शनिवार, 11 जुलाई 2020

चल हट कोरोना... हम हिम्मत नही हारते 😁


भगवान श्री कृष्ण ने कहा है ... 
व्यर्थ की चिंता ना करे आप को कर्म करना है और उसके लिए आप जरीया है जो इस दुनिया मे आये हो. आजकल कुछ ऐसे ही विचार और मैसेज आप के दिमाग में और हम सब के दिमाग मे चलते हैं और इस तरह के मैसेज ही हम को जीवन मे आ रही विपरीत हालातो से लड़ने और संबल होने का साहस देते है.                           
इस वर्ष के प्रारम्भ मे ही एक बिमारी धिरे धिरे फड़फड़ाने लगी थी और उसका मुख्य केन्द्र बिन्दु हमारे एशिया के एक देश जो विस्तारवाद को बढाने के लिए जाना जाता है और इसका नाम है चीन.
यह बिमारी हमारे देश मे मार्च के अन्त होते होते मुख्य खबर और विषय बन गया और तेज रफ्तार से चल रहा यह देश और हमारी जिन्दगी ने अचानक हैवी ब्रेक लगा दिये.
उस वक्त कुछ समझ नही आया क्या हो रहा है किधर जाये, कैसे जाये, कब जाये, जाना चाहे तो कैसे जाहे यह ही सवाल दिमाग मे दौड़ रहे थे.
जो कोई भी जहां था उधर ही कैद हो गया बड़ी विकट भय उतपन्न हो गया था धिरे धिरे वक्त बिता और कुछ हालात बदले, लोग अपने गंतव्य जगह पहूंच गये पर बिमारी ने अपने डरावने वाले आकड़ें बढा दिये थे और बस रहे हैं.
अब करीब चार पांच महीने  होने को आया लोकडाउन का अनलोक हो गया पर ट्रेन पटरी पर चढने मे देर ले रही है.
अब सुबह से शाम इस बात का डर और चिंता रहती है की कैसे चलेगा घर, कैसे करेगें काम इस तरह के सवाल भी हर किसी के दिमाग मे चल रहे हैं क्युकी उघोग धन्धे रफ्तार नही पकड़े हैं, बिमारी का डर ऐसे ही बना हुआ है और उपर से इनकम बदं है.
किसी की इनकम बंद हो गयी है तो किसी की कम हो गयी हैं और किसी की कब बंद हो जाये कह नही सकते पर जीवन का मंथन जरूर चल रहा है.
दोस्तो जीवन मे समस्या तो है इनकम कम या हो भी नही रही है , पर एक हथियार आप के पास है जो उन सब बातों पर भारी पड़ेगा और वो आत्मबल, आप का विश्वास, भगवान मे विश्वास और विपरीत हालातो मे जीने का तरीका अगर यह सब आप के पास है, आप के पास है, जरूरत है बस उसके उपर जमी धुल को साफ करे और कहीये मे आने वाली हर मुशकिलो का सामना करने के लिए तैयार हूं, मे भागीरथी पुत्र हूं जो चौदह वर्ष तक कड़ी भक्ति कर सकता हूं, मे राम पुत्र हूं जो सुख की जिन्दंगी छोड़ कठिन जीवन जी सकता हूं.
फिर मे हार कैसे मान लूं आने वाली समस्या से लड़ने के लिए ही तो जीना है.
जीवन जीने के जिन आवश्यक चीजो की जरूरत होती है वो पैसो से खरीदनी पड़े उसका इन्तजाम आप कर सकते हैं और हमारे तो लोकजीवन मे बचत का महत्व हमेशा बताया गया है की जो बचत करेगा वो मौज करेगा.
हम कितना कमा रहे हैं वो महत्व नही रखता बल्कि महत्व यह  रखता है की हम कितना बचा रहे हैं. इस बचत विधा की कला घर चलाने वाली गृहणी पर निर्भर करती है की कैसे जीवन चलाना है और विपरीत हालात मे गृहणी आप को इसी बचत के कारण समस्या से लड़ने मे सहयोग करती हैं.
आदमी जरूर कैसे भी करके कमाने का प्रयास करेगा इन हालात मे पर उस बोझ को कम करने का काम एक गृहणी ही कर सकती है,इस वक्त मे आदमी को हिम्मत कोई बधां सके तो वो गृहणी ही है.
गृहणी कम साधन मे भी घर चला लेगी बस आप को हिम्मत नही हारनी है.
वक्त तो अवश्य बदलेगा, आज रात है तो दिन जरूर होगा वर्ना यह दुनिया की  रीत ही खत्म हो जायेगी. इसलिए दोस्तो अभी क्या हो रहा है और क्या होगा उस पर चिंता ना करे यह आप के साथ नही पुरे जहां मे हो रहा है आप एक अकेले पर संकट नही यह हम सब पर है. बस इस वक्त इस बिमारी को कैसे दुर रखे उस पर जरूर विचार करे. सावधानी और सावचेती ही बचाव होगा.
हम भारतवासी कभी हिम्मत नही हारते..
जरा हंस लो और हर फिक्र को धुएं में  उड़ा लो...😁
श्रवण चौहान
वक्त मिले तो ब्लोग पर नजर मार लो 😁
www.aajkibat20.blogspot.com

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