बिजनेस का मोडल तैयार करना पड़ेगा को इतनी बड़ी संख्या मे यह मेन पावर का सही इस्तेमाल हो सकता है.

 जैसा की कहा गया है की बड़ी महामारी या घटना के बाद पुरे विश्व मे बहूत कुछ बदल जाता है तो हो सकता है हमारा राज्य इस आफत को अवसर समझ कर कार्य करे तो राजस्थान एक नये युग मे प्रवेश करेगा. 

आफत नही अवसर.. 

कोरोना काल मे सब कुछ रूका सा पड़ा है हर कोई इस कठिन समय के गुजर जाने की प्रतीक्षा मे बैठा है की सब कुछ सही रहते हुए यह काल अपने उपर से बिना किसी को निगले निकल जाये जिससे की परिवार बचा रहे. 

जैसे ही सब बुरा वक्त गुजरे तो हम सब जालोर-सिरोही वासियो के लिए कुछ वक्त बैठ कर सोचने की वक्त है.

 हमारे जिले करीब सतर साल बाद भी पिछड़े हुए क्यु?  हमारे लोकसभा मे आज भी बड़ा कोई अस्पताल क्यु नही? हमारा जिला बिजनेस लोगो के लिए जाना जाता है तो यह सुविधा लोकल स्तर पर क्यु नही ?  हमारे जिले के लोग जब नेता प्रवास पर जाते हैं तो फुल मालाओं से लाद देते हैं पर बुरे वक्त मे सब सब कहा छुप गये?? क्या इन नेताओ को सामूहिक प्रयास नही करने चाहिए थे..?  क्या अब भी हम चुनाव वक्त जातियों मे बंट जायेगें...? क्या एक आम युवा प्रवासियों के लिए आवाज उठाता रहा हो यह  काम इन चुने हुए नेता का नही था...?  हजारो रूपये खर्च कर क्यु आना पड़ा???  पास के लिए दर दर क्यु भागना पड़ा??? 

इन सब सवालों के मन मे दबा रखिये और वक्त आने पर जवाब जरूर मांगना.... 

हमारी लीडरशिप इस समस्या को आफत ना समझकर अवसर माने और इस दिशा मे अभी से पहल करे तो बहूत कुछ बदल सकता है. 

आप सभी प्रवासी बन्धुओ और हम सब मिलकर सरकारी आदेश का पालन करे और कोरोना से बचे... 

जय जलन्धरनाथ जी जय सारणेश्वर जी
#जालोर-#सिरोही

मंगलवार, 17 जनवरी 2023

जय उमिया माताजी। ऊंझा गुजरात। umiya mataji unjha ।

कहते हैं.. कडवा पाटीदार समाज की कुलदेवी मां उमिया को  भगवान शिव ने स्वंय उुजां गुजरात मे विराजमान किया था,  विक्रम संवत 212 में वहां के राजा व्रजपालसिंह ने मदिर का निर्माण करवाया और फिर राजा अवनिपत ने बड़ा सा हवन करवाया था जिसमे करीब सवा लाख नारियल और घी का उपयोग किया गया था.

उसके बाद विक्रम संवत 1122-24 में वेगडा गामी ने वापिस निर्माण करवाया क्युकी उसे अलाउध्दिन खिलजी के सेनापति उूलग खाना ने तोड़ दिया था. 1943 मे पाटीदार समाज ने मंदिर का सम्पूर्ण निर्माण करवाया और उसमे हर पाटीदार घर से हिस्सा लिया गया और उसमे आगेवान श्री रामचन्द्र मनसुख लाल,गायकवाड़ गर्वमेन्ट और पाटड़ी दरबार थे. 1952 से यह ट्रस्ट से संचालित होता हैं, जेठ सुद 2 को यहा उत्सव आयोजित होता है जिसे `हेल खेलना ना हलोतरा' 'भटवारी' नाम से जाने जाते हैं, मा उमिया की अशिम कृपा पाटीदार समाज पर बनी हुई हैं और आज वे धन धान्य से सम्पूर्ण जीवन जीते है, वैसे उूंजा आज कृषि उत्पादो का पुरे देश का केन्द्र माना जाता है और पुरे देश भर से यहा व्यापरी खरीद बेच के लिए आते हैं यहा पर जीरा, सौंफ, राई, तिल जैसे उत्पादो का जोर रहता है. जी हा उूजा मंडी मे आप को गुजरात और राजस्थान के लोग ज्यादा मिलेगें वहा पर अधिकतर दुकाने पाटीदार समाज के लोगो की है और उन्के साथ मे राजस्थान के बाड़मेर, गुड़ामालानी, चोहटन, साचौंर के लोग भी मिल जायेंगे. मा उमिया सब पर अपनी  कृपा बनाये रखे और किसान और व्यापारीयो के चेहरे पर चमक बरकरार रखे. 

#जय #उमिया #माताजी. #Unjha #Umiya #mataji

सोमवार, 16 जनवरी 2023

जब धर्म की हानी हुई तब तब क्षत्रिय ने जीवन बलिदान दिया है। #जय #सोमनाथ ।#हमीर #जी #गोहिल।

#जब #धर्म #की #हानी #हुई #तब #तब #क्षत्रिय #ने #जीवन #बलिदान #दिया #है। #जय #सोमनाथ ।#हमीर #जी #गोहिल।


सौराष्ट्र जिसे सोरठ और काठियावाड़ भी कहते हैं, खंभात और कच्छ की खाई के बीच की भूमि, जहाँ कई वीर क्षत्रियों ने जन्म लिया, कई संतो ने अपने ज्ञान से इस भूमि को पवित्र किया, जहाँ के चारण आज भी बहुत गर्व से सोरठ भूमि की गाथा कहते हैं.

सोरठ भूमि का गोहिलवाड, अमरेली जिले के लाठी में भीमजी गोहिल के यहाँ हमीर जी गोहिल का जन्म हुआ . बचपन से ही बहादुर हमीर जी, एक बार खाना खा रहे थे तब इन्हें इनकी भाभी द्वारा ये पता चला की विदेशी आक्रमण कारी सोमनाथ मंदिर लूटने आ रहे हैं. इनकी भाभी ने ताना मारते हुए कहा, आज सोरठ की भूमि पे कोई भी ऐसा क्षत्रिये खून नही बचा, जो विदेशी आक्रमणकारियों  का सामना करके उनसे सोमनाथ मंदिर की रक्षा कर सके. हमीर गोहिल का क्षत्रिय खून खौल उठा, उनसे ये ताना वर्दास्त नही हुआ, और खाने से उठकर, उन्होंने प्रतिज्ञा ली की जीते जी सोमनाथ किसी विदेशी को लूटने नही दूँगा. भाभी को अपनी गलती का अहसास हुआ, उन्होंने उसे रोकने की कोशिश भी की पर वो नही रुके, और अपने साथ दुसरे २०० वीर लोगों को लेकर सोमनाथ की तरफ चल पड़े.

रास्ते में एक जगह विश्राम करते समय इनके कान में मरशिया (वीरों के मरने पर गाये जाने वाले गीत) गीत सुनाई दिया, हमीरजी ने देखा एक बूढी माँ गीत गा रही हैं, उन्होंने पास जाकर पूछा आप किसका मर शिया गा रही हो बा, बूढी माँ बोली अपने बेटे का, अभी १५ दिन पहले ही उसका स्वर्गवास हुआ है. हमीर जी ने कहा बा आप अपने पुत्र का मरशिया गा रहे हो उसी तरह मेरा मरशिया गाओगे, मुझे मरने से पहले अपना मरशिया सुनना है.

बा बोली बेटा, ये क्या कह रहे हो ? एक जवान जिन्दा मर्द का  मरशिया गाकर मुझे पाप का भागीदार नही बनना. हमीर जी ने कहा , मैं घर से प्रतिज्ञा लेकर निकला हूँ की जीते जी सोमनाथ विदेशियों को लूटने नही दूंगा, वहां सुल्तान ज़फर की फ़ौज है और यहाँ हम सिर्फ २०० लोग, मरना तो निश्चित है, तो आप बिना किसी संकोच के मरशिया गाओ बा. बा ने कहा सोमनाथ की रक्षा के लिए निकले हो, मैं वहीँ जा रही हूँ, तुझ से पहले पहुचुंगी वहां जाकर देखूंगी की तू किस वीरता से लड़ता है, उस तरह से ही तेरे मरशिया गाऊँगी, और बा सोमनाथ के लिए निकल गयीं.

आगे गिर के जंगल से गुज़रते  समय हमीर जी गोहिल का सामना जंगल में रहने वाले भीलों से हुआ, भीलों को जब ये मालूम हुआ कि ये नौजवान दल सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए इस ओर आया है, तो उन्होंने उनका बड़ा स्वागत किया. भील सरदार वेगडा जी भी अपने ३०० भील बंधुयों के साथ इस दल में शामिल हो गए और उन्होंने भी सोमनाथ की रक्षा की कसम ली. भील सरदार वेगडा जी की बेटी से हमीर जी का विवाह हुआ, और उस दिन वहां बहुत खुशी मनाई गयी.

अगले दिन सब अपने हथियारों सहित सोमनाथ मंदिर, प्रभास तीर्थ की और बढ़ चले. वहां पहुंचकर प्रभास का बाहरी क्षेत्र वेगडा जी ने संभाला और मंदिर का क्षेत्र हमीर जी ने अपने हाथों में लिया.

ज़फर खान की सेना जब प्रभास पहुंची तो उनका सामना पहले वेगडा जी भील से हुआ, वेगडा जी भील और उनके भील सिपाहियों ने जमकर टक्कर ली और तीर कमान से तोपों का सामना किया, पर जफ़र खान ने तोपों के गोले उन पर बरसाना चालू रखा, अंत में सभी भील सिपाही सोमनाथ की रक्षा करते हुए शहीद हुए.

ज़फर खान की सेना भीलों से सामना होने के बाद आगे बढ़ी, यहाँ हमीर जी गोहिल से सामना हुआ, जफ़र खान की सेना बराबर तोपों से गोले बरसाती रही फिर भी हमीर जी गोहिल ने ९ दिनों तक डटकर सामना किया. अंत में हमीर जी ने केशरिया करने का निर्णय किया, और सबको युद्ध रचना समझा दी, सब वीरों ने केशरिया साफा सर पे बांधा और किले के दरवाजे खोल कर सब मैदान में आ गए. सब ने वीरों की तरह मैदान में रण कौशल दिखाया, और जब तक लड़ सकने की एक भी उम्मीद उनके आखरी खून की बूंद में रही वे लड़े, अंत में सिर्फ हमीर जी बचे. ज़फर खान ने अपनी सेना को हमीर जी को चारों और से घेरने का हुक्म दिया, सारी सेना अब हमीर जी को घेर कर उनपर वार करने लगी, और लड़ते लड़ते उस वीर ने भी वहीँ, सोमनाथ की शरण में प्राण त्याग दिए.

उसके बाद ज़फर खान सोमनाथ मंदिर को लूटकर, फिर से उसे ध्वस्त करके अपनी राजधानी लौट गया.

જનની જણતો ભગત જણજે, કા આવા શુરવીર અને કા દાતાર, નહિતર રહેજે વાંજણી, મત ગુમાવીશ તારૂ નુર.

#श्रवण #चौहान #Somnath #temple #Shrawan #Chauhan

मारवाड़ का नाश्ता,भोजन। राजस्थान

#घाट, #घें या #राबडी 

जब सूरज देवता अपनी अधिकतम ताकत का अहसास करवा रहे हो और जेठ महिना अपने भारतीय संस्कृति मे जेठ सा सर ढक कर रहने का अहसास करवाये उस समय  इन से बचने के लिए इन्सान कही जतन करता है. 

अभी राजस्थान मे गर्मी जमकर अग्नि बरसा रही है और पंखा, कुलर और वातानुकूलित यंत्र भी इस तेज धुप के सामने हांफते नजर आ रहे हैं. 

वैसे गर्मिया के दिन है तो अंधिकाश बच्चे घर आये हुए है तो कुछ विवाह सिजन या कोई काम से देश आये हुए हैं और वो लोग जो शहरी जीवन के आदी हो गये हैं उन्को अभी गर्मी से बचने के लिए कई जतन करने पड़ रहे हैं. 
वैसे में भी गर्म हवा और तेज का ताप नापने के लिए गांव हूं. 

गर्मी मे व्यक्ति ना तो ज्यादा खा सकता है ना ज्यादा घुम फिर सकता है. 

यह जो तस्वीर है यह राजस्थान और अंधिकाश मारवाड़ मे आज भी घरो मे देखने को मिल जायेगा. जी हां बात कर रहा हूँ मारवाड़ की परंपरागत और सातवीक, सादा और पाचक भोजन 'घाट' या 'घें' और तरलता का रूप हो तो उसे राबड़ी कह सकते हैं. 
 दरअसल मारवाड़ मे बाजरे प्रमुख खाघान्त अनाज माना गया है और यही एक फसल होती है जो हर घर की भोज्य जरूरत को पुरा करती है. बाजरी से बनने वाला सोगरा और साग जग सावे है... और यह ताकतवर भोजन माना गया है सोगरा शरीर की सभी जरूरतो को पुरा करता है. 

बात कर रहे थे घाट  की तो घाट बाजरी से ही बनती है. बाजरी को अधकसरा कर दिया जाता है और उसे किसी ओखली या हमाम मे कुटा जाता है. फिर किसी मिट्टी के बर्तन मे इसे छाछ के साथ चुल्हे पर पकाया जाता है.. पकने तक इसमें लकड़ी का डोयला घुमाया जाता रहता है जिससे उसमे गलेट ना पड़े.. पकने के बाद इसको रख दिया जाता है. 
सुबह इसको आप छाछ, दही या दुध के साथ आराम से खा सकते हैं इसे नाशते के वक्त, भोजन या बेफारा के टाईम या शाम के वक्त दुध के साथ बड़े आराम से जीम सकते हैं. 
यह ठण्डा तासीर का भोज्य है इसके जीमने से आप के पेट मे ठंडक का अहसास होगा, पाचन शक्ति भी बढाता है. और तरलता रूप होने के कारण आप गर्मी मे जीमने से पेट का भारीपन अहसास नही करेगें. 

घाट आजकल कही घरो मे नही के बराबर बनती है इसे एक पुराना और अनपढ लोगो का भोजन माना गया और नये लोगो कही बार मजाक भी करते हैं. घाट को गरीबी से भी जोड़ा गया.. वैसे इसको बनाने की मेहनत ही कम बनाने की वजह हो गयी है.. देसावरी लोग होने के कारण घर घर मे गाय भैंस पालना बन्द कर दिया है उसकी मार आज गावों मे साफ दिखती है.. 

छाछ शहर मे आज आसानी से मिल जायेगी पर अब यह गावों मे मिलना दूभर हो गया है.. बिन छाछ घाट की कल्पना मुश्किल है. 
वैसे आधुनिकता मे अगर कोई इसे तड़का या टेस्ट दे तो यह शहर मे सुबह के वक्त लेने वाला पौष्टिक आहार माना जाने लगेगा.. जैसा ईडली डोसा... 
मैं तो लुफ्त ले रहा हूँ आप भी मारवाड़ पधारे तो एक बार घर पर घाट बनवाई और आनन्द से जीमिये.. 

यह हमे जमीन से जुड़े रहने का आहसास करवाता है और तलीय भोजन से बेहतर है.

वक्त बदला है वक्त की निशानियां नही.. जल ही जीवन है।

#वक्त #बदला #है #वक्त #की #निशानियां #नही.. 

आज जब पुरी दुनिया जल संरक्षण के विषय पर बड़े बड़े सेमिनार आयोजित कर रही हैं. वही हमारे भारत मे प्रथम वक्त जल मंत्रालय का निर्माण कर पुरे भारत मे देश के प्रधानमंत्री जी इस मिशन और मुहिम मे जुटे है और इस मंत्रालय का जिम्मा हमारे लाडले मारवाड़ के सांसद गजेन्द्रसिंह जी के हाथ है और प्रधानमंत्री जी को उम्मीद भी है की राजस्थान के लोग जल संरक्षण विषय को बेहतर समझते हैं जिसका लाभ पुरे भारत को मिले. 

वैसे आज यह विषय ज्वलंत लग रहा है इसका पुर्वानुमान हमारे पुर्वजो को पहले भी था और वो इस जल सुखा से लड़ते आये है और लड़ रहे हैं आने वाली पिढियो के लिए. 

करीब लोकतंत्र के शरूआती वक्त मे हमारे बावरला ठां. उदेयराजसिंह जो उस वक्त करीब और आज के वक्त सात आठ पंचायतो के प्रमुख थे जो हाल मे बावरला, किलवा, डभाल, हाडेचा, जानवी, दातिया, सरवाना और आमली तक शामिल थी. 

उन्के दूरगामी सोच का अनुमान इस बात से लगाया जाता है की जब उन्होने गांव वासियों के लिए एक सिमेन्ट का कुआं, साथ मे हौद बनाया था.यह जल स्रोत बड़ा ही आधुनिक बना हुआ था उस वक्त के हिसाब से.
कुएं से पानी निकल कर पहले हौद मे गिरता था फिर एक नाला से दुसरे हौद मे जाता था जिसका पनिहारी पानि भरती थी, दुसरा पशुओं के लिए पर उससे पहले स्नान के लिए भी काम आता था.. नजदीक से देखने पर उस कुआं और हौद के निर्माण कला का दाद देने का जी करता है. 

आज के वक्त मे यह हौद जरूर दिखता है पर कुआं पुर्णत जमीन मे दबा गया है, बरसात के पानी का स्टोरेज करने के लिए तालाब कच्चा बनाया हुआ था जो अब जमीन के बराबर दिखता है. 

आज केन्द्र सरकारे और राज्य सरकारे करोड़ो रूपये खर्च कर रही हैं वही सरकारे अगर पहले वक्त मे बने और अब बंद पड़े जल स्रोतो, नलकूप, तालाब का पुर्ननिर्माण करवाये तो जल संरक्षण मिशन मे सफलता के कदम मे एक और कदम साथ हो जाये... 

राजपूत कभी कमजोर नहीं हुआ।

#कौन #राजपूत #कमजोर हुआ.?


एक वक्त ऐसा आया जब कही लेखको ने राजपूत समाज को नकारात्मक की मुर्ति बना दिया और उसमे पतन और एकता की कमी जैसे शब्द हर लेख, कहानी या भाषणो और आपसी बातचीत मे जिक्र होने लगा और वही  बाते पढाते  और सुनाते गये उन्होने माना और उसे आगे बढाया गया नेताओ और समाजिक प्रबुद्ध लोगो के उद्बोधन मे इन बातो की झलक सुनाई देती रही है..

 पिछली तीन चार दशको की जेनरेशन ने यही पढा और नकारात्मक का बोध किया.. वो मानने लगे की हा हमारे मे एकता नही है... 

क्या सचमूच मे ऐसा था या है...हा परिस्थितियों के बदलाव मे समाज को उस धारा मे जीवन जीने के हालात मे सामजस्य बिठाणे मे समय लगा और वो कही जगह जहां उन्का प्रतिनिधित्व होना था नही हो पाया या भाग नही ले पाये जिससे एक बड़ा गेप आ गया और उसको विरोधी लेखको ने एकता की कमी और पतन से समाज को लुहलाहन करते रहे और कर रहे हैं... 

नकरात्मक का दुसरा भाग सकारात्मक भी होता है कभी उस विचार से अपने आप को पढे अपने पुर्वजो को पढे तो यह इस दुनिया के लेखको का कालाजादु आपके सामने आ जायेगा.. 
लोकतंत्र व्यवस्था मे समाज के रह व्यक्ति ने हर भाग मे अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई हैं हर कोने मे अपने आप को पाया है.. आप दस मिन्ट आखें बन्द करके सोचे जिस भाग मे जानना चाहगें वहा आपके समाज का प्रतिनिधित्व करता हुआ कोई ना कोई राहगीर मिलेगा.. 

ऐसे लोग और मेरे मित्र जब यह कहते हैं की एकता की कमी है तो उन्हे यही कहूंगा भाई अब बस करो हम मे एकता की कमी नही कही ना कही सामंजस्य का अभाव था.. 
एक बार सकारात्मक सोचो समाज के प्रति आप अपने आप को दुनिया का खुश व्यक्ति मानगें.... 
सब समाज का सम्मान करे वो भी सम्मान करेगें...

हमारे सामाजिक ठेकेदार भी कमी है, कमी है का ढोल पिट कर उल्लु सिधा करते रहते हैं... बस उन्से उम्मीद की वो कुछ पोजिटीव सोचे.. जय माताजी

डूब रहा था भारतीय जंगी बेड़ा फिर भी नहीं छोड़ी शिप, बेखौफ सिगरेट के कश लगाते रहे कैप्टन ।कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला और आईएनएस खुकरी।

#डूब #रहा #था #भारतीय #जंगी #बेड़ा #फिर #भी #नहीं #छोड़ी #शिप, #बेखौफ #सिगरेट #के #कश #लगाते #रहे #कैप्टन #मुल्ला,


जिम्मेदारी जीवन से बड़ी होती है और उससे बड़ा देश, यही भावना उस वक्त भारत के महान सपूत, भारतीय नौसेना के अधिकारी और आईएनएस खुकरी के कप्तान महेंद्र नाथ मुल्ला की रही होगी जब उन्होंने जान बचाने का मौका छोड़कर डूबते हुए अपने जहाज के साथ समंदर में जल समाधि ले ली थी

कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला और आईएनएस खुकरी। 

जिम्मेदारी जीवन से बड़ी होती है और उससे बड़ा देश, यही भावना उस वक्त भारत के महान सपूत, भारतीय नौसेना के अधिकारी और आईएनएस खुकरी के कप्तान महेंद्र नाथ मुल्ला की रही होगी जब उन्होंने जान बचाने का मौका छोड़कर डूबते हुए अपने जहाज के साथ समंदर में जल समाधि ले ली थी। उनका वह फैसला आज भी शोध का विषय बना हुआ है और यह मान लिया जाता है कि कप्तान ने नौसेना परंपरा को निभाते हुए ऐसा कदम उठाया। 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच जंग छिड़ी थी। जंग में भारत पाकिस्तान पर भारी था। भारतीय नौसेना के दो जंगी जहाज आईएनएस खुकरी और आईएनएस कृपाण को पाकिस्तानी पनडुब्बी हैंगर को नेस्तनाबूत करने की जिम्मेदारी दी गई थी। दोनों जंगी जहाजों के कमांडिंग कप्तान महेंद्र नाथ मुल्ला थे। अरब सागर में दीव के करीब भारतीय युद्धपोत हैंगर को निशाना बनाने के लिए बढ़ रहे थे। खुकरी और कृपाण दोनों ही ब्रिटिश कालीन जहाज थे जिनके मुकाबले पाकिस्तान की फ्रेंच पनडुब्बी हैंगर आधुनिक थी।

9 दिसंबर 1971 को हैंगर ने कृपाण पर टारपीडो फायर किया लेकिन वह निशाने न लगकर कृपाण के हल पर लगा जिससे वह डूबा तो नहीं लेकिन समंदर में वहीं ठहर गया। हैंगर ने खुकरी को निशाना बनाया और भारतीय युद्धपोत के ईंधन टैंक पर दो टारपीडो से धमाका कर दिया। देखते ही देखते मौत का मंजर नजर आने लगा। तेल फैलने पर समंदर में भी आग लगी थी, जहाज में तेजी पानी भर रहा था। कप्तान मुल्ला को पता था कि जहाज डूब जाएगा, उन्होंने जहाज को खाली करने का आदेश दिया और अपनी लाइफ जैकेट भी एक जूनियर को थमा दी। उस त्रासदी में बचने वाले लोगों में से एक रिटायर्ड कमांडर एसएन सिंह ने टीओआई को उस भयानक मंजर की दास्तान सुनाई। सिंह ने बताया कि रात के 8:45 बज रहे थे, आकाशवाणी समाचार के प्रसारण के ठीक बाद पीएनएस हैंगर के दो टारपीडो ने जहाज पर हमला किया। मुल्ला को अहसास हुआ कि जहाज को नहीं बचाया जा सकता है तो उन्होंने उसे खाली करने का आदेश दिय


उस प्राण हरने वाली रात में 6 अधिकारी और 61 नौसैनिक ही जान बचा पाए थे। 18 अधिकारियों और 178 जवानों ने जल समाधि ली थी जिनमें कैप्टन मुल्ला भी थे। उस भयानक मंजर से निकलने वालों के लिए सबसे मार्मिक पल वह था जब उन्होंने देखा कि जहाज के पुल पर एक कुर्सी पर 45 वर्षीय कैप्टन मुल्ला बैठे थे, जहाज डूब रहा था और वह सिगरेट के कश मार रहे थे। नौसेना की परंपरा को सर्वश्रेष्ठ रूप से गले लगाते हुए मुल्ला ने खुद को बचाना मुनासिब नहीं समझा। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से ताल्लुक रखने वाले कैप्टन मुल्ला को मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था और उनकी वीरता की कहानी हमेशा के लिए इतिहास में दर्ज हो गई जो कयामत तक नौसैनिकों में जिम्मेदारी की प्रेरणा भरती रहेगी। #Jay #Hind #INS #Khukri #Diu #travelphotography #indianphoto #indianarmy #salute #diu #diutour

रविवार, 8 जनवरी 2023

जय मां आशापुरा। नाडोल पाली राजस्थान

#जय #मां #आशापुरा।

आज नव वर्ष 2023 के शुभ बेला पर हम सब मा आशापुरा के दरबार से आप सब के लिए मंगलकामना करते है। आप सब को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई। 

आज प्रभात मंगल आरती में नव वर्ष की शुरुआत की जिसमे ढोल, नगाड़े,शंख, थाली की गर्जना के साथ हिंदुमय माहोल में मा आशापुरा के दर्शन लाभ मित्रो संग लिए। 

मा आशापुरा जो की पूरे भारत में चौहान कुल गोत्र की कुल देवी मा है। मा आशापुरा चौहान,देवडा, खींची, हाड़ा,निर्वाण, सेप्ता,रावत , जडेजा कुल की मां आशापुरा नाडोल पाली में विराजमान है।

शाकम्भरी के चौहान राजवंश की कुलदेवी है । नैणसी की ख्यात का उल्लेख है कि लाखणसी चौहान को नाडौल का राज्य आशापूरा देवी मा की कृपा से मिला । तदनन्तर चौहान इसे अपनी कुलदेवी मानने लगे । आशा पूर्ण करने वाली देवी आशापूरा के नाम से विख्यात हुई।

लाखणसी  या लक्ष्मण नामक चौहान शासक द्वारा नाडौल में आशापूरा देवी का भव्य मन्दिर बनवाया गया जहाँ  बड़ी संख्या में श्रद्धालु जाते हैं । आशापूरा गाँव की एक पहाड़ी पर देवी आशापूरा का प्राचीन स्थल है जँहा देवी को मीठा भोग लगता हैं । भाद्रपद और चैत्रमास की अष्टमी को विशेेष उत्सव होता है । सैकड़ो वर्षों से आशापूरा देवी की बहुत मान्यता है।

आशापूरा माता शाकम्भरी माता का ही रूप है। शाकम्भरी देवी चौहान राजपूतों की कुलदेवी है। एक शिलालेख के अनुसार विक्रम संवत 1030 में सिंहराज चौहान सांभर का सम्राट बना।  सिंहराज के भाई का नाम लक्ष्मण (लाखणसी चौहान) था।

लाखणसी एक दिन सांभर त्याग कर अपनी पत्नी व सेवक के साथ पुष्कर पहुँचा।  पुष्कर तीर्थ स्नान कर अरावली पर्वतों को पार करके सप्तशत की ओर प्रस्थान किया। रात्रि में नीलकण्ठ महादेव के मन्दिर में आश्रय लिया। प्रातः पुजारी ने परिचय पूछा तो लाखणसी ने कहा, “महात्मन मैं सांभर नरेश सिंहराज का अनुज लक्ष्मण हूँ।  मैं अपने बाहुबल से कुछ बनना चाहता हूँ।” पुजारी के कहने पर वहाँ के राजा ने लक्ष्मण को नगर अध्यक्ष बना दिया।

 लाखणसी का पराक्रम और माँ की कृपा

एक दिन मेदों ने सप्तशत पर आक्रमण कर दिया।  भीषण युद्ध हुआ। लक्ष्मण ने अपनी तलवार का जौहर दिखाया। अकेले लक्ष्मण ने सैकडों मेदों को मार डाला।  उसकी वीरता से प्रसन्न होकर राजा ने आशीर्वाद दिया कि “माँ तुम्हारी सम्पूर्ण आशा पूर्ण करे, तुम्हारी कीर्ति दिग्दिगन्त तक फैले।” अंत में मेद थक कर भाग गए। लेकिन लक्ष्मण भी गंभीर रूप से आहत हुआ।

माता ने रात में स्वप्न में लक्ष्मण को दर्शन दिये और आशीर्वाद दिया “पुत्र निराश मत हो, प्रातः समय मालव प्रदेश से असंख्य घोड़े इधर आएंगे, तुम उन पर केसर मिश्रित जल छिटक देना जिससे उनका प्राकृतिक रंग बदल जायेगा और तुम उनकी एक अजय सेना तैयार कर लेना।” माँ की असीम कृपा से लक्ष्मण नाडोल का शासक हुआ। डॉ. दशरथ शर्मा के अनुसार इन घोड़ों की संख्या 12000 थी और मुथा नेणसी ने यह संख्या 18000 बतायी।

कुलदेवी ने लक्ष्मण की आशाओं की पूर्ति की, अतः यही शाकम्भरी देवी नाडौल की आशापूरा माता के नाम से विख्यात हुई। आशापूरा  माता के मन्दिर में मन्दिर में चैत्र और आश्विन के नवरात्रि के अतिरिक्त माघ शुक्ल द्वितीया को भी पर्व मनाया जाता है। इस मन्दिर का निर्माण लाखणसी चौहान ने किया, इसलिये इस दिन देवी महोत्सव और लाखणसी चौहान का जन्मोत्सव मनाया जाता है।

मंदिर व्यवस्था वहा की कमेटी द्वारा देखी जाती है जिसका चुनाव द्वारा चयन होता है। भक्त जन जो भी भेंट देते है उस से नव निर्माण करवाया जाता है। इस नव निर्माण में बालिका छात्रावास निर्माण का भी प्लान है। रुकने और भोजन की अच्छी व्यवस्था है।

नाडौल रानी स्टेशन से 21 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ यात्रियों के ठहरने और भोजन की सुविधाएँ उपलब्ध हैं। माताजी के मन्दिर के सामने महाराव लाखणसी की  प्रतिमा स्थापित है व बांयी ओर महाराव लाखणसी द्वारा निर्मित बावड़ी विद्यमान है।  जिसके द्वार पर गंगा मैया की प्रतिमा स्थापित है। मन्दिर का प्रांगण विशाल व रमणीय है।

#जय #मां #आशापुरा #जी। #Chauhan #Deora #hada #khichi #Nadol #pali  #Ashapuramaa #2023ready #newyear #happynewyear2023wishes

#कभी #अपनी #वीरता #की #कहानी #कहने #वाला #आज #रो #रहा #है #अपनी #बदहाली #पर। #जालोर_किल

#कभी #अपनी #वीरता #की #कहानी #कहने #वाला #आज #रो #रहा #है #अपनी #बदहाली #पर। #जालोर_किला आज के राजपूतों ने सिर्फ बोतले फोड़ी है! जब से पढ़ना शुरू किया तब से जिला जालोर सीखा है वहीं एक और जालोर नाम से कहीं ना कही एक जुड़ाव सा लगता है और उसका कारण जिस समाज और जाती धर्म में जन्म लिया उसके पुरोधा का रिश्ता कही ना कही इस नाम से रहा है। करीब दिन के ग्यारह बज रहे थे और सुबह सिरे मंदिर दर्शन कर नीचे आने की थकान भी लग रही थी पर कही ना कहीं ऐसा लग रहा था कि अभी आज कि यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है ऐसा कुछ है जो अभी अधूरा है और उसके बिना ये यात्रा पूरी नहीं हो सकती । में जालोर शहर की सड़क पर खड़ा था पर में जैसे ही थोड़ा उपर देखने की कोशिश करता तो ऐसा लग रहा था कि कोई ना कोई मुझे बुला रहा है और तुझे आना ही होगा। आखिर कार दोस्तो ने कहा कि अगर वहा नहीं गए तो ये यात्रा अधूरी है। अब पक्का कर दिया था कि भले ही अभी 1000 सीढ़ियां उतर कर आए है पर अभी सिरे की तरह सिर मोहर के जैसे खड़े स्वर्णगिरी का वो अभेद किला, वो किला जो सदियों से आज भी खड़ा अपने वीरता कि कहानी बयां कर रहा है और हर किसी को अपने वीरता की कहानी बता रहा था। हम तिलक मार्केट से एक संकरी गली से यात्रा सरू की और एक बेहद संकरी गली से पूछते पूछते हम आगे बढ़ रहे थे और अफसोस हो रहा था कि जो मिलो दूर से अपनी सैकड़ों वर्षो से पहचान बता रहा हो उसके देखने आने वाले को जाने का रास्ता पूछना पड़े। थोड़ी दूर शहर की गलियों को पार करते ही फिर हमे पूछना पड़ा की क्या इधर से कोई किले का रास्ता जाता है तो दूर बैठी एक महिला ने अंगुली से इशारा किया और हम समझ गए की उधर जाना है। जैसे ही नजर उधर गई ओर पहली चिढ़ी पर पैर रखा तो अपने आप को मन धिकार रहा था कि हम केसे वसंज है जो अपने पूर्वजों की कभी सुध भी नहीं लेते है और ऐसे जिनका पूरा इतिहास वीरता, शौर्य और जन सेवा,रक्षा में जीवन त्याग करने में भरा पड़ा हो। हर एक सीढ़ी अपनी दुर्दशा बता रही थी। में भी अब अपने ऊपर से प्रशासन पर इस बदहाली का ठीकरा फोड़ रहा था। 

 बेहद खराब, उबड़ खाबड़ रास्ता और गंदगी से भरा रास्ता को पार करते हुए हम सबसे पहले "सूरज पोल" पहुंचे जो अब एक जर्जर हालत में थी और उसकी दीवारों पर आजकल के इशकजादो ने कोयलों से अपने नाम से दीवारें भर दी थी, ये वो पोल है जिस पर किले का प्रथम द्वार माना जाता है जिस पर सुरक्षा का पहला जिम्मा होता है ओर गर्व होता है पर आज अपनी बदहाली पर रो रही थी। पोल के उपर हिस्से में कभी दुश्मनों को छक्के छुड़ाने वाली तोप झाड़ियों में पड़ी थी और मन्न ही मन कह रही थी कि जिसका समय होता है उसकी कीमत होती है बाकी कोई पूछता तक नहीं। इस जर्जर, और गंदगी आलम के साथ हमको "ध्रुव पोल, चांद पोल" यही कहानी कह रही थी कि अब हमारी कोई सुध लेने वाला नहीं है । हम 1345 चीढ़ीया चड कर आखिर उस सबसे ऊंचाई वाले जगह पर आ गए जहां से हम सब वर्षो से इंतज़ार कर रहे थे और रोज गर्व भी करते है। "मामा लाजे भाटिया और कुल लजे चौहान" जैसे प्रसिद्ध वीर दोहे इसी जगह के है। करीब 11 वी सदी में कीर्ति पाल चौहान ने इस किले को अपने आधिपत्य में लिया और वीरता की कहानी गढ़ी गई। इन्हीं के पीढ़ी में काका कन्हदेव और "वीर वीरमदे सोनगरा" जैसे वीर हुए और उस वक़्त के निर्लज, क्रूर आक्रमणकारी खिलजी से लोहा लिया था और अपनी आन बान शान और राष्ट्र धर्म की रक्षा के लिए हजारों वीर योधो के साथ युद्ध कर अपने आप को त्याग दिया था पर कभी समझोता अपने पूर्वजों के नियम उसूल से नहीं किया। राई रा भाव राते बिता वो भी यही किला था। आज जब इतने वीरता भरे किले में प्रवेश किया तो अपने ओर अपने समाज ओर धर्म प्रेमी लोगो पर गुस्सा आ रहा था। गुस्सा इस सरकार के उस विभाग पर आ रहा था जो अपने नाम के हिसाब से ही कार्य करता है। किले में गंदगी, दीवारों पर नाम, पुरानी वस्तु को कबाड़ में फेंका गया।वहीं पड़ी सड़ रही है कोई सुध लेने वाला नहीं है। राजा मान सिंह और रानी का महल रो रहे थे अपने ऐसे हालात पर और उसकी पुष्टि कर रहा था उस के द्वार पर लगा पुरातत्व विभाग का बोर्ड जो इस हालत का साक्ष्य दे रहा था क्युकी उसका नाम भी साफ नहीं पढ़ पा रहे थे। किले के उपर महादेव मंदिर , चामुंड मंदिर, जैन मंदिर और भेरव जी के मंदिर मानो ये कह रहे थे कि अब अगर ज्यादा देर की तो कोई और यहां पर आ जाएगा और तुमरी पीढ़ियों को शायद हम भी ना दिखे। जहा कोना मिला वहा अतिक्रमण हो रहा है ।हर जगह मानो जैसे एक अभियान के तहत हो रहा हो। पर सब मौन है। 

शायद सब कुछ बित जाने पर जगेंगे जैसा हमेशा होता है। हम तो जीमेदर है साथ ही साथ ये पुरातत्व विभाग उतना ही खलनायक रोल में है जितना कि उस वक़्त में कोई आक्रमण करने वाला दुश्मन होगा, कोई किसी प्रकार का रख रखाव नहीं है। सब कबाड़ बन गए। कुछ जगह दीवारें गिरने की कगार पर है पर ये विभाग भी शायद उसका मानो इंतज़ार कर रहा हो। उसी और एक आशापुरा का मंदिर बन रहा है सोचा चलो कुछ अच्छा हो रहा पर जब जानकारी इकठ्ठा की तो एक बड़ा धक्का लगा कि उस मंदिर को कोई एक परिवार अपने श्रद्धा के हिसाब से बना रहा है। अरे हम तो जालोर सिरोही पाली अजमेर ओर पूरे भारत में कितने चौहान परिवार है क्या हम सब एक मा आशापुरा का मंदिर नहीं बना सकते पर अफसोस ना तो कोई किले आता है और ना किसी को पता हम तो अपने नाम के पीछे चौहान, गाड़ी के पीछे, कंकू पत्री या कहीं और सिंह लगाने में खुश है। हम वीरता के गाने गावरा कर अपनी झूठी शान में अपने आप को राजपूत हिन्दू मान कर अपने मन को खुश करते है। भेरूजी के भोपा जी ने भेरूजी के स्वभाव के हिसाब से बड़े कड़े ओर तीखे शब्दों में किले पर किस तरह किस किस ने अतिक्रमण किया उसका पूरा वृतांत सुनाया ओर अंत में इतना ही कहा कि में यहां वर्षो से हूं पर कोई राजपूत यहां नहीं दिखते है और जाते जाते इतना कहा कि राजपूतों ने तो बोतले फोड़ी है बाकी इतिहास को कोई देखभाल नहीं होता सब मौन ओर सोए हुए है। पर अंत में यह भी कहा कि आज का युवा पढ़ रहा है और ऐसे कार्यों के लिए जागरूक भी हो रहा है। अपने समाज को जगहों। अरे कभी अपने उस वीर योद्धा की तरह अडिग खड़ा उस किले पर जाकर तो आइए फिर मेरी तरह आप को अफसोस और झूठी शान करने में शर्मनदगी ओर दुख होगा। मेरी तो आप सब बंधुओ से एक ही प्राथना है आप जिस पर घमंड,गर्व करते है कभी तो उसकी सुध लो और पता करो हमे क्या करना था और क्या अब कर सकते है। माफ़ करना, ऐ विशाल किला तेरी इस दुर्दशा के कोई सबसे ज्यादा जिम्मेदार है तो हम और वो सब है जो वीरता, इतिहास का ढोल पीटने में कोई कमी नहीं रखते है और जो पास सबूत है उसकी हम कदर नहीं करते । आप को अगर कुछ भी सही लगा हो तो शेयर करे। एक बार जरूर पधारे.... #जालोर #किला #Jalore_fort
https://www.niharikatimes.com/rajasthan/jalore-fort-54054421.htmlhttps://www.niharikatimes.com/rajasthan/jalore-fort-54054421.html

रविवार, 20 नवंबर 2022

#इतने #बड़े #जनसंख्या #वाले #देश #में #एक #अच्छी #टीम #नहीं ?? #भारत

#इतने #बड़े #जनसंख्या #वाले #देश #में #एक #अच्छी #टीम #नहीं ?? आज दुनिया में फुटबॉल का महाकुंभ श्री का श्री गणेश हो रहा है और वही विश्व में जनसंख्या में एक नंबर की और बढ़ रहे हम भारत में एक अच्छी फुटबॉल की टीम नहीं है जो इस बड़े महाकुंभ में खेले। हम एक किर्केट के पीछे इतने दीवाने है की इस बड़े खेल को भूल गए। भारत फीफा में 104 नंबर रैंकिंग में है जो एकदम नीचे पायदान में है। इसके कारण वर्षो पहले से राजनीतिक उदासीनता और खेल के प्रति भारत में जागरूकता का अभाव कम होना। पहले वर्षो में भारत की राजनीतिक इतनी मजबूत नहीं थी कि वो विश्व के राजनीतिक चक्र व्यू से जीत कर भारत को इस महाकुंभ में आगे ले जा सके। भारत के हर गांव, स्कूल ओर राज्य स्तर तक फुटबॉल खेला जाता है पर आगे कोई अच्छा संगठन नहीं होने के कारण इस खेल को हर तरफ से इतना प्रोमोशन और प्रसिद्धि नहीं मिली की आज के अभिभावक अपने बच्चो को फुटबॉल कि ट्रेंनिग दिलवाए वर्ना आजकल हर कोई क्रिकेट की ट्रेंनिग करवाते है। हमारे देश में वो खिलाड़ी भी मौजूद है जो इन विश्व के खिलाड़ियों से भी आगे है और वो है सुनील छेत्री जो सबसे जयदा गोल का रिकॉर्ड उनके नाम दूसरा है पर अफसोस एक अच्छी टीम नहीं होने के कारण वो नहीं खेल सकते। इस टूर्नामेंट की इनामी राशि अरब रुपयों में है और करीब पूरी दुनिया एक महीना इस खेल के बुखार में रहगी। इस बार मिडल इस्ट देश कतर को मेजबानी का मौका मिला है और उसने शानदार 8 मैदान का निर्माण करवाया है। पर वो देश इस बड़े खेल के लिए अपने नियमों में कोई बदलाव नहीं किया ..जैसे शराब मैदान में नहीं पी सकते। कतर में ऐसे भी शराब और अन्य चीजों को वहा मान्यता नहीं है। मेरी पसंदीदा टीम भारत है पर भारत नहीं खेल रहा इसलिए अर्जेंटीना है और मैसी बेस्ट खिलाड़ी। उम्मीद है मैसी इस बार वर्ल्ड कप जीत कर अलविदा कहेंगे। हा भारत की टीम तो नहीं पर ओपनिंग सेरेमनी में बॉलीवुड से नुरा फतही नृत्य करती दिखेंगी.....देश सरकार को इस खेल को बढ़ाना चाहिए। #FIFAWorldCupQatar2022 #FIFAWorldCup #lionelmessi #urgentina

शनिवार, 4 दिसंबर 2021

कौन है ट्विटर के न्यू चीफ एग्जीक्टिव ऑफिसर- पराग अग्रवाल। ट्विटर। हिंदी। hindi| Twitter CEO | Parag Aggarwal

दोस्तों कुछ दिन पूर्व ट्विटर के न्यू CEO बॉस के नाम कि घोषणा हुई उसी वक्त उस घोषणा का असर सीधा हमारे देश में देखा गया और हर जगह बधाई के संदेश देने की होड़ मच गई। जी हां क्युकी दुनिया की इस बड़ी कम्पनी के न्यू बॉस का नाम था पराग अग्रवाल। जो की एक भारतीय है। एक भारतीय का विदेशी बड़ी कंपनी के बॉस बनना अपने आप में एक बड़ा गर्व कि बात है हम सब भारतीयों के लिए।
कौन है पराग अग्रवाल।

दोस्तो पराग अग्रवाल आज एक बड़ी कंपनि के बॉस मतलब चीफ ए्जीक्यूटिव ऑफिसर है। जिनका जन्म राजस्थान के अजमेर शहर में हुआ। 

पराग अग्रवाल का जन्म अजमेर में हुआ था जिनकी उम्र 37 वर्ष है। उनकी शादी विनीता अग्रवाल से हुई है और उनके एक पुत्री है। पराग के माता पिता का नाम राम गोपाल अग्रवाल और शशि अग्रवाल है।

पराग अग्रवाल ने अपनी स्कूली शिक्षा एटनोमी एनर्जी सेंटर मुंबई ओर इंजीनियरिंग के लिए उन्होंने परीक्षा दी थी और उसमें उनकी रैंक 77 वी आई थी। फिर बी टेक इन्होंने कंप्यूटर साइंस में आई आई टी मुंबई से कि। 
2012 में इन्होंने पी एच डी कंप्यूटर साइंस में स्टैंड फोर्ड यूनिवर्सिटी से की। 
2001 में पराग अग्रवाल ने गोल्ड मेडल जीता था फिजिक्स ओलंपेड जो इस्तांबुल में आयोजित हुआ था।

पराग अग्रवाल का कैरियर

पराग अग्रवाल ने 2005 में कार्य करना शरू कर दिया था । पराग अग्रवाल ने 2011 में ट्विटर ज्वॉइन किया उस से पहले माइक्रो सॉफ्ट, याहू, एटी & टी लैब में एज रिसर्च करना सरु किया था।

2011 में पराग अग्रवाल ने दिस्टिनुगाइज सॉफ्ट वेयर इंजिनियर के रूप में कार्य शुरू किया था उसके बाद इनको एड रिलेटेड प्रोडक्ट पर कार्य करने के लिए नियुक्त किया।फिर अर्टिफिकल इंटेलिजेंस पर कार्य किया।
2017 में पराग अग्रवाल ट्विटर के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर पर नियुक्त किए गए। तब से अब तक वो उसी पद पर रहे। 

अक्टूबर 2021 में इन्हे चीफ एग्जीक्ट ऑफिसर बना दिया गया। 

ट्विटर कंपनी के बारे में

ट्विटर कंपनी 21 मार्च 2006 में अमेरिका में बनी थी इसके संस्थापक जैक डॉर्सी, बीज स्टोन, एवन विलियोमस, नोआहा ग्लास ट्रेडिंग थे। इसका मुख्यालय सैंन फ्रांसाइस्को और कैलिफोर्निया में है।

ट्विटर कंपनी एक माइक्रो ब्लॉगिंग कंपनी है जिस आप सोशल मीडिया का भाग समझ सकते है। इस कंपनी का कार्य पब्लिक नेटवर्किंग का है। इस पर यूजर अपना अकाउंट बनाते है और फिर उस अकाउंट से कोई भी यूजर किसी भी देश दुनिया के यूजर से जुड़ सकता है। इसमें यूजर लिख सकता है। फोटो शेयर कर सकता है । वीडियो शेयर कर सकता है। इस पर लोग एक दूसरे को फॉलो करते है। अब इस पर एक नया ऑप्शन स्पेस करके आया है जो को स्पेस क्रिएट करके कही लोगो से ऑडियो बात एक साथ कर सकते है। 

ये दुनिया कि बड़ी माइक्रो ब्लागिंग साइट है फेस बुक की तरह इस पर दुनिया के बड़े लोग,संस्था ओर आम लोग भी जुड़े हुए है। इसके करीब 330 मिलियन यूजर है। ये भारत में भी बहुत एक्टिव है। 

इसके जैक डोर्सी जो कि फाउंडर और चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर थे उन्होंने पद त्याग कर उनकी जगह पराग अग्रवाल बने।

पराग अग्रवाल की सैलरी

पराग अग्रवाल की सैलरी करीब 7 करोड़ और बाकी अन्य सुविधा बता रहे है।

विदेशी कंपनी के भारतीय सीईओ

दोस्तो हमे गर्व है भारतीय टैलेंट पर जो कही बड़ी विदेशी कंपनियों के आज सीईओ है और सफलता पूर्वक कंपनी चला रहे है।

पराग अग्रवाल जो को युवा सीईओ है ट्विटर के
सत्या नडेला जो कि माइक्रो सॉफ्ट के सीईओ है
सुंदर पिचाई जो कि अल्फाबेट के सीईओ है
सांतनु नारायण जो कि एडोब के सीईओ है
अरविंद कृष्णा जो कि आई बी एम के सीईओ है
संजय मेहरोत्रा जो माइक्रोन टेक्नोलोजी के सीईओ
नीकेश अरोरा जो पालो अल्टो नेटवर्क के सीईओ
रंगराजन रघुराम जो वी एम वायर के सीईओ है
जयश्री उत्तल जो कि अरिस्ता नेटवर्क के सीईओ है
जॉर्ज कुरियन जो की नेट एप के सीईओ है
रेवती अद्वैठी जो कि फ्लेक्स के सीईओ है
अंजलि सुद जो की विएमो के सीईओ है

ये सब भारतीय मूल के विडिशी कंपनियों के सीईओ है इसमें पराग अग्रवाल सबसे कम उम्र के सीईओ है।

पराग अग्रवाल का ट्विटर हैंडल
@paraga

अगर अच्छा लगा हो तो शेयर करे। थैंक्स

श्रवण चौहान






गुरुवार, 25 नवंबर 2021

Crypto currency | Hindi | About Crypto | Bitcoin

करिप्टो करंसी क्या है। Crypto currency

एक ऐसी करंसी जिसे ना देखा जा सकता है ना स्पर्श किया जा सकता है, ना जेब या बक्शे में रखा जा सकता है और ना ही उस से बाजार में सब्जी तक खरीद सकते है।

करिप्टों करंसी पूरी तरह अदर्शय दुनिया का भाग है। यह कंप्यूटर पर ही चलती है इसका काम काज भी कंप्यूटर की दुनिया से ही होता हैं। पेपरलेस है।

इस करंसी का कोई माई बाप नहीं है इसकी कोई सीमा निर्धारण नहीं है इसको पूरी दुनिया में कहीं से भी ले बेच सकते है।

इसको निर्धारण करने के लिए कोई ऑथराइज्ड एक्सचेंज नहीं है।

करीप्टो करंसी का इतिहास

ये करंसी करीब 2009 में कंप्यूटर पर पहली बार ट्रेड हुई ओर सबसे पहली करेंसी बिटकॉइन थी जिसके मलिक सतोशी नकामोटो जापान के थे।

अब तक कितनी करिप्तो करंसी ट्रेड कर रही है।

अब तक पूरी दुनिया में करीब 1800 करंसी ट्रेड कर रही है। और इसमें करीब टॉप 10 करंसी है जो जायदा चलन में है। 

टॉप दस क्रिप्तो करंसी

करीपटो करंसी दस इस प्रकार है।
1. बिटकॉइन
2. इथुरम
3.बिनांस
4. टेदर
5. सोलाना
6. कारदना
7.एचआरपी
8. पल्कादोट
9.यूएसडी कॉइन्न
10.डॉजेकॉइं
ये बड़ी दस कृप्टो करंसी है जो आजकल ट्रेड कर रही है।

कैसे बनती है। करीपटों करंसी

ये जिस तरह से सोना चादी की माइनिंग होती है उसी तरह कंप्यूटर पर बड़े जटिल कोडिंग करेक इसका निर्माण होता है इसको बनाना बहुत ही मुश्किल है। और इसको कॉपी नहीं होती है। 

कैसे ट्रेड करती है और भारत में इसके प्लेटफॉर्म

ये पूरी तरह कंप्यूटर बेस है इसको कंप्यूटर पर उपलब्ध कुछ प्लेटफॉर्म के जरिए इसे खरीद बेच सकते है । सबसे पहले आप किसी प्लेट फॉर्म पर अपनी आईडी बनाएंगे फिर उस पर एक वॉलेट बनेगा उस वॉलेट में आप पैसा ट्रांसफर करेंगे और फिर आप उस प्लेटफॉर्म के जरिए कोई भी करिपटों करंसी खरीद और बेच सकते है। 

आप जो भी करंसी खरीद बेच सकते है उस पर ये प्लेटफॉर्म अपना मार्जिन लेते है। ये करंसी सीधी त्रंसाक्शन करती है जैसे ही आप कोई करंसी खरीदते है या बेचे तो वो सीधा ब्लॉक चैन टेक्नोलॉजी के जरिए वेरिफाई होकर आप के वॉलेट में आ जाती है।

भारत में इसके प्लेटफॉर्म

दोस्तों हाल ही में क्रिकेट के मैच में इन कुछ ऐप के विज्ञापन भी आते थे। इन से कुछ ऐप इस तरह से है।

1. Wazirx
2.Coinbase
3.Coinswitch
4.Binance
5.Bitbns
6.CoinDcx
7.zebpay
8.investing
9.Kuno
10.Unocoin

इस तरह करीब 30 ऐप मिल जाएंगे जो इंडिया में इस करंसी के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराते है।

भारत में इसका ट्रेडिंग

हमारे देश में इसका अभी तक कोई कोई कानूनन मान्यता नहीं मिली है ओर पूरी दुनिया में एक देश के अलावा किसी देश ने करंसी के रूप में मान्यता नहीं दी है। दो साल पहले भारत ने इस पर रोक लगाई थी पर कोर्ट ने हटा लिया था और अब तक इस पर कोई ठोस कानून नहीं बना है।

खबरों के मुताबिक करीब भारत से 10 से 15 करोड़ लोग इसमें इन्वेस्ट कर चुके है ओर उसका वॉल्यूम भी बड़ा है। इस पर कोई टैक्स भी नहीं लगता क्युकी कोई पुख्ता डाटा नहीं होता।


इस करंसी के खतरे

इस करंसी को अभी तक कोई देश ने करंसी के रूप स्वीकार नहीं किया है क्युकी इसका कोई ऑथराइज्ड एक्सचेंज और ना ही इसके कोई ऑनरशिप ले सकता है। इसका उपयोग मनी लांड्रिंग ओर अन्य गतिविधियों के लिए भी हो सकता है ऐसा खबरों में बता रहे है। इसका कोई ऑफिस नहीं होता है।

इसके भाव कैसे तय होते है

इस करंसी का भाव डिमांड अंड सप्लाई पर निर्भर करता है ये एक दिन करोड़ पति तो पल में जीरो भी कर सकती है। 

हो सकता है इसे करंसी ना पर कोई कमोडिटी के रूप में मान ले कानूनी नियमो के बाद।

इसे सिर्फ जानकारी मात्र समझे। पिछली पोस्ट जरूर पढ़े। थैंक्स

श्रवण चौहान

बुधवार, 24 नवंबर 2021

medplus helath services । IPO। Company details। hindi ।share | Market|

दोस्तों में आपको उस कंपनी के बारे में जानकारी देना चाहता हूं जिसका करीब इसी महीने मार्केट में आईपीओ आने वाला है। 

कम्पनी का रजिस्ट्रेशन,ऑफिस 

में बात कर रहा हूं मेडप्लस हैल्थ सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के बारे में। कंपनी का रजिस्ट्रेशन 2006 में किया गया था ओर इसका हेड ऑफिस हैदराबाद में आया हुआ है। कंपनी करीब 15 साल से बिजनेस कर रही है। 

कंपनी का बिजनेस

कम्पनी के बिजनेस मॉडल की बात करे तो कंपनी देश की सेकंड लार्जेस्ट रिटेल फार्मेसी चैन कंपनी है । 

कम्पनी रिटेल फार्मेसी में मेडिसिन,विटामिन,मेडिकल उपक्रम,टेस्ट किट,घर केयर और पर्सनल केयर के समान उपलब्ध करवाती है। 

कंपनी रिटेल ओर ओमनी सेवा के जरिए भी ग्राहक को अपने प्रूड्क्ट की सेवा उपलब्ध करवाती है। 

कंपनी के पास 48 स्टोर है जो हैदराबाद में है और करीब 2000 डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क है जिसमें देश के तमिल नाडु, आंध्रा प्रदेश, तेलगाना,कर्नाटका,ओड़िशा,वेस्ट बंगाल और महाराष्ट्र में इस्थित है। ये आंकड़े 31 मार्च 2021 तक के है।

कंपनी रिटेल फार्मेसी के साथ साथ ऑनलाइन ऑर्डर अपने नेटवर्क जगह तक लेती है । 

कम्पनी के फाइनेंशियल आंकड़े

कंपनी के फाइनेंशियल को देखे तो । कंपनी का राजस्व साल 20 में 2887 करोड़ और साल 21 में 3090 करोड़ दिखाया गया है।

कंपनी के प्रॉफिट में साल 20 में 1.79 करोड़ और 21 में 11.92 करोड़ दिखाया गया है।

कम्पनी के आईपीओ

कपनी का आईपीओ इसी महीने शरु होने की उम्मीद है ओर इसका इश्यू शेयर प्राइस भी तभी पता लगेगा। 
कंपनी करीब 1639 का आईपीओ लाने का प्लान किए हुए है जिसमें संभावित क्यूआईबी को 50% अलॉटमेंट, एनआईआई को 15% अलॉटमेंट और रिटेल कोटे में 35% की संभावना है। 

ये जानकारी मात्र समझें। आंकड़े पब्लिक डोमिन के हिसाब से है।

पिछली पोस्ट भी जरूर पढ़े। थैंक्स

श्रवण चौहान



मंगलवार, 23 नवंबर 2021

ये आ रहे है 6 न्यू आईपीओ। 6 New IPO | Hindi |


ये 6 कंपनियों के आईपीओ आ रहे है ।

दोस्तों इस साल एक के बाद एक न्यू आईपीओ मार्केट में आ रहे है और एक दो कंपनी के आईपीओ के अलावा सभी कंपनी के आईपीओ ने इस साल निवेशकों को एक मुस्कान या फिर यूं कहे कि अच्छा प्रॉफिट बुक करवाया है । 

अब आज कुछ ओर न्यू आईपीओ आने कि बात सामने आही है। और एक नहीं करीब 6 कंपनियों के आईपीओ बाजार में अगले महीने तक दिख जाएंगे। 

कौनसी छ कंपनी के आईपीओ आ रहे है। 

दोस्तों सेबी ने आईपीओ के लिए जमा किए ड्राफ्ट में से इन 6 कंपनियों के आईपीओ को बाजार में आने की मंजूरी दी है। 

न्यू कंपनियों के आईपीओ के नाम

दोस्तो तो इस प्रकार है ये नाम।

1. Medplus health services

2.Rategain Travel technologies

3.Purnik Builders

4.Fusion Micro Finance

5.Tracxn Technology

6.Prudent corporate Advisory Services

 ये ऊपर लिखित कंपनियों के नाम है जो अगले महीने तक मार्केट में अपने आईपीओ लेकर आ रही है। 

दोस्तो अगली पोस्ट में एक एक कंपनी के बारे में जानकारी देने की कोशिश करूंगा। 

ये मात्र जानकारी समझे। पिछली पोस्ट जरूर पढ़े। थैंक्स।

आईपीओ की लिस्टिंग धमाकेदार रही। हिंदी। शेयर मार्केट।Latent view ipo | share market| Hindi


Letent view आईपीओ ने धमाकेदार अपनी लिस्टिंग करवाई मार्केट में और इससे लोगो के चेहरे पर खुशी छा गई।  

कुछ दिनों से मार्केट का मूड खराब दिख रहा था और पेटीम आईपीओ की कमजोर लिस्टिंग के बाद लोग थोड़े निराश दिख रहे थे जो की आज लेंटेट व्यू आईपीओ ने ढाई गुना कमाई करवाकर निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान ला दी।

लेटेंट व्यू के आईपीओ की इश्यू प्राइस जो कि 190-197 के बीस थी वो आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में 530 ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में 512.20 पर लिस्टिंग हुआ। करीब ढाई गुना हो गया। 

शेयर प्राइस 548 हाई ओर 461.10 लॉ के साथ 488.75 के आसपास बन्द हुआ। 

आज मार्केट भी कल के मुकाबले आज वापसी करता दिखा। 
थैंक्स
ये मात्र जानकारी के लिए है।
श्रवण चौहान

सोमवार, 22 नवंबर 2021

Why Market down yesterday। Hindi। share market। शेयर मार्केट।हिंदी।

कल क्यू मार्केट गिरा।

दोस्तों कल शेयर बाजार एक बार फिर मूड में नहीं दिखा और इस वर्ष का तीसरा बार बड़ा कमजोर दिन रहा मार्केट का। 

पिछले कुछ दिनों से मार्केट में एक कमजोरी सी आ गई है और मंदादिए हावी हो गए है। 

कल मार्केट 1170 प्वाइंट गिर कर 58 हजार पर बन्द हुआ और यही हाल निफ्टी का चल रहा है। 

आखिर क्या वजह है

दोस्तो मार्केट हमेशा इंटर्नल ओर एक्सटर्नल फैक्टर पर रिएक्शन करता है ओर आप भी अगर मार्केट को वॉच कर रहे है तो आइए जानते है इसकी कुछ मुख्य वजह।

पहला कारण

पेटिएम आईपीओ की कमजोर लिस्टिंग

दोस्तो कोरोणा काल से डिजिटल युग में बड़ा बदलाव देखा गया और सबसे ज्यादा डिजिटल त्रंसाक्शन हुए और इसमें इंडिया मार्केट में पेटियम बड़ी कम्पनी रही है। कोरोनां के बाद कुछ दूसरी कंपनियों के आईपीओ आए ओर उसमे उत्साह देखा गया और नए लोग मार्केट में जुड़ते गए। अब इस कंपनी ने आईपीओ लाया ओर देश का बड़ा आईपीओ लाया पर दिन के सरु से लोगो का मूड थोड़ा उदासीन रहा और आईपीओ की लिस्टिंग बहुत कमजोर रही जिससे की मार्केट में रिएक्शन दिखने लगा। ओर कल भी इसके शेयर गिर गए।

दूसरी वजह 
एफआईआई की बिकवाली

अगर माने तो एफआईआई ने बिक्री की है। दोस्तों बड़े विदेशी ब्रोकृगेहाउस ने भारत का आउटलुक डाउन ग्रेड करके न्यूटल या उंडर परफॉर्म रखा है जिससे एफआईआई ने बिक्री की है।

तीसरा कारण
 कृषि बिल कानून वापसी

यही है जो कि देश की राजनीति से जुड़ा है और उसे एक्सटर्नल फैक्टर मानते है ।दोस्तो कुछ दिन पूर्व मोदी जी ने कृषि कानून बिल वापसी की घोषणा से मार्केट पर असर पड़ा है।क्युकी मार्केट को उम्मीद थी कि कृषि बिल से देश में विदेश निवेश बढ़ेगा कृषि सेक्टर में पर अब इसके वापसी से असर दिख रहा है।

कल कोंसे सेक्टर में कमी और तेजी रही।

दोस्तो कल करीब करीब सभी सेक्टर पर असर रहा सिर्फ टेलीकॉम ओर मेटल के अलावा। 

कमजोर सेक्टर में अगर देखने जाए तो रियल्टी,एनर्जी,ऑयल,ऑटो, फाइनेंस, हेल्थकेयर, आईटी और पावर सेक्टर में कमजोरी दिखी।

ऐसे 355 स्क्रिप्स ऐसी थी जो इस वर्ष के नीचे पायदान पर थी।

आप को जानकारी कैसी लगी अपना जवाब कमेंट के माध्यम से जरूर देवे। थैंक्स


ये मात्र जानकारी है।

श्रवण चौहान

पिछली पोस्ट पढ़े।
http://letstalk010.blogspot.com/2021/11/why-market-down-yesterday-hindi-share.html

Go color IPO Details GMP। Today Go color GMP। Hindi । हिंदी

Go color GMP

अभी हाल गो कलर्स का gmp देखे तो #470 के आस पास बता रहे जो कि कल से कम दिखा रहा है। 

ताजा आईपीओ जो चल रहा है वो है गो कलर्स का है और आज उसका लास्ट डेट है । 

गो कलर्स का आईपीओ 17 नवंबर को प्रारंभ हुआ था और आज उसका लास्ट तारीख है। गो कलर्स एक ब्रांड नेम है जो कि कंपनी नाम "गो फैशन इंडिया लिमिटेड के नाम से है जो वर्ष 2010 में प्रारंभ हुई थी। इसके प्रमोटर श्री प्रकाश कुमार सरावगी,गौतम सरावगी, राहुल सरावगी, पी के एस, वी के एस फैमिली ट्रस्ट है। कंपनी का हेड ऑफिस चेन्नई में स्तिथ है। 

कंपनी भारत की सबसे बड़ी एक मात्र कंपनी है जो महिलाओ के बॉटम वियर प्रुडक्ट बनाती है। उसके पास कई रंगों में कई डिजाइन के परिधान मिल जाएंगे। 

कंपनी गो कलर्स ब्रांड से जानी जाती है और ये डिजाइन, डेवलपमेंट,सोर्चिंग,मार्केटिंग और रिटेल बिक्री करती है। इसके करीब 23 राज्यो मे 450 एक्सक्लूसिव ब्रांड स्टोर है। 

कंपनी के डिस्ट्रीब्यूशन चैनल में रिलायंस रिटेल,सेंट्रल, अनलिमिटेड और स्पेंसर जैसे नाम शामिल है ।

कंपनी ऑनलाइन सेल भी करती है।

Go color IPO Details
गो कलर्स आईपीओ डिटेल्स

कंपनी का आईपीओ 17 को शारू होकर आज 22 नवम्बर लास्ट तारीख है।शेयर कीमत 650-690 रखी गई है जिसमें एक लोट में 21 शेयर होंगे।  कंपनी के आईपीओ की साइज 1013.61 करोड़ है । 

कंपनी के आईपीओ का सब्सक्रिप्शन आज तक करीब टोटल 135.28 टाइम्स जिसमें रिटेल का 48.73 टाइम्स हो गया है । 

कंपनी शेयर अलॉटमेंट 25 नवम्बर और लिस्टिंग डेट 30 नवम्बर संभावित हो सकती है।

ये सिर्फ जानकारी मात्र समझें। थैंक्स

श्रवण चौहान।

मूंगफली की फसल और फायदे।

मूंगफली की फसल और फायदे।  मूँगफली peanut, या groundnut, वानस्पतिक नाम : Arachis hypogaea. https://youtube.com/shorts/PCXDt5vbxd0...